Surah juma in hindi text & translation, english & arabic – सुरह जुमा हिंदी में

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Surah juma in hindi में हम आपको surah juma से जुड़ी सभी जानकारी देंगे।

मेरे अजीज दोस्तों सूरह जुमा कुरान मजीद की बहुत ही अफजल और रहमत वाली सूरह है; इस सूरह की फजीलत इतनी जाती है कि हम आपको सारी नहीं बता सकते हैं।

सूरह जुमा की अहमियत आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि जो हम जुमे की नमाज अदा करते हैं; उसे अदा करने का हुक्म हमें सूरह जुम्मा से ही मिलता है।

सूरह जुमा इसलिए भी पढ़ना जरूरी है, क्योंकि हजरत इब्न अब्बास रजि अल्लाहु अन्हुम से रिवायत है; की रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम जुम्मे के दिन ईशा की नमाज पढ़ने के बाद सूरह जुमा को पढ़ा करते थे।

सूरह जुमा फिरयकीन में नातफ्फाकी खत्म करने के लिए बड़ी मौशर है।

दोस्तों आपको अब तक तो यह पता चल गया होगा कि सूरह जुमा की कितनी बड़ी अहमियत है।

कुछ बातेँ सुरह जुमा की (surah juma in hindi)

दोस्तों हमने आपको यह तो बता दिया कि जुम्मे के दिन के बारे में हमें सूरह जुमा से ही मालूमात होती है।

अब हम कुछ ऐसी बातें जान लेते हैं जिसका जानना हमारे लिए जरूरी है; हालांकि यह सब चीजें कोई हमसे पूछता नहीं है लेकिन जानकारी होना जरूरी है।

क्योंकि हम हर हफ्ते जुमे की नमाज अदा करते हैं और अगर हम सूरह जुमा न पढें; और उसके बारे में ना जाने तो यह हमारे ख्याल से गलत बात है।

Surah juma facts in hindi (surah juma in hindi)

  • Surah Juma कुरान मजीद की मुसब्बिहात सूरतों में से एक है; मुस्तब्बिहात सूरतों से मुराद यह है, कि ऐसी सूरह जो शुरू होती हैं अल्लाह की तस्बीह के साथ।
  • Al juma surah मदिना में नाज़ील हुई।
  • सूरह जुमा कुरान मजीद की 62वीं सुरह है।
  • इस सुरह में कुल 11 आयतें हैं, जिसमें 2 रूकु भी होती है।
  • हर जुमे की नमाज अदा करने के बाद हमारे नबी सूरह जुमा की तिलावत किया करते थे; ऐसे में हम सब को भी इस सुरह की तिलावत करनी चाहिए जिससे हमें सवाब हासिल हो।

दोस्तों इतना आपके लिए काफी है सूरह जुमा के बारे में जाने के लिए चलिए अब हम बात कर लेते हैं; सूरह जुमा इन हिंदी कि आखिर सूरह जुमा को पढ़ें कैसे।

आपको पहले ही बता देते हैं कि किसी भी सूरह को हमेशा अरबी अल्फाज में ही पढ़नी चाहिए।

हम आपको हिंदी में इसलिए बता रहे हैं ताकि आपको अच्छे से पता चल सके; और इसलिए भी क्योंकि काफी लोगों को अरबी नहीं आती है।

Ye bhi padhe

Surah juma in hindi (surah juma hindi me)

(1) युसब्बिहू लील लाही माफिस सामावती वमा फील अरजील मालिकिल कुद्दुसील आजिजील हाकिम।

(2) हुवल लज़ी बअस फील उममीय यिना रसूलम मिन्हुम यतलूना अलैहिम आयातीही व युज़क किहिम; व युअल्लिमु हुमुल किताब वल हिकमह वइन कानू मिन क़ब्लु लफ़ी ज़लालिम मुबीन।

व आखरीन मिन्हुम लम्मा यल्हकू बिहिम वहुवल अज़ीज़ुल हकीम; ज़ालिका फज़लुल लाहि युअ’तीहि मय यशाअ वल लाहू ज़ुल फजलिल अज़ीम।

(3) मसलुल लज़ीना हुममिलुत तौराता सुम्म लम यहमिलूहा कमासलिल हिमारि यहमिलु अस्फारा बिअ,सा मसलुल कौमिल लज़ीना कज्ज़बू बिआयातिल लाह वललाहू ला यहदिल कौमज़ ज़ालिमीन।

(4) कुल या अय्युहल लज़ीना हादू इन ज़अमतुम अन्नकुम अव्लियाउ लिल मिन दूनिन नासि फ़ तमन्नवुल मौत इन कुन्तुम सादिक़ीन

वला यता मन नौनहू अबदम बिमा क़द्दमत ऐदीहिम वल लाहु अलीमुम बिज़ ज़ालिमीन।

कुल इन्नल मौतल लज़ी तफिररूना मिन्हु फ़इन्नहू मुलाक़ीकुम सुम्मा तुरददूना इला आलिमिल ग़ैबि वश शहादति फ़ युनबबिउकुम बिमा कुन्तुम त’अलमून

(5) या अय्युहल लज़ीना आमनू इज़ा नूदिया लिस सलाति मिय यौमिल जुमुअति फ़स औ इला ज़िकरिल लाहि वज़रुल बैअ ज़ालिकुम खैरुल लकुम इन कुन्तुम त’अलमून

फ़इज़ा कुज़ियतिस सलातु फन तशिरू फ़िल अरज़ि वबतगू मिन फजलिल लाहि वज्कुरुल लाह कसीरल लअल्लकुम तुफ्लिहून।

(11) व इज़ा रऔ तिजारतन औ लहवनिन फज्जू इलैहा व तरूका क़ाइमा क़ुल मा इन्दल लाहि खैरुम मिनल लहवि वमिनत तिजारह वल लाहू खैरुर राज़िकीन।

Surah juma in hindi translation

  • (1) जितनी भी चीजें चाहे वह आसमान में हो या जमीन में वह सब अल्लाह की तस्बीह करती है; जो हकीकी तौर पर बादशाह है, रहमत वाला है, पाक है और हिकमत वाला है।
  • (2) वह अल्लाह ही तो है जिसने अनपढ़ों में से पैगंबर भेजें जो उनके सामने उसकी आयतें पढते; और उनको पाक करते हिकमत के किताब की तालीम देते। उससे पहले तो यह लोग खुले तौर पर गुमराह थे।

और उनमें से भी और लोगों को इनकी तरफ भेजा है जो अभी इन मुसलमानों से मिले तक नहीं है; और वह गालिब है और हिकमत वाला है।

यह तो अल्लाह का फज़ल है जिसे चाहता है उसे अता फरमाता है, और अल्लाह बड़े फज़ल का मालिक है।

  • (3) जिन लोगों को अल्लाह ने तौरात काबिल बनाया फिर उन्होंने उसके हासिल होने का हक़ तक अदा नहीं किया।

ऐसे लोगों की मिसाल तो गधों जैसी है, जिन पर मानव बड़ी-बड़ी किताबे ला दी गई हों।

और वह लोग जो अल्लाह की आयतों की तकज़ीब करते हैं तो उन लोगों की मिसाल बुरी है; और अल्लाह जालिम लोगों को हिदायत नहीं देता।

  • (4) कह दो कि अए यहूदी अगर तुमको यह दावा हो कि तुम ही अल्लाह के दोस्त हो और दूसरा कोई नहीं; तो अगर तुम सच्चे हो तो तुम जरा मौत की आरजू तो करो।

और यह लोग उन आमाल के सबब जो ये कर चुके हैं हरगिज उसकी यह आरजू नहीं करेंगे; और अल्लाह जालिमों से खुब वाकिफ़ है।

कह दो की मौत जिससे तुम लोग भागते फिरते हो वह तो तुम लोगों के सामने एक ना एक दिन आकर ही रहेगी।

फिर तुम पोशीदा और जाहिर के जानने वाले मालिक की तरफ लौटाए जाओगे; फिर जो कुछ भी तुम करते रहे हो वह सब तुम्हें बताएगा।

  • (5) अए मोमिनो जब जुमे के दिन नमाज के लिए आज़ान दी जाए तो तुम अल्लाह के जिक्र की तरफ लपको; और खरीद-फरोख्त यानी (खरीदारी) तर्क कर दो (बंद कर दो). अगर यह बात समझ जाओ तो यह तुम्हारे हक में बेहतर है।

फिर जब नमाज हो जाए तो तुम जमीन पर फैल जाओ और अल्लाह का फजल तलाश करो; और अपने अल्लाह को बहुत याद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ।

  • (6) और जब उन लोगों ने सौदा होते या तमाशा होते देखा तो उधर भाग लिए; और ए नबी सल्लल्लाहो अलैही व आलीही वसल्लम तुम्हें खुदबे में खड़ा छोड़ गए।

कह दो कि जो चीज अल्लाह के यहां हैं वह तमाशे और सौदे से कहीं ज्यादा बेहतर है; और अल्लाह सबसे बेहतर रिज़्क देने वाला है।

जरूरी बात (Surah juma in hindi translation)

दोस्तों हमने आपको हिंदी में सूरह जुमा बता दिया है लेकिन दोस्तों हम आपको हमेशा से कहते आ रहे हैं; कि हमें सूरह को अरबी अल्फाज नहीं पढ़नी चाहिए।

इसकी बहुत बड़ी वजह यह है कि हमारी कुरान अरबी अल्फाज में ही नाजिल हुई; ना कि हिंदी इंग्लिश और मजीद अल्फाजों में।

तो आइए हम एक बार surah juma in arabic में भी पढ़ लेते हैं।

Ye bhi padhe

सुरह जुमा अरबी में (Surah juma in arabic)


يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَ‌ٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ٱلْمَلِكِ ٱلْقُدُّوسِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ

هُوَ ٱلَّذِى بَعَثَ فِى ٱلْأُمِّيِّۦنَ رَسُولًۭا مِّنْهُمْ يَتْلُوا۟ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتِهِۦ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا۟ مِن قَبْلُ لَفِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍۢ

وَءَاخَرِينَ مِنْهُمْ لَمَّا يَلْحَقُوا۟ بِهِمْ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ


ذَ‌ٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ

مَثَلُ ٱلَّذِينَ حُمِّلُوا۟ ٱلتَّوْرَىٰةَ ثُمَّ لَمْ يَحْمِلُوهَا كَمَثَلِ ٱلْحِمَارِ يَحْمِلُ أَسْفَارًۢا ۚ بِئْسَ مَثَلُ ٱلْقَوْمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ


قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ هَادُوٓا۟ إِن زَعَمْتُمْ أَنَّكُمْ أَوْلِيَآءُ لِلَّهِ مِن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُا۟ ٱلْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ


وَلَا يَتَمَنَّوْنَهُۥٓ أَبَدًۢا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلظَّـٰلِمِينَ


قُلْ إِنَّ ٱلْمَوْتَ ٱلَّذِى تَفِرُّونَ مِنْهُ فَإِنَّهُۥ مُلَـٰقِيكُمْ ۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَـٰلِمِ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نُودِىَ لِلصَّلَوٰةِ مِن يَوْمِ ٱلْجُمُعَةِ فَٱسْعَوْا۟ إِلَىٰ ذِكْرِ ٱللَّهِ وَذَرُوا۟ ٱلْبَيْعَ ۚ ذَ‌ٰلِكُمْ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ

فَإِذَا قُضِيَتِ ٱلصَّلَوٰةُ فَٱنتَشِرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ وَٱبْتَغُوا۟ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ وَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ كَثِيرًۭا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ

وَإِذَا رَأَوْا۟ تِجَـٰرَةً أَوْ لَهْوًا ٱنفَضُّوٓا۟ إِلَيْهَا وَتَرَكُوكَ قَآئِمًۭا ۚ قُلْ مَا عِندَ ٱللَّهِ خَيْرٌۭ مِّنَ ٱللَّهْوِ وَمِنَ ٱلتِّجَـٰرَةِ ۚ وَٱللَّهُ خَيْرُ ٱلرَّ‌ٰزِقِينَ

Surah juma in hindi

तो यह हो गई हमारी सूरह जुमा अरबी अल्फ़ाज़ में आप जब भी तिलावत किया कीजिए; तो आप अरबी में ही तिलावत किया कीजिए।

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मार्केट में हिंदी में भी लिखी हुई किताबें आ गई हैं; जिससे हो रहा यह है कि लोग उसको खरीद करके सुरतों को जल्दी पढ़ लेते हैं।

लेकिन हम सब जानते हैं कि कुरान की तिलावत आराम से खुशु व कुजु के साथ की जाती है; ना कि जल्दी जल्दी।

और हमारी कुरान अरबी अल्फ़ाज़ में ही नाजिल हुई तो हमें अरबी में ही पढ़ने का हुक्म है।

हां आप हिंदी में पढ़ सकते हैं, समझने के लिए या जानने के लिए लेकिन पढ़ना आपको अरबी में ही है; इसी का ज्यादा सवाब मिलता है।

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Conclusion (नतीजा)

तो यह थी हमारी आज की पोस्ट इसमें हमने आपको सूरह जुमा से जुड़ी; सभी जानकारी आसान लफ्जो में बयान करने की कोशिश की है. उम्मीद है आप लोगों को हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी।

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अल्लाह हाफिज !!!

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