सूरह माऊन

Surah al maun in hindi यानी araital lazi surah मदीना में नाज़ील हुई; araital lazi surah में मुनाफीकों की मुनाफीकींन और काफ़िरों काफीरीयत के बारे में बताया है, जिसे हम मुसलमानों को पता होना चाहिए.

दोस्तों सूरह माऊन (surah al maun in hindi) शुरू करने से पहले हम आपको araital lazi surah के बारे में कुछ छोटी मगर जरूरी बातें बता देना चाहते हैं.

हम आपको सूरह माऊन से जुड़ी कुछ Facts बता देते हैं, जो हर एक मुसलमान सख्स को पता होनी चाहिए.

Araital lazi surah (सूरह माऊन) कुरान पाक का 107वां सूरह है.
Araital lazi (Surah maun) में कुल 7 आयतें हैं.
Surah maun का मतलब दयालुता के कृत्यों है.
Surah al maun in hindi

इतना हमारे लिए काफी है (सूरह माऊन) को जानने के लिए, तो चलिए शुरू करते हैं।  

Surah al maun in arabic (अरबी में)

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ

فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ

فَوَيْلٌ لِّلْمُصَلِّينَ

ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ

ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ

وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ

तो ये थी हमारी सूरह माऊन अरबी में.

Note – कुरान की सभी सूरतें और वजीफे हमें हमेशा अरबी अल्फाज़ में ही पढने चाहिए; इससे एक तो सवाब मिलता है, और दूसरा कुरान मजीद अरबी अल्फाज़ में ही नाज़ील हुई थी.

Surah al maun in hindi (अल माऊन हिन्दी में)

Surah al maun in hindi में भी आप पढ़ सकते हैं, क्यूंकि ऐसे भी बहुत से लोग हैं; जिन्हें अरबी पढ़ना नहीं आता या वह हिंदी ज़बान में पढ़ना चाहते हैं, लेकिन हमें अरबी में ही पढ़ना चाहिए.

अरा अईतल लजी यु कज्जीबू बिद्दिन

फजालीकल लजी यदु उल-यतीम

वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन

फा वाई लुल-लिल मु सल्लीन

अल लजीना हुम अन सलातीहीम सहून

अल लजीना हुम युरा-उन

व यम ना ऊल मा-उन

और ये थी हमारी Surah al maun हिन्दी में, तो चलिए अब हम Surah al maun in hindi translation; भी देख लेते हैं, लोग इसे araital lazi surah लिख कर भी search करते हैं। 

Surah al maun in hindi translation

1. अराएतल लजी यु कज्जीबू बिद्दिन

के नबी ए अकराम सल्लल्लाहो अलैही व आलीही वसल्लम क्या आपने देखा; उस शख्स को जो रोज़े क़यामत और दिन ए इस्लाम को झुठलाता है, यानी (क़यामत के दिन को नहीं मानता).

2. फजालीकल लजी यदु उल-यतीम

वही जो यतीमों को धक्के देता है, और जब की इस्लाम कहता है; कि यतीमों खाना खिलाओ और उनके सर पर प्यार से हाथ फेरों।

3. वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन

और गरीब और मीसकीनों को खाना नहीं खिलाता।

4. फा वाई लुल-लिल मु सल्लीन

लानत हो हलाक़त हो उन नमाज़ियों के लिए,

5. अल लजीना हुम अन सलातीहीम सहून

जो अपनी नमाज़ों को भुला चुके हैं और नमाज़ों में गफलत करते हैं.

6. अल लजीना हुम युरा-उन

जो मुनाफीक हैं जो नमाज़ पढ़ते हैं, तो भी दिखावे के लिए.

7. व यम ना ऊल मा-उन

और कोई भी छोटी मोटी चीज बरतने को नहीं देते जैसे चीनी, डेग हो गई, पलास, हथोड़ी नहीं देते.

Surah al maun english transliteration

Araital lazi yu kazzibu biddeen

fazalikal lazi yadu ull yateem

vala yauzzu ala ta’ AA mil misskeen

favaylull lill mussallin

Allazeena hum aan salatihim sahoon

Allazeena hum yuraaa ooon

Wayam naa oonal maaa’ oon

Surah al maun english translation

1. Araital lazi yu kazzibu biddeen

Nabi-e-Akram, sallallaho ‘alaihi wa alaihi wa sallam, have you seen; the person who denies the day of Qayamat and Din-e-Islam, i.e. (does not believe in the Day of Judgment).

2. fazalikal lazi yadu ull yateem

The one who pushes the orphans, and when Islam says that feed the orphans; and put their hands on their heads with love.

3. vala yauzzu ala ta’ AA mil misskeen

And does not feed the poor and beggar.

4. favaylull lill mussallin

Shame on those worshipers,

5. Allazeena hum aan salatihim sahoon

Those who have forgotten their prayers and fail in their prayers.

6. Allazeena hum yuraaa ooon

Those who are munafik, those who offer prayers, even then for show.

7. Wayam naa oonal maaa’ oon

And they do not allow any small thing to be used like sugar, dag ho gayi, palas, hammer.

Surah al maun की ये वो खसलत है जिसमें अल्लाह सुबहान व तआला ने बताया है कि इन सुरतों में जो पॉइंट्स हैँ; वो उन इंसानों के हैं, जो आखरत को झुठलाते हैं, यानी क़यामत के रोज को नहीं मानते.

Surah al maun ki tafseer (सुरह अल माऊन की तफसीर)

Surah maun में इंसानों के कुछ गलत कामों या यूं कहें जिसे इस्लाम में ग़लत माना गया है; और कुछ मुनाफीक ऐसा करते हैं, उसे ही Surah maun में बताया गया है।

1. क़यामत को न मानना – यहां उन काफ़िरों और मुनाफीकों की बात हो रही है, जो क़यामत के दिन को नहीं मानते; और न ही क़यामत के दिन होने वाले हिसाब किताब को मानतेे.

और तो और दुनियावी कामों में और अपने आप को बादशाह समझ कर जिंदगी जीते हैं, और इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता.

2. यतीमों से बुरा बर्ताव करना – आज ही नहीं बल्कि बहुत पहले ज़माने से ऐसा है; कि लोग यतीमों के साथ बुरा बर्ताव करते थे और उनको उनके हक्क से मरहूम कर देते थे और उनकी कोई इज्जत नहीं करते थे.

यतीमों को खिलाना पिलाना तो दूर उल्टा उन्हीं का हक़ मारते थे.

3. गरीबों को खाना न खिलाना – यानी जो गरीब हैं उन्हें खाना न खिलाना; जब कि अल्लाह ने आपको हर चीज से नवाजा फिर भी आप गरीबों को खाना नहीं खिलाते.

और तो और किसी और को गरीबों की मदद करने की नसीहत या तरकीब नहीं देते।

आज के ज़माने में लोग गरीबों को अछूत समझते हैं और उन्हें नीचा दिखाते हैं, जिससे उन्हें तकलीफ होती है; और इससे अल्लाह नाराज़ होता है।

4. नमाज़ों में गफलत करना। – ऐसे भी बहुत से लोग इस दुनिया में पाए जाते हैं, जिनको नमाज़ से मतलब नहीं; जबकि वो मुस्लमान हैं.

और पढ़ भी ली चाहे डर से या मां बाप की जबरदस्ती की वजह से लेकिन कभी पढ़ी, कभी नहीं पढ़ी; मतलब बस formality के लिए पढ़ लिया, लेकिन वो नमाज़ जो उन्होंने पढ़ी वह क़बूल नहीं होंगी।

5. दिखावा करना – दिखावा कैसा भी हो सकता है लेकिन यहां दिखावे से मुराद है कि; लोग अगर कभी दीन और सवाब का काम करते हैं जैसे नमाज़ अदा की, या हज किया, या ज़कात दी तो उनके दिल में वो इबादत के लिए नहीं ब्लकि दीखावे के लिए किया.

इन सब के कामों के पीछे उनका मकसद इबादत या दीन के खातिर नहीं बल्कि; अपने पैसों की नुमाइश करने के लिए किया बस इबादत और दीन की आड़ लेकर.

Surah al maun ki fazilat

  • इसकी सबसे बड़ी फज़ीलत ये है कि जो शख्स surah al maun को पढ़ेगा; उसकी नमाज़ में उसको बुरे ख़यालात नहीं आएंगे और उसको नमाज़ पढ़ने की तौफीक होगी.
  • इस सुरह को पढ़ने से आपकी नमाज़ में ख़ुसु और क़ुज़ु पैदा होगी।

तो ये थी हमारी आज की पोस्ट araital lazi surah in hindi उम्मीद करते हैं, आपको हमारी पोस्ट पसंद आयी होगी.

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अल्लाह हाफिज !!!!!

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