Shawwal ka roza 2022 – Shawwal ke 6 roze – Shawwal ka roza kab rakhe

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Shawwal ka roza 2022 में मई के महीने में पड रहा है, और इस महीने Shawwal ke 6 roze रखे जाते हैं; shawwal ke roze ki fazilat हदीसों में खूभब बताई गई है.

शव्वाल के रोज़े शव्वाल के महीने में आते हैं, और शव्वाल का महीना इस्लामिक कैलेंडर में आखरी महीना होता है; यह महीना बेहद ही बा-बरकत होता है, और इसी महीने की पहली तारीख को ईद मनाया जाता है.

जिन लोगों के रमजान मुबारक के कुछ रोजे छूट गए होते हैं, वह शव्वाल के महीने में ही रोजे रखते हैं; क्योंकि इस महीने की बरकत काफी ज्यादा है, जिसे हमारे नबी ने भी बयान किया है.

लेकिन कजा रोज़ो के अलावा इस महीने में Shawwal ke 6 roze रखे जाते हैं, ये रोज़े नफील होते हैं; अगर इन्हें ना रखा जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन रख लिया जाए तो बेशुमार सवाब हासिल होता है.

शव्वाल के रोजों की मालूमात काफी लोगों को नहीं होती इसलिए हम आज कि इस पोस्ट में आपको shawwal ke 6 roze से जुड़ी तमाम मालूमात आसाम लफ्जों में देने की कोशिश करेंगे.

Shawwal ke 6 roze ki hadees

शव्वाल का रोजा रखने का हुक्म हमें हमारे नबी ने दिया हालांकि यह रोजा नफिल है, लेकिन इसकी फजीलतें काफी ज्यादा है; हमारे नबी ने शव्वाल के रोजे की फजीलत बयान करते हुए फरमाया कि –

जो शख्स रमजान उल मुबारक के पूरे रोजे रखे उसके बाद शव्वाल के महीने में 6 रोजे रखे तो इसका मतलब यह होगा कि उसने पूरे साल रोजे रखे और इबादत में गुजारे.

दोस्तों इस एक हदीस से आपको शव्वाल के रोजे की फजीलत और अहमियत दोनों ही समझ में आ गई होगी; आइए हम अब आपको शव्वाल के रोजों से जुड़ी तमाम जरूरी मालूमात बता दें जिससे कि आप इस महीने के रोजों को रखकर सवाब हासिल कर सकें.

Shawwal ke 6 roze

Shawwal ke 6 roze रमजान के रोजे रखने के बाद रखे जाते हैं, शव्वाल के पूरे महीने में आपको 6 रोजा रखना होता है; और शव्वाल के रोजे रखना सुन्नत है, क्योंकि इन रोज़ो को हमारे नबी ने रखा.

आपको बता दें शव्वाल के रोजे रखना फर्ज नहीं है, अगर आप इन रोज़ों को नहीं रखेंगे तो शरीयत आपको इस बात की पकड़ नहीं करेगा कि आपने ये रोजे नहीं रखे लेकिन अगर रख लेंगे तो इससे आपको काफी ज्यादा सवाब मिलेगा.

जुमे से जुड़ी जरूरी जानकारी जरूर जानें। –

Shawwal ka roze kab rakha jata hai

आप shawwal ke 6 roze शव्वाल के महीने में कभी भी रख सकते हैं, बस शव्वाल के पहली तारीख को आप इस रोजा को ना रखें क्योंकि पहली तारीख को ईद मनाई जाती है; और ईद के दिन रोजा रखना हराम है, बाकी बचे हुए 29 दिनों में आप शव्वाल के रोज़ों को रख सकते हैं.

बता दें शव्वाल के रोजे लगातार रखना जरूरी नहीं आप पूरे महीने में कभी भी किसी भी तरह से रोजे रख सकते हैं; मिसाल के तौर पर आप 1 दिन बीच करके रोजे रख सकते हैं, या चाहे तो लगातार भी रख सकते हैं, यह आपके ऊपर है, लेकिन 1 महीने के अंदर-अंदर ही रोजे रखने होंगे.

आइए अब हम Shawwal ke 6 roze ki niyat, Shawwal ke 6 roze ki dua देख लें; जिससे आपको इस रोजे को रखने में कोई परेशानी ना हो.

पांच वक्त की नमाज पढने का सही तरीका। –

Shawwal ke 6 roze ki niyat

हमने आपको अपनी रोज़ों से जुड़ी हर पोस्ट में बताया है, कि नीयत करना अपने दिल के इरादे को कहते हैं; यानी अगर आपके जहन में जो रोजा रखना चाहते हैं, उसका इरादा है, तो आपकी नियत हो जाएगी.

आप रात को सोने से पहले यह नियत कर लें कि मुझे कल का shawwal ka roza रखना है; और फिर सो जाएं अब शहरी में उठे, सेहरी करें या सेहरी में ना भी उठ सके तो भी आप चाहे तो रोजा रख सकते हैं, आपकी नियत मानी जाएगी.

Shawwal ke 6 roze ki dua

शव्वाल के रोजे की दुआ को नियत ही कहा जाता है, बस जो नियत हम करना चाहते हैं, उसे हम अरबी बोल लेते हैं; जो दुआ हम रमजान के महीने में सेहरी और इफ्तार के वक्त पढ़ा करते थे वही दुआ शव्वाल के रोजे में भी सेहरी और इफ्तार के वक्त पढनी होती है.

नियत/दुआ अरबी में। - وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتَ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ
नियत/दुआ हिंदी में। - व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान।

Shawwal ke roze ki fazilat

Shawwal ke roze ki fazilat की बात करें तो शव्वाल के महीने के रोजे की सबसे बड़ी फजीलत यह है; कि जो शख्स इस महीने रोजा रखता है, तो उसके सारे गुनाह माफ हो जाते हैं, और जिसने इस महीने के 6 रोज मुकम्मल किए गोया उसने पूरे साल रोजा रखा.

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Shawwal ke 6 roze kaise rakhe

जिस तरह आप रमजान के रोजे रखते हैं, ठीक उसी तरह आपको शव्वाल के रोजे रखने हैं, शव्वाल के रोजे बस नफिल रोजे होते हैं; यानी अगर आपने नहीं रखेंगे तो आपको बुरा नहीं मिलेगा लेकिन अगर रख लेंगे तो यह मुस्तहब है.

क्योंकि सवाल का महीना रमजान के तुरंत बाद आता है, तो ऐसे में आपकी यह हैबिट बन जाती है, कि आप रोजा रख सकते हैं; ऐसे में आप शव्वाल के महीने में 6 रोजे आसानी से रख सकते हैं, क्योंकि आपने श्रमदान के 30 रोजे रखे हैं, और उसमें अल्लाह की इबादत की है.

ईद के दिन क्या रोजा रख सकते हैं? ईद के दिन रोजा रखना कैसा है?

आज आपने क्या जाना?

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की को पोस्ट जिसमें हमने आपको shawwal ke 6 roze से जुड़ी तमाम जानकारी आसान लफ्जों में और तफ्सील से देने की कोशिश की है.

उम्मीद है ! आपको आप के तमाम सवालों के जवाब मिल गए होंगे; अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे शेयर करना ना भूलें.

दोस्तों आप इस मुबारक महीने में रोजा से जरूर रखें क्यूंकि इन रोज़ों की फजीलत काफी ज्यादा है; और आपने अभी ही रमजान के रोजे रखें हैं, तो ऐसे में आपको shawwal ke 6 roze रखने में आसानी होगी और खूब सवाब हासिल होगा.

बाकी आपको यह पोस्ट कैसी लगी और आप हमें क्या सलाह देना चाहते हैं, कमेंट में जरूर बताएं? अल्लाह हाफिज !!!

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