Roze ki makroohat kya hai? – Roze ki makroohat in hindi – रोज़े की मकरूहात

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Roze ki makroohat kya hai? ये आप भी जानना चाहते होंगे क्यूंकि आखिर हम इंसान हैं हमसे गलती हो ही जाती है; लेकिन अगर हमने उस गलती का हर्जाना पता हो तो हम वो गलती नहीं करते हैं बिल्कुल एक अच्छे बच्चे की तरह. इसलिए आज हम आपके सामने लाये हैं Roze ki makroohat, जिससे आपको पता चले कि roze todne wale kaam या मकरूह करने वाली क्या-क्या हैं या क्या करने से सवाब मे कमी होती है. 

आइए उससे पहले ये जान लें कि आखिर roze ki makroohat kise kehte hain? 

Roze ki makroohat kya hoti hai?

मकरूहात का मतलब होता है खराब लेकिन हराम नहीं, यानी कि रोज़े की हालत मे करने वाले ऐसे काम जिससे आपका रोज़ा खराब (पूरा सवाब नहीं मिलना) हो सकता है, या रोज़े के सवाब मे कमी हो जाए उसे roze ki makroohat कहते हैं. एक बाद याद रखें कि रोज़ा टूटने और मकरूह होने मे अन्तर है. 

रोज़ा मकरूह होने का मतलब हुआ कि वो काम जिसे करने से रोज़े के सवाब मे कमी होगी याकुछ काम ऐसे हैं जिससे रोज़ा ना के बराबर हो  उसका सवाब ना के बराबर हो जाएगा; और रोज़ा टूटता तब है जब आपसे कोई हराम काम (इनकी भी शर्तें हैं) हो जाता है या कुछ खा-पी लेते हैं और कई अन्य चीजें भी हैं जिससे रोज़ा टूट जाता है; तो वहीं कुछ काम ऐसे भी हैं जिन्हें करने से रोज़ा टूटता भी है और अज़ाब अलग से मिलता है. लेकिन आजकी इस पोस्ट मे सिर्फ मकरूहात के बारे मे ही जानेंगे.  जिसका गुनाह भी मिलता है. 

रोज़े की मकरूहात के अलग-अलग कारण हो कसते हैं, चाहे वो कुछ बोलने से हो, कुछ देखने से हो, कुछ करने से हो, कुछ निकालने/निकल जाने से हो (मनी या खून) या कुछ पीने, या कुछ खाने से हो (चखना-स्वाद लेना); इन सभी चीज़ों से आपका रोज़ा टूट सकता है, या सवाब मे कमी हो सकती है, या इनसे गुनाह भी मिल सकता है, (अलग-अलग चीजों से अलग-अलग मकरूहात, गुनाह या मनाही है) ऐसे confusion कुछ लोग पाले हुए हैं, आइए आपके सभी सवालों का जवाब एक-एक करके देते हैं. 

तो आज हम इसी टॉपिक पर बात करेंगे ताकि आपको roze ki makroohat काफी अच्छे से समझ मे आ जाए; आपसे गुजारिश है कि आप हमारे साथ आखिर तक बने रहे, क्यूंकि इसमे हमने लोगों के common सवालों के जवाब दिए हैं.

हम आपको ये भी बताएँगे की आखिर roze me kya makrooh nahi hai, roze ki makroohat ki hadees, और भी कई सारी चीज़ें बताएंगे. आइए शुरू करते हैं Roze ki makroohat से…. 

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Roze ki makroohat kya kya hai?

तो जैसा कि मैंने आपको बताया कि वो चीज मकरूह होती है जिसे करने से रोज़ा टूटता तो नहीं लेकिन रोज़े के सवाब मे कमी हो जाती है या गुनाह कुछ कामों से गुनाह भी मिलता है. 

तो ऐसे ही कुछ काम हैं जिसे करने से इंसान को गुनाह मिल सकता है या रोज़ा मकरूह हो सकता है लिहाज़ा रोज़ा टूटता नहीं है; roze ki makroohat in hindi नीचे लिखी हुई है……

  • रोज़ा रखकर गंदी चीज के बारे मे जानबूझकर सोचना जैसे शहवत (sexual excitement) बढ़ाने वाली चीज़ें जैसे किसी sexual activity के बारे मे सोचना, गंदी वीडियो के बारे मे सोचना आदि जैसे कमा मकरूह हैं. अगर गलती से ज़हन मे आ जाए तो तौबा कर लें और दिमाग मे दोबारा ना आने दें. 
  • रोज़े की हालत मे किसी लड़की को sexual desires की निगाहों से देखने पर गुनाह भी मिलता है रोज़ा मकरूह भी हो जाता है. वैसे तो कभी भी नहीं देखना चाहिए लेकिन अगर गलती से नज़र चली गई तो उसके बारे मे आगे ना सोचें और दोबारा ना करें और तौबा करके आइन्दा दिमाग मे ना आने दें. 
  • बिना किसी वज़ह के खाने की चीज का रोजेदार का चखना रोज़े को मकरूह कर देता है लेकिन अगर किसी वज़ह से चखते हैं तो कोई बात नहीं, जैसे अगर किसी का मालिक या शौहर खड़ूस है और स्वादिष्ट खाना मांगता है हर चीज एकदम perfect तो ऐसे मे नमक, मिठास, सालन, मसाले चखने मे कोई हर्ज नहीं है. नोट:- सिर्फ जुबान पर रखकर मजा महसूस करें और फिर थूक दें पेट में ना जाने पाये, अगर पेट मे जाता है तो रोज़ा टूट जाएगा और अगर मसाले की वजह से सरक-कर (जिससे खांसी आने लगती है) हल्क मे चला जाए तो कोई बात नहीं. 
  • बिला वज़ह ना चखें, सिर्फ मजा लेने के लिए न चखें इससे आपका रोज़ा मकरूह हो जाएगा भले ही आपने सिर्फ जुबान पर रखकर थूक ही क्यूँ ना दिया हो; सिर्फ ज्यादा जरूरी वक्त ही इसे करें, लेकिन आराम से की पेट मे जाने की कोई गुंजाईश ना रहे, वरना रोज़ा टूट जाएगा. 
  • वैसे तो रोज़े की हालत मे मेहंदी लगाना जायज है, औरत के हाथों-पैरों और मर्दों के सिर-दाढ़ी (प्यारे नबी की सुन्नत भी है ये) पर लगाना जायज है. लेकिन किसी लकड़ी या किसी लड़के को impress करने के लिए की वो आपसे दोस्ती कर ले या शादी कर ले ये मकरूहात मे गिना सकता है क्युंकी जब दो गैर मर्द और औरत एक दूसरे को देखते हैं तो उनकी आखें जीनाह करती है और जीनाह तो वैसे भी हराम है. नोटः लेकिन शादी के वक्त लगाया जा सकता है क्यूंकि यहां हम किसी को impress नहीं कर रहे और ना ही किसी और को देख रहे हैं.
  • रोज़े की हालत मे मिया बीवी के बोसा (kiss) करने से रोज़ा मकरूह हो जाता है, और अगर वो जानते हैं कि ऐसा करने से वो हमबिस्तर हो जाएंगे तो रोज़ा मकरूह हो सकता है और अगर वो हमबिस्तर हो गए तो रोज़ा टूट जाएगा.
  • रोज़े की हालत मे गाने सुनना, movie देखना, नाचना, TV देखना मकरूह है, बिल्कुल उसी तरह porn देखना भी मकरूह है (लेकिन porn देखने का गुनाह भी मिलेगा, किसी की हमबिस्तरी देखना हराम है और गुनाह का काम है); और अगर ऐसे मे इंसान मुश्त जनी (masturbation) कर दे तो रोज़ा टूट जाएगा और गुनाह भी बहुत ज्यादा मिलेगा (porn देखने और masturbation करने का) 
  • रोज़े की हालत मे toothpaste या brush ईस्तेमाल ना करें, इससे रोज़ा मकरूह हो जाता है, ना ही गुल, मंजन आदि का इस्तेमाल करें. लेकिन दातुन कर सकते हैं, ये सुन्नत है. 
  • खून का दान करना रोज़े की हालत मे, रोज़े को मकरूह कर सकता है क्यूंकि हो सकता है कि आप इसके बाद कमजोरी महसूस करेंगे; और कुछ खा-पी लेंगे जबकि आपको इसका इल्म है की खून देने से कमजोरी के चलते रोज़ा टूट सकता है लेकिन अगर किसी की जान बचाने के लिए करे तो ठीक है. 
  • थूक को मुह मे जमा करके निगलने से रोज़ा मकरूह हो जाता है, हालांकि रोज़ा टूटता नहीं. ऐसे मे रोज़ा रखने का ज्यादा फायदा नहीं होता, सवाब बहुत घट जाते हैं. 
  • रोज़े की हालत मे कोई ऐसा काम करना जिससे कमजोरी आ सकती है कि रोज़ा तोड़ने की नौबत आ जाय, ये जानते हुए भी वो काम करना रोज़े को मकरूह कर देता है; लेकिन अगर इतनी कमज़ोरी ना हो कि रोज़ा तोड़ने की नौबत आ जाए तो रोज़ा मकरूह नहीं होगा. 
  • रोज़े की हालत मे गुनाह वाले काम करने से भी रोज़ा मकरूह हो जाता है. 
  • तमाम दिन नापाक रहने से भी रोज़ा मकरूह हो जाता है. 
  • रोज़े की हालत मे गाली देने से रोज़ा मकरूह हो जाता है; या गिबत, चुगली, बुराई, लड़ाई करने से रोज़ा मकरूह हो जाता है क्यूंकि ये पहले से ही हराम है, जिस तरह शराब हराम है, लेकिन शराब पीने से रोज़ा टूट जाता है और लाखों गुना ज्यादा गुनाह भी मिलता है.
  • गिला कपड़ा पहने रहने से रोज़ा मकरूह हो जाता है, अगर गिले हो जाए तो तुरंत उतार दें. 
  • लोगों को खुश करने के लिए कभी रोज़ा ना रखें, क्यूंकि रोज़ा सिर्फ अल्लाह को खुश और राजी करने के लिए रखा जाता है, लोगों की नजर मे अच्छा बनने के लिए या किसी को दिखाने के लिए रोज़ा रखना मकरूह है. 
  • कभी भी रोज़े की हालत मे मिस्कीनों या गरीबों पर हाथ ना उठायें या उनकी मदद करने से मना ना करें. जितना आपसे हो सके अच्छा काम करें सभी को खुश रखें. 
  • रोज़ा रखकर सब काम करना जिससे मजा आता है, खुशी मिलती है, या पैसा आता है लेकिन नमाज और कुरान पढ़ने के लिए समय नहीं मिलता तो उसके लिए रोज़ा किसी काम का नहीं और रोज़ा मकरूह हो जाता है. आपको रमज़ान मे इबादत करने का हुक्म है.
  • रोज़े की हालत मे किसी का हक मरना भी गुनाह है और इससे रोज़ा रखने का कोई फायदा नहीं होगा, उल्टा गुनाह बहुत मिलेगा.
  • जकात देने से कभी ना भागें, भले ही आपने 30 रोज़े पूरे रखे लेकिन जकात नहीं दिया ये जानते हुए कि आप पर जकात फर्ज है, ऐसे मे आपको रोज़े का बहुत-ही-बहुत-ही कम सवाब मिलेगा.

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तो दोस्तों ये थे कुछ ऐसे काम जिससे हमे roze ki makroohat kya hai ये जानने को मिलता है और हम इन गुनाहों से और सवाब कम करने वाली चीजों से बच सकते हैं. 

उम्मीद करता हूं कि आपको हमारी आज की इस्लामिक जानकारी से भरी ये पोस्ट जिसमें हमने “roze ki makroohat” जानी पसंद आई होगी और कुछ नया सीखने को मिला होगा; अगर हाँ, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर SHARE करें ताकि उन्हें भी रोज़ा रखने का पूरा सवाब मिले. 

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