Ramzan me quran kaise baqshe – Ramzan me quran baqshne ka tarika

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Ramzan me quran kaise baqshe यह हर मुसलमान जानना चाहता है जिसने रमजान में अल्लाह के वास्ते और मधु की तिलावत की हो.

रमजान के मुबारक महीने में ही लोहे महफ़ूज़ में कुरान मजीद नाजिल हुई और रमजान का ही वह मुबारक महीना है; और शब ए कदर कदर की मुबारक रात है, जिस रात हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम पर कुरान की पहली आयत नाजिल हुई थी.

ऐसे में रमजान में कुरान मजीद की तिलावत करना रमज़ान में कई गई इबादतों में शामिल है; सच्चे मुसलमान रमज़ान के महीने में कुरान मजीद की खुद तिलावत करते हैं.

अक्सर लोगों कि कम से कम एक कुरान तो रमजान के महीने में मुकम्मल हो ही जाती है, ऐसे में लोग कुरान बकशना चाहते हैं; लेकिन उन्हें Ramzan me quran kaise baqshe, Ramzan me quran baqshne ka tarika नहीं मालूम होता.

Ramzan me quran kaise baqshe

Ramzan me quran kaise baqshe तो बता दें कुरान बक्शना बेहद आसान है; जब भी आपका कुरान मुकम्मल हो जाए; तो आप फौरन दुआ के लिए हाथ उठाएं, अल्लाह की बारगाह मे हाथ उठाकर कुरान को बक्श दें.

काफी लोगों को Ramzan me quran kaise baqshe नहीं मालूम होता और उनके जेहन में काफी सारे सवाल होते हैं; कि क्या अगर कुरान मजीद को ना बक्शा जाए तो इसका सवाब नहीं मिलेगा quran baqshne ka sahi tarika क्या है? कुरान मजीद कब बक्शें आइए इन तमाम सवालों के एक-एक करके हम जवाब जान लेते हैं.

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Ramzan me quran baqshne ka tarika

Ramzan me quran baqshne ka tarika तीन है, आप इन 3 तरीकों से रमजान में कुरान मजीद बक्श सकते हैं; साथ ही साथ इसी तरीके से आप जब चाहे तब कुरान मजीद बक्श सकते हैं, कुरान मजीद बक्शने का मतलब यह होता है, कि आप कुरान मजीद पढने का सवाब किसी तक पहुंचाना चाहते हैं.

आप कुरान मजीद अपने वालिद, वालेदह मरहूम दादा-दादी, नाना-नानी और पैगंबरों पर कुरान मजीद बक्श सकते हैं; तरीका जो हम आपको बता रहे हैं, वह लगभग एक जैसा ही रहता है, बस समय का अंतर होता है.

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Ramzan me padha hua quran kaise baqshe

रमजान में पढा हुआ कुरान आप कुछ इस तरह बक्श सकते हैं, कि जब आप की एक कुरान मुकम्मल हो जाए; तो 30वां पारा के आखिरी में कुछ दुआएं होती हैं, आप उन दुआओं को पढ़ें इससे आपकी कुरान बक्शा जाएगी.

आप इस तरीके से फौरन कुरान मजीद को बक्श सकते हैं, और इस तरीका से अक्सर कुरान मजीद बक्शा जाता है; आइए हम दूसरे तरीके की ओर चलते हैं.

Ramzan me quran baqshne ka tarika niyat se

दोस्तों में हर चीज नियत निर्भर होती है, अल्लाह हमारे जहन से वाकिफ है, कि हम कब और क्या सोच रहे है; हम किस लिए क्या चीज कर रहे हैं, ये सब हमारे रब को पता होता है.

इसलिए जब आपकी कुरान मुकम्मल हो जाए तब आप अपने हाथों को अल्लाह की बारगाह में उठा कर के बक्श सकते हैं; जिसको चाहे उस वक्त सकते हैं, बक्शने का तरीका हमेशा एक ही जगह रहता है.

Quran baqshne ka tarika namaz ke baad

तीसरा तरीका दोस्तों कुछ ऐसा है, कि आप पांच वक्त की नमाजों में किसी भी फर्ज नमाज के बाद अल्लाह की बारगाह में हाथों को उठाकर आपने जितनी कुरान मुकम्मल की है, उन सबको बक्श सकते हैं.

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Ramzan me quran baqshne ka sahi tarika

  • सबसे पहले आप वजू करें बिना वजू के आप कुरान मजीद को नहीं पढ़ सकते और ना ही बक्श सकते हैं.
  • वजू के बाद आप या तो फर्ज नमाज के बाद या ऐसे ही कभी भी अपने हाथों को अल्लाह की बारगाह में उठा कर के कुछ इस तरह से कुरान को बक्शें.
  • हाथ उठा कर के आप सबसे से पहले सूरह फातिहा पढें और कहे या अल्लाह मैंने तेरी कलाम पढी इसे पढने में बेशक बेशुमार गलतीयां हुंईं हैं, तो अपने फजल ओ करम से इन गलतियों क माफ फरमा दे और मेरे इस कलाम को पढ़ने का सवाब जिनको आप पहुंचाना चाहते हैं, उनका नाम लेकर के कहे बक्श दें.
  • अब आखिर में आप दरूद शरीफ पढ़ कर अपनी दुआ को मुकम्मल कर लें.

कुरान पढने से पहले आप इस दुआ को जरुर पढें।

Kya quran na baqshne se sawab kam ho jata hai?

जी नहीं ऐसा नहीं है, अगर आप कुरान मजीद को नहीं बक्शेंगें तो भी आपको इसका जवाब उतना ही मिलेगा जितना आपको मिलना चाहिए था हम जो भी काम करते हैं; चाहे वह नेक हो या बुरे उन्हें फरिश्ते लिख देते हैं, और उसके हिसाब से हमें उसका अजर मिलता है.

ऐसे में अगर आप कुरान को नहीं बक्शेंगें तब भी आपको उसका सवाब मिल जाएगा आपको परेशान होने की जरूरत कुछ नहीं है; लेकिन कुरान मजीद पढ़ने के बाद की गई दुआ कबूल होती है, और कुरान मजीद को बक्शना अफज़ल माना जाता है, इसलिए आप कुरान मजीद को बक्शें.

आज आपने क्या जाना?

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट उम्मीद है, आपको Ramzan me quran kaise baqshe, Ramzan me quran baqshne ka tarika समझ मे आ गया होगा.

अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो और आपको कुछ जानने को मिला हो; तो आप ही से अपने व्हाट्सएप, फेसबुक पर शेयर करें ताकि और मुसलमानों तक यह जानकारी पहुंच सके.

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