Ramzan me kya karna chahiye aur kya nahi karna chahiye – रमजान के जरूरी आमाल

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Ramzan me kya karna chahiye aur kya nahi? ये सवाल आपके मन मे भी जरूर उठता होगा, क्यूंकि हम नहीं चाहते कि हम किसी भी सवाब से महरूम रह जायें; रमजान जैसे पाक और अल्लाह के रहम वाले महीने में, रमज़ान में किए जाने वाले बहुत से कामों से हम सभी वाकिफ हैं, जिसे करने से हमें ढेरों सवाब मिलता है. 

और वहीँ कुछ काम ऐसे हैं, जिनका सवाब तो बहुत मिलता है, लेकिन हम उसके बारे मे जानते नहीं है; तो वहीं कुछ काम ऐसे भी हैं, जिन्हें करने से हमे गुनाह भी मिलते हैं, और उन्हें हमें नहीं करना चाहिए क्यूंकि रमजान में अच्छे काम करने पर जितना ज्यादा सवाब है, उतना ही अज़ाब गलत काम करने का भी. 

इसलिए हमने आपके सामने ये article लाई है, ताकि आपसे कोई गलत काम ना हो जाए जिससे आपको गुनाह मिले; और हर वो काम हो जिससे आपको ज्यादा से ज्यादा सवाब मिले. तो इसके लिए आपको इस article में आखिर तक रहना होगा, मैं वादा करता हूं कि आपको कुछ नया सीखने को मिलेगा. 

तो चलिए शुरू करते हैं, ramzan me kya karna chahiye से जिसके बाद हम ये जानेंगे की ramzan me kya nahi karna chahiye.

Table of Contents

Ramzan me kya karna chahiye?

हम सभी जानते हैं, कि रमजान में कुछ ऐसे काम होते हैं, जिसे करना फर्ज है, और उसे ना करने से गुनाह भी मिलता है, इसलिए इन्हें फर्ज का दर्जा दिया गया है; ये काम नमाज़ और कुरान पढ़ना, जकात देना, और रोज़े रखना है. लेकिन इन सबके अलावा दूसरे काम भी हैं, जो फर्ज तो नहीं लेकिन करने से बहुत सवाब मिलता है.

और आप सभी तो जानते ही हैं, कि रमजान मे हर छोटे-से-छोटे अच्छे कामों का लाखों गुना सवाब है.

नोट:- जकात-अल-फितृ का इतना बड़ा ओहदा है, कि अगर ईद की नमाज़ से पहले ना अदा किया गया तो 1 महीने का रोजा रखना बर्बाद; और ईद की नमाज़ भी कबूल नहीं होगी, उल्टा गुनाह अलग मिलेगा क्यूंकि जकात देना फर्ज है, इसे छोड़ा नहीं जा सकता, बशर्ते आप पर जकात फर्ज हो. 

रमजान में किए जाने वाले कुछ जरूरी काम, रमजान मे ये सब जरूर करें….. 

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Ramzan me kya karna chahiye?

रमजान मे ये काम जरूर करें….. 

1. Ramzan me namaz na chode

जैसा कि मैंने आपको ऊपर बताया कि रमजान में फर्ज नमाज पढ़ने का सवाब 70 गुना ज्यादा मिलेगा और और नफिल नमाज़ पढ़ने का सवाब फर्ज जितना; तो ऐसे मेें हम extra सवाब क्यूँ ना लें, जब अल्लाह ने सिर्फ उम्मते-मोहम्मदिया को ही ये खुशी दी है, नमाज़ पढ़ने की. 

अगर आप मर्द हैं, तो मस्जिद जाकर नमाज पढ़ें, मस्जिद में नमाज अदा करने का सवाब घर मे नमाज पढ़ने के सवाब से ज्यादा होता है; अगर कोई तकलीफ हो या औरत हैं तो घर मे ही अदा करें.

Ramzan me kya karna chahiye का सबसे पहला और अहम काम यही है कि आप सभी नमाज़ें पढ़ें….. 

2. Ramzan me quran se kar le dosti

इतने अज़मत वाले महीने मे हम कुरान पढ़ना कैसे छोड़ सकते हैं, हमे रमजान मे रोज कुरान पढ़नी चाहिए जितना भी हो सके; अगर आप रमजान मे रोज कुरान पढेंगे तो रमजान खत्म होते-होते आपको कुरान पढ़ने की आदत लग जाएगी और आप कुरान के पाबंद हो जायेंगे, जिसका सवाब आपको मारते दम तक मिलेगा. 

3. Ramzan shuru hone se pehle hi poore roze ki niyat kar le

रमजान शुरू होने से पहले ही पूरे रोज़े की नीयत कर लें ताकि आपको पूरा रोज़ा रखने की ताकत मिले; वैसे अगर आप चाहे तो अगले दिन का रोज़ा रखने से एक रात पहले ही उसकी नीयत कर लें, या उस दिन की फज्र की अज़ान होने से पहले भी नियत कर सकते हैं. 

4. Eid ki namaz ko jane se pehle zakat-al-fitr ada kar de

रमजान मे किए जाने वाले बड़े कामों मे से एक है, जकात अदा करना, इसलिए ईद की नमाज को जाने से पहले जकात अदा कर दें; वरना आपकी ईद की नमाज कबूल नहीं होगी और ना ही रोज़ा. क्योंकि जकात इस्लाम की 5 मीनारों मे से एक है, और ये फर्ज भी है. 

जकात से जुड़ी कुछ जरूरी बातें हमने नीचे लिखे posts मे कि है….. 

अगर आप कोई भी काम गलती से करना भूल जायें या याद ना रहे जिसे हमने “Ramzan me kya karna chahiye” में बताया या बताने वाले हैं तो सिर्फ 2 चीजें याद रखें, पहला तिलावत और दूसरा जकात…. 

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5. Ramzan ke iftar me khajoor se roza khole

खजूर काफी अच्छी चीज है, जिसका फायदा खाने से भी है, और इस्लाम में भी खजूर को सुन्नतों में से एक में गिना जाता है; जब भी आप इफ्तार करने को बैठे अज़ान होते ही खजूर से रोजा खोलें, ये भी एक सुन्नत है, जिसे आपको रमजान के इफ्तार में रखनी चाहिए. 

और सेहरी मे भी इसका इस्तेमाल करें और इससे ही रोज़े की शुरुआत करें. 

6. Iftar par baith kar dua padhe jab tak azan na ho jaye

जब आप इफ्तार के लिए दसतरखान पर बैठे तब आपको दुआएँ मांगनी है, अज़ान होने तक, आपको बता दें कि दसतरखान पर दुआ मांगने का भी सवाब है; और जैसा कि हमलोग जानते हैं, कि रमजान में सवाब बढ़ जाता है, उसी तरह इफ्तार पर दुआ मांगने का भी सवाब बढ़ जाता है, और दुआ पूरी होने की उम्मीद भी बढ़ जाती है. 

आप जो चाहे जो दुआ मांग सकते हैं, या कोई आयत की तिलावत कर सकते हैं, तस्बीह पढ़ सकते हैं; 

रमजान मे आप जिस चीज के लिए दुआ करेंगे आपको वो मिलेगा, और वो भी अगर रोज़ा रखकर और इफ्तार के वक्त दस्तरखान पर बैठकर दुआ की जाए तो अल्लाह जरूर सुनेगा; अल्लाह अपने बंदों को बहुत प्यार करता है, बशर्ते आप उसके रास्ते पर चलें. 

अच्छी सेहत की दुआ, अच्छी अक्ल की दुआ, कामयाबी की दुआ, रिज़्क़ की दुआ, नमाज-कुरान पढ़ने की तौफीक की दुआ और दूसरी दुआएँ मांगे जो आपके दिल में आए. 

हमारी मानें तो आप रमजान में पढ़ने वाली दुआ को एक बार जरुर पढ़ें. 

7. Paise kharchne me kanjusi na kare

इस्लाम मे कंजूसी हराम है, और रमजान में तो इसे बिल्कुल नहीं करना चाहिए, जिस चीज़ की आपको जरूरत है, रमजान मे उसे आपको खरीदना चाहिए; और खाने में तो कतई कंजूसी ना करें, घर वाले जो बोले वो खरीद कर लायें. 

बच्चे जो बोले उन्हें ला कर दें, और घर को सजाये, नए कपड़े खरीदे, और जिसपर दिल आ गया वो ले लें. 

Note:- इस्लाम मे फालतु खर्च भी मना है, इसलिए जिसकी जरूरत हो उसपर ही खर्च करें. 

8. रमजान में नफ्ल नमाजों का तहाजुद की नमाज की तरह एहतेमाम करें 

इसका भी बहुत सवाब है, हर एक नमाज जो आप रमजान मे पढ़ रहे हैं, उसका आपको हजारों-लाखों गुना सवाब मिल रहा है; और यही सब नमाज आपके लिए ज़रिया-ए-मगफिरत बन सकती है. इसलिए रमजान मे कोई भी नमाज ना छोड़े. 

9. अल्लाह की इबादत मे ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं

रमजान साल में एक बार आता है, और साल के बाकी के 11 महीने हम अपने आप को देते हैं, तो हमें एक महीना अल्लाह की इबादत के लिए भी देना चाहिए; तो दोस्तों, रमजान मे आपको ज्यादा से ज्यादा समय इबादत मे गुज़ारना है. इसलिए रमजान शुरू होने से पहले ही रमजान की तैयारी कर लें. 

जरूरत का समान ले लें, कपड़े, राशन, और दूसरी चीज़ें ले लें, और रमजान मे अल्लाह की इबादत मे डूब जाएं; हमें हर रोज रोज़ा रखना है, और ऐसे में हमारे शारीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए रोज़ा खोलने से लेकर सेहरी तक 2-2.5 लीटर पानी पीएं और खाना भी अच्छे से खायें.

10. सेहरी मे खायें फल, दूध आदि खायें

सेहरी मे आपको तली, भुनी और मसालेदार खाने नहीं खाने हैं, इससे आपको ज्यादा प्यास लगेगी और पेट भी खराब हो सकता है; जिससे आपको अगले दिन रोज़ा रखने मे परेशानी होगी. 

इसलिए आपको सेहरी मे हल्के खाने खाने हैं, और फल, दुध, ओट, दही का इस्तेमाल करना है. 

नोट:- शहरी करना भी प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की बहुत ही प्यारी सुन्नत है और इसके सवाब भी बहुत ज्यादा है, अल्लाह शहरी करने वाले बन्दे को बहुत ही चाहता है. 

11. Iftar kare aur acha khana rakhein

इफ्तार करना सवाब का काम माना गया है, आपको सही से इफ्तार करना है, ना कि अज़ान हुई और कुछ भी, कहीं भी और कैसे भी खाना शुरू कर दिया; जी नहीं, आपको सही से दस्तरखान लगाना है, और अच्छे से अच्छा खाना परोसना है, और खाना है. इससे भी सवाब बहुत मिलता है. 

और जो रोज़ा नहीं रखे हैं, जैसे बच्चे या बुजुर्ग तो उन्हें भी इफ्तार मे बैठना है; पूरे परिवार, दोस्त मिलकर इफ्तार करें इससे प्यार बढ़ता है, और ज्यादा सवाब मिलता है, क्यूंकि परिवार की एकता मुस्लमान की ईमान का बड़ा बयान देती है. 

12. Rozedaro ko iftar karwaye, iska bhi hai sawab

रोजेदारों को इफ्तार करवाना चाहिए, अल्लाह ने इसपर भी बहुत सवाब रखा है. आप इफ्तार की दावत रख सकते हैं; या घर पर रोजेदारों को बुलाकर उन्हें इफ्तार करवा सकते हैं; या तो आप अपने मोहल्ले, कॉलोनी, सोसायटी मे इफ्तार बटवा भी सकते हैं. 

अगर हो सके तो गरीब मुस्लमान जो रोज़ा रखते हैं, लेकिन इफ्तार करने मे मुश्किलें आती है, आप उन्हें ज्यादा से ज्यादा इफ्तार करवाएं. 

13. Taraweeh ko na chhode

आपके यहां जितने भी दिन तरावीह चलती है, उतने दिन आपको मस्जिद जाकर पढ़नी है, इसका भी बहुत ही ज्यादा सवाब है; इमाम के साथ नमाज शुरू करें और खत्म भी, ये नहीं कि की रुक-रुक कर नमाज पढ़ रहे हैं, तरावीह की, अगर ऐसा करेंगे तो इसका अज़ाब भी है. 

और आखिरी दिन जो सिरनी (मिठाई) मिलती है, उसे भी जरूर लें क्यूंकि वो आपका तोफा है, तरावीह का. 

Ramzan me kya karna chahiye या Ramzan me kya na chode उसमे तरावीह भी आती है, और हर मर्द मुसलमान शख्स को तरावीह की नमाज़ अदा करनी ही चाहिए. 

14. Agar neend magrib ke baad khule

अगर कोई शख्‍स सहरी के वक्‍त रोजे की नियत करे और सो जाए, फिर नींद मगरिब के बाद खुले तो उसका रोजा माना जाएगा, ये रोजा बिल्कुल सही है; लेकिन फिर आपकी कई नमाज और तिलावत छूट गई जिससे आपका सवाब कम हो गया. 

इसलिए कोशिश करें कि जल्दी उठें, या फिर जोहर की नमाज से पहले उठें, ताकि आपको तिलावत का भी समय मिल जाए. 

15. Galti se kha-pee lene se roza nahi tutta

अगर कोई शख्स रोजे की हालत में जानबूझकर कुछ खा ले तो उसका रोजा टूटा जाता है, लेकिन अगर कोई गलती से कुछ खा-पी ले तो उसका रोजा नहीं टूटता है. 

लेकिन आपको यह कोशिश करनी है, कि आपको याद रहे कि रमजान चल रहा है, और मैं आज रोज़ा हूं; तो मुझे कुछ खाना-पीना नहीं है. 

Note:- अगर आप जानबूझकर दांत मे फँसे खाने को खा जाते हैं, तो आपका रोज़ा टूट जाएगा लेकिन अगर गलती से हो गया तो नहीं टूटेगा; ऐसा ना हो इसके लिए शहरी के बाद अच्छे से मुह धो लें, लेकिन फज़र अजान से पहले. 

16. Johar ke baad se bhi roza rakh sakte hai 

ये शर्त सिर्फ बीमार इंसान के लिए हैं, और इसका मतलब ये है, कि अगर कोई शख्स बीमार हो और उसकी तबीयत खराब हो लेकिन अगर जोहर तक तबीयत ठीक हो जाए तो वो नियत करके वहीं से रोज़ा शुरू कर सकता है. 

लेकिन फिर वही बात ये सिर्फ बीमार इंसान के लिए है. 

17. Agar ramzan ka roza choot jaye to fir kabhi iska kaza roza rakhna hoga

जिस तरह हम नमाज के छूट जाने पर उसका कजा पढ़ते हैं, तो बिल्कुल उसी तरह रोज़े के साथ भी है; कि अगर आपका रमजान का रोज़ा छूट जाए तो आपको किसी और महीने उसका कजा रखना होगा. 

Ramzan me kya karna chahiye इस सवाल का एक जवाब तो ये हम सब जानते हैं, कि रोजा रखना चाहिए; लेकिन अगर Ramzan का कोई रोजा किसी कारण से छूट जाए तो किसी दूसरे महीने मे Ramzan का कजा रोजा रखें. 

18. Ramzan ke aashre (parts) hote hai

रमजान के महीने को तीन अशरों में बांटा गया है. पहले 10 दिन को पहला अशरा कहते हैं, जो रहमत का होता है. दूसरा अशरा अगले 10 दिन को कहते हैं; जो मगफिरत का होता है, वहीं तीसरा अशरा आखिरी 10 दिन को कहते, है जो कि जहन्‍नम से आज़ादी का होता है.

19. Tambako, gutka, ciggrate se roza toot jata hai 

अगर आप रोज़ा रखे हैं, तो आपको तंबाकू, गुटका, सिगरेट को इस्तेमाल नहीं करना है, इससे आपका रोज़ा टूट जाएगा; और अगर जानबूझकर इन्हें ईस्तेमाल करते हैं, क्यूंकि आपसे काबु नहीं हुआ और आप रोज़े की हालत में होते, हैं तो आपका रोज़ा तो टूटेगा ही लेकिन साथ-साथ आपको गुनाह भी मिलेगा. 

रमजान में रोज़ा रखने से ciggrate, gutka, tambako का लत छोड़ना आसान हो जाता है. 

20. Muh se khoon nikalne se roza toot jata hai

अगर रोजे की हालत मे किसी भी तरह से आपके मुह से खून निकल जाए तो आपका रोज़ा टूट जाएगा; अगर आपके मसूड़ों से, दांत निकलवाने से या किसी भी काम से मुह से खून निकल जाए तो रोज़ा टूट जाएगा. 

21. Kya ulti hone se roza toot jata hai?

जी नहीं, अगर आपको रोज़े की हालत मे उल्टी खुद-ब-खुद हो जाए, तो इससे रोजा नहीं टूटेगा, लेकिन अगर आपने रोजा याद होने के बावजूद जानबूझकर उल्टी की तो आपका रोजा टूट जाएगा. 

अगर आपने जानबूझकर उल्टी की और सिर्फ बलगम निकला; तो रोजा नहीं टूटेगा लेकिन अगर पूरा खाना निकले तो रोज़ा टूट जायगा. 

Note:- अगर मक्खी, मच्छर, धूल, धुआं हलक में चला जाए और ऐसे में उल्टी करे फंसे हुए चीज को निकालने के लिए; और वो बिना खाने के निकलने उल्टी हो तो ऐसे में रोज़ा टूटेगा नहीं, अगर बलगम निकले तो रोज़ा नहीं टूटेगा. 

22. Agar kisi ne rozedar ko kuch jabrdasti khila diya to?

अगर किसी शख्स (दुश्मन, काफिर) ने आपके रोज़े को तोड़ने के लिए आपको जबरदस्ती कुछ खिला-पिला दिया तो इससे रोज़ा नहीं टूटेगा; अगर सिर्फ मुँह में ही डाला था तो थूक दें और अगर हलक मे डाल दिया और आपने निगल लिया तो भी आपका रोज़ा नहीं टूटेगा. 

या अगर किसी ने आपको आपके जान-माल के नुकसान की धमकी देकर आपको कुछ खिला दिया या खाने को मजबूर कर दिया; और आपने उस नुकसान से बचने के लिए खा लिया तो भी आपका रोज़ा नहीं टूटेगा. 

23. Ramzan ke har namaz ya quran padhne ke baad dua kare

रमजान के हर एक लम्हे में अल्लाह की माफ़ी, रहमत, बरकत सब है, और रमजान में अल्लाह अपने बंदों की हर दुआ को कबूल करता है; जो उनके लिए अच्छी होती है, आपके मन मे जो कुछ भी आए आप उसके लिए अल्लाह से दुआ कर सकते हैं. 

दुआ करने का भी सवाब मिलता है, और अगर वो दुआ मिलने के आप काबिल हैं; तो अल्लाह आपकी दुआ जरूर कबूल करेगा.

Ramzan me kya karna chahiye मे एक बात जरूर याद रखें कि आपका जब भी जी मचलाए, दुखी हों, मन ना लगे तो अल्लाह को याद करे और उससे दुआ मांगे; आप जो चाहे वो दुआ मांग सकते हैं. 

24. Ittekaf me baithe

जब आप अपने घर-बार को छोड़ कर मस्जिद मे इत्तेकाफ को जाते हैं, तब आप अल्लाह की इबादत के लिए उसी के घर मे जाते हैं; और जैसे ही रमजान खत्म हो जाता है, और चांद दिख जाता है, शव्वाल के पहले दिन यानी ईद की तो आप उस दिन यानी ईद को मनाने के लिए घर वापस चले जाते हैं. 

जितने दिन आपने मस्जिद में बिताए हैं, उसका बहुत ही ज्यादा सवाब मिलता है; अगर आप इत्तेकाफ में बैठे हैं, बैठते हैं, या बैठेंगे तो आप खुशनसीब हैं. 

25. Wo sare kaam kijiye jo islam me karne ko kaha gya hai (nek-aamal

ऐसे और भी बहुत सारे काम है, जिसे आपको रमजान में करना चाहिए और उनका जवाब भी काफी ज्यादा है; जैसे रोज जकात देना गरीब को जो आपके दरवाजे पे आए, गरीबों को खाना खिलाना, नंगे को कपड़ा देना, मस्जिद की तामीर के लिए पैसे देना आदि जैसे दूसरे काम भी हैं, जो कि छोटे और आसान भी है. 

और इन्हें करने का भी बहुत ज्यादा सवाब है, क्यूंकि जैसा मैंने बोला रमजान मे एक छोटी चीज का लाखों गुना ज्यादा सवाब मिलता है; इसलिए ये 1 महीना रमजान का दिल से इबादत करने में लगा दीजिए और इसकी इज्जत कीजिए. 

26. Sone se pehle 100 मर्तबा surah al ikhlas पढ़ें।

आपको बता दें हदीसों में आया है, कि अगर कोई शख्स 100 मर्तबा surah al ikhlas पढ़ ले और खुद पर दम करके दाहिनी करवट सो जाए; ऐसा करने से कयामत के दिन अल्लाह आपसे कहेगा कि दाहिने से जन्नत में जाओ…. और वैसे भी रमजान में जन्नत के दरवाजे खुल जाते है, और जहन्नुम के बंद. 

और जैसा मैंने ऊपर कहा कि रमजान में एक नेक चीज, अमाल, अल्लाह का जिक्र करने का सवाब हजारों-लाखों गुना बढ़ जाता है, तो इसलिए हमे ये भी करना चाहिए…

हदीसों में कई बार surah-al-ikhlas का जिक्र और इसकी फजीलत का बयान है; उसी मे से एक ये भी है कि जो शख्स सोने से पहले 100 मर्तबा surah ikhlas को पढ़ ले तो अल्लाह आपकी हिफाजत करता है. 

और भी कई सारे फायदे हैं surah ikhlas के, तो इसे पढ़ना बिल्कुल ना भूले…. 

तो दोस्तों, ये थें कुछ ऐसे काम जो आपके सवाल Ramzan me karne chahiye, अगर आप उपर लिखे सभी कामों को करने मे कामयाब हो गए; यकीन मानिये ये रमजान आपके लिए जरिया-ए-मगफिरत बन सकती है. 

Ramzan me kya karna chahiye को हमने अच्छे से समझाया है, आपसे गुज़ारिश है, कि आप ऊपर लिखे सभी चीजों को अच्छी तरह से करें; जिससे आपको रमजान का भरपूर सवाब मिल सके और अल्लाह के फजल-ओ-करम से ये रमजान ज़रिया-ए-मगफिरत बन जाए. 

अब हम जानेंगे कुछ ऐसे काम जिन्हें हमें भूल कर भी नहीं करना, है यानी कि Ramzan me kya nahi karna chahiye, अगर आप इन्हें करते हैं, तो आपको गुनाह, अजाब से लेकर कुछ दूसरे मकरूहात तक का सामना करना पड़ सकता है. 

आइए इसे भी जानते हैं….. 

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Ramzan me kya nahi karna chahiye

तो आइये उन कामों पर भी नजर डाल लेते हैं, जिन्हें आपको रमजान में करने से बिल्कुल परहेज करना है, नहीं तो आप अंजाम जानते ही है, जो मैंने उपर बताया.

  • आपने अगर रोजे की हालत में पूरी तरह से गीले कपड़े पहन रखे है; तो आपका रोजा मकरूह हो सकता है, अगर कपड़ा गीला हो गया है, तो उसे बदल लें. 
  • रोज़े की हालत में हमबिस्तरी ना करें, रमजान मे रोज़ा खोलने के बाद से अगले दिन का रोज़ा रखने से पहले तक हमबिस्तरी कर सकते हैं. 
  • तंबाकू, सिगरेट, सिगार, हुक्का, ना पियें इससे रोज़ा टूट जाएगा; और शराब तो वैसे ही हराम है, सारी नशे की चीजें छोड़ दें. 
  • रोज़े की हालत मे गाली ना दें इससे आपका रोज़ा मकरूह हो जाएगा और किसी का दिल ना दुखाएं, इससे आपको रोज़े का सवाब ना मिल सकेगा. 
  • ऐसी चीजें ना देखें, ना बोलें, ना सोचें, ना करें जो आपको sexually excite (हमबिस्तरी के लिए जुनूनी करे) करे, किसी औरत को गलत नजर से ना देखें; क्यूंकि जब आप ऐसा करते हैं, तो आप दोनों की निगाहें जीनाह करती हैं, इससे रोज़ा टूट सकता है.
  • हाथों का जीनाह भी हराम है, इससे आपको गुनाह मिलेगा और अगर रोज़े की हालत मे किया गया तो रोज़ा भी टूट जाएगा. 
  • अगर आपने रोज़ा रखा है, और आपके मां-बाप आपको बुला रहे हैं, कुछ काम दे रहे हैं, या किसी चीज के लिए इंकार कर रहे हैं; तो आपको उनकी बात माननी है, और उल्टा जवाब नहीं देना है. 

रमजान मे ऐसा करने से आपका रोज़ा मकरूह हो जाएगा और आपको सवाब की जगह गुनाह मिलेगा; गौर-रमजान महीने मे भी आपको उनकी खिदमत करनी है, और उनकी सारी बात माननी है. 

  • लड़ाई ना करें, किसी का बुरा ना करें, किसी के लिए बुरा ना सोचे, किसी की तरक्की पर ना जलें और ना ही गीबत करें. 
  • इफ्तार के वक्त भी कुछ ऐसा ना करे जिससे रोज़ा टूट जाए, जैसे गाली, लड़ाई, गंदी चीजें सोचना, इफ्तार की बुराई जैसे काम ना करें. 
  • रोजे की हालत में ये ना कहें कि रोज़ा बहुत कठिन हैं, कल से नहीं रखूँगा/रखूंगी; ऐसा कहने से सवाब मे कमी हो जाएगी और रोज़े की हिदायत छीन ली जाएगी. 
  • जानबूझकर रोज़ा ना छोड़े, अगर तबीयत खराब है, तो छोड़ सकते हैं; लेकिन रमजान के बाद किसी दूसरे महीने मे रखना होगा, रमज़ान का कज़ा रोज़ा. 
  • अगर आप रोज़ा नहीं रखे हैं, तो किसी दूसरे रोजेदार को कुछ गलत ना बोलें, या उसके लिए कुछ गलत ना करें; और ना ही उसके खिलाफ कोई साजिश करें, ऐसा करने से आपको बहुत गुनाह मिलेगा, भले ही वो शख्स आपका दुश्मन ही क्यों ना हो. 
  • रमजान मे किसी से दुश्मनी ना करें, और अगर पहले से हो तो सुलह कर लें क्यूंकि रमजान प्यार का महीना है; सबको माफ करें और खुद भी लोगों से माफ़ी मांगे. 

अगर उन्होंने आपको बद्दुआ दे दिया और वो सही रहा और अल्लाह ने कबूल कर लिया तो आप तो अच्छे से जानते हैं, कि वो बद्दुआ लग सकती है. 

  • जकात देने से ना भागे, इससे आपको अल्लाह की बारगाह मे जलील होने से कोई नहीं बचा पाएगा और कोई आपकी गवाही भी नहीं देगा; इसके साथ-साथ आपकी ईद की नमाज भी पूरी नहीं होगी और ना ही मानी जाएगी. 
  • किसी गरीब को बुरा ना कहें, उनकी मदद कर उनसे दुआ की उम्मीद करें ना कि उन्हें बदनाम कर उनसे बद्दुआ लें; आपका हक है, गरीबों की मदद करना और जकात देना, और जकात उनका हक भी है. 
  • दिखावा ना करें, कुछ लोगों के पास ज्यादा पैसा होता है, और वो Ramzan party या इफ्तार पार्टी रखते हैं; और अपने दोस्तों को ही बुलाते हैं, गरीबों (जिन्होंने रोज़ा रखा है) उनको नहीं बुलाते सिर्फ और सिर्फ अपनी पहचान दिखाने और अपने आपको बड़ा दिखाने के लिए. 

बता दें कि ये भी सिर्क है, और आपको इसका गुनाह भी मिलेगा की अल्लाह ने आपको गरीबों की मदद के लिए पैसा दिया है, ना कि लोगों को दिखाने के लिए. 

  • और ऐसा कोई भी काम ना करें जिससे अल्लाह नाराज हो जाए या अल्लाह ने मना किया है….. 

तो दोस्तों ये थे कुछ ऐसे काम यानी ramzan me kya nahi karna chahiye जिसे बिल्कुल नहीं करना चाहिए….. 

उम्मीद करता हूँ की आपको आजका ये पोस्ट पसंद आया होगा और कुछ नया सीखने को मिला होगा इस्लाम और रमजान से related; अगर हाँ, तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों और घरवालों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उन्हें भी पता चले की रमजान में क्या करना चाहिए और क्या नहीं… 

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