Qaza roza rakhne ka tarika – Qaza roza kaise rakhe

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Qaza roza rakhne ka tarika बहुत मुसलमान मर्द और औरत जानना चाहते थे क्योंकि ऐसे भी कई लोग हैं; जिनके रमज़ान के कई रोजे अलग-अलग वजह छूट गए और यह हम सब जानते हैं, कि रमजान के रोजे छोड़ना गुनाह है.

ऐसे में जिन लोगों के रमजान के रोजे छूट गए थे वजह कुछ भी हो सकती है, हदीसों में आया है; रमजान के रोज़े अगर छूट जाए तो उसके लिए आपको छूटे हुए रोजों का कफ्फारा या कज़ा रखना पड़ता है, अगर ना रखा जाए तो वह गुनाह होता है.

बता दे छूटे हुए रोज़ों की अदायगी दो तरीके से की जा सकती है, और वह दो तरीके हदीसों में बताए गए हैं; इन 2 तरीकों से आप अपने छूटे हुए रोज़ों को पूरा कर सकते हैं, और गुनाह से बचकर सवाब हासिल कर सकते हैं.

Roze ke do kism

  1. रोजे का कफ्फारा।
  2. कज़ा रोज़े रखना।

कफ्फारा रोज़े क्या है?

इस्लाम में कफ्फारा रोज़े रखने का का मतलब यह होता है, कि आप को छुटे हुए रोजों को अदा करने के लिए अलग से रोज़ा नहीं रखना होता है, आपको एक गुलाम या बंदी आजाद करना होता है, या 60 दिनों तक लगातार रोजा रखना होता है, इसके अलावा या तो आपको 60 मिसकीनों को खाना खिलाना होता है.

कज़ा रोज़े रखना।

छूटे हुए रोज़ों की अदायगी करने के लिए दूसरा रास्ता होता है, कजा रोजे रख लेना आपने रमजान के मुबारक महीने में जितने भी रोजे छोड़े हैं; उनके बदले आपको आने वाले महीनों में उन रोज़ों के कजा रोजे रखने होंगे और Qaza roza rakhne ka tarika हम आपको अभी बता देंगे.

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Qaza roza kaise rakhe

जब आपके फर्ज रोज़े छूट जाते हैं, तो आपको उन रोज़ों का कजा रखना होता है; और ताजा रोजा ठीक फर्ज रोजे की तरह ही रखा जाता है, बस इसकी नियत अलग होती है.

कजा रोजा आप रमजान के मुबारक महीने से लेकर के अगले रमजान के महीने शुरू होने से पहले तक कभी भी रख सकते हैं; लेकिन आपको बता दें आप उन महीनों में कजा रोजों को रखें जिन महीनों की फजीलतें काफी ज्यादा है.

मिसाल के तौर पर शाबान का महीना और शव्वाल का महीना और अभी शव्वाल का महीना चल रहा है; तो हो सके तो आप इसी महीने में कजा रोजा रख लें.

Qaza roza rakhne ki niyat

नियत दिल के इरादे को कहते हैं, अगर आप रात को सोने से पहले दिल में यह इरादा कर लिए हैं, कि मुझे कल कजा रोजा रखना है; तो आपकी नियत हो गई ऐसे में अगर आप सेहरी में नहीं उठ सके तो भी आप का रोजा माना जाएगा.

पांच वक्त की नमाज का तरीका। –

Qaza roza rakhne ki dua

Qaza roza rakhne ki dua रोजा रखने की नियत और खोलने की नियत को कहते हैं, जो नियत आप रमजान में करते वही आपको कज़ा रोज़ों में करने हैं.

नियत अरबी में। - وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتَ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ
नियत हिंदी में। - व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान।

Qaza roza rakhne ka tarika

  • Qaza roza rakhne ka tarika रमज़ान के फर्ज रोज़ों की तरह ही है, आपको सबसे पहले सेहरी में उठना है; और सेहरी करके सुन्नत अदा करनी है, इसके बाद आपको नियत करनी है.
  • अब सेहरी से लेकर इफ्तार तक आप अल्लाह की ज्यादा-से-ज्यादा इबादत करें अल्लाह के जिक्र से अपने लबों को तर रखें; और तमाम उम्मते मोहम्मदिया के लिए दुआ करें सहरी में मांगने वाली दुआओं को जरूर पढ़ें.
  • अब वक्त आ जाएगा आप का रोजा खोलने का अब आप इफ्तार के लिए दस्तरखान बिछाएं और इफ्तार में मांगने वाली दुआओं को पढ़ें दरूद शरीफ को कसरत से पढ़े और दुआ मांगे क्योंकि इफ्तार के वक्त दुआ कबूल होती है, इस वक्त को जाया ना जाने दे.
  • इफ्तार करने के बाद आपका रोज मुकम्मल हो जाता है, ऐसा करके आप अपने तमाम कजा रोजों को अदा कर सकते हैं

Qaza roza kab rakha jata hai

दोस्तों जब आपके रमजान उल मुबारक के फर्ज रोजे छूट जाते हैं, तो उसके बदले आपको अगले महीने छूटे हुए रोजों को पूरा करना होता है; जिसे हम कजा रोजा के नाम से जानते हैं, रोजे कई वजहों से छूट जाते हैं, आइए हम एक बार उन्हें देख लेते हैं, जिनसे रोजे टूट जाते हैं.

  • गाली देना।
  • ज़कात अदा ना करना।
  • कान व नाक में दवा का डालना।
  • जानबूझकर दांतों में फसा खाना निगल जाना।
  • मुश्त-ज़नी (masturbation) करने से।

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आज आपने क्या जाना?

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट जिसमें हमने आपको qaza roza rakhne ka tarika मुकम्मल तौर पर तफसील से बताया; ताकि आपके जो रोजे रमजान में छुटे हैं, उन्हें आप अदा कर सके और गुनाहों से बच सकें.

उम्मीद है ! आपको आपके तमाम सवालों के जवाब मिल गए होंगे और आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी; अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे सपने व्हाट्सएप, फेसबुक पर शेयर जरूर करें.

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