Namaz padhne ka sahi tarika

Namaz padhne ka sahi tarika हर मुसलमान शख्स को पता ही होना चाहिए; क्योंकि नमाज हम पर फर्ज है, और इसे छोड़ना गुनाह का काम।

हमारे नबी आका-ए-मदीना मोहम्मदी मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने अपने पूरी जिंदगी में और यहां तक कि अपने विलादत के वक्त में भी सिर्फ एक ही चीज अपने उम्मत से कही।

वह बात थी मेरी उम्मत नमाज़ न छोडना, मेरी उम्मत नमाज़ न छोडना।

इससे हमें यह पता चलता है कि नमाज का कितना बड़ा मर्तबा है; और तो और नमाज हर हाल में अदा करना जरूरी है।

हां ऐसी कुछ मजबूरियां या परेशानियां होती है जहां पर नमाज चाहे तो ना पढ़ सकते हैं; तो उसके बारे में हम आगे आपको बताएंगे।

लेकिन दोस्तों फिर भी ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज़्यादी है जो नमाज़ को जानबूझकर छोड़ देते हैं।

एक तो होता है कि उन्हें namaz padhne ka sahi tarika नहिं मालूम होता है; और दूसरा होता है कि उनके अंदर से अल्लाह का खौफ खत्म हो जाता है।

ऐसे में जो लोग namaz padhne ka sahi tarika. नहीं जानते उनके लिए यह पोस्ट बहुत मददगार होगी।

लेकिन ऐसे लोग जो जानबूझकर के नमाज छोड़ते हैं तो उनको हम बस यही कहेंगे; कि अल्लाह का खौफ रखो।

और हमारी अल्लाह से यही दुआ है कि अल्लाह उन्हें हिदायत अता फरमाए आमीन।

Namaz padhne ka sahi tarika

आप एक बात जान लीजिए हर मुसलमान मर्द और औरत को चाहिए; कि ईमान और अकीदों को सही कर लेने के बाद सब फर्जों में से सबसे बड़ा फर्ज है नमाज अदा करना।

आपको बता दें कुरान मजीद और हदीसों में बार-बार नमाज का जिक्र आया है; और इसकी ताकीद की गई है।

एक बात का याद रखें कि जो शख्स नमाज को फर्ज नहीं मानता या नमाज की तोहीन करता है; तो वह काफिर कहलाता है और उसके लिए इस्लाम खारिज हो जाता है।

और जो शख्स हर चीज जान करके भी नमाज ना अदा करें अपने घमंड में रहे; और वह सोचे की नमाज एक हल्की इबादत है तो वह गुनहगार होगा।

दोस्तों यह तो थी कुछ चंद बातें जो हमें नमाज के बारे में जानना जरूरी थी।

लेकिन दोस्तों नमाज अदा करने से पहले ऐसी भी कुछ चीजें होती हैं; जिनको ना जानने और मानने से हम चाहे जितनी भी नमाज पढ़ लें वह कबूल नहीं होती।

उन चीजों में होती है – नमाज़ की शर्तें, नमाज़ के फराइज, नमाज की मकरूहात; तो इन चीजों का जानना नमाज पढ़ने से पहले ज़्यादा जरूरी है।

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Namaz ki sharte kitni hai

नमाज की शर्तें वह होती हैं जिनको ना करने से हमारी नमाज शुरू ही नहीं होती. और इन चीजों को माने बिना हम चाहे जितनी भी नमाज अदा कर लें; उन नमाजो का सवाब हमें नहीं हासिल होता।

यह चीजें बहुत आम है जो कई बार लोग जानबूझकर या अनजाने में छोड़ दिया करते हैं; या भूल जाते हैं इसलिए आप नमाज की शर्तों को जरूर जानें।

Namaz ki 6 sharte (namaz padhne ka sahi tarika)

  • पाकी होना।
  • शर्मगाह को छुपाना।
  • नमाज का सही वक्त होना।
  • किबला की तरफ मुंह करना।
  • नमाज़ की नियत करना।
  • तकबीरे तहरीमा करना।

इन 6 चीजों की मालूमात आपको हो गई आप इसे तफ्सील से भी जान सकते हैं।

लेकिन जब भी आप नमाज के लिए जाएं आप इन शर्तों को एक बार याद जरूर करें; कि आप सभी शर्तों को मान लिए हैं या नहीं।

अब बात करते हैं नमाज़ के फराइज की।

Namaz ke faraiz (namaz ke farz)

नमाज़ के फराइज यानी नमाज में ऐसी चीजें जिनको करना फर्ज है; और अगर इन चीजों को छोड़ दिया जाए तो आप की नमाज़ कबूल नहीं होगी।

शरीयत में कुछ चीजें फर्ज़ होती हैं, सुन्नत होती है और वाजिब होती हैं; जिनमें अगर आप वाजिद और सुन्नत को कभी भूल कर छोड़ देते हैं तो उसका आपको गुनाह उतना नहीं मिलता।

लेकिन अगर आप किसी फर्ज चीज को छोड़ते हैं; अब चाहे वह नमाज हो या चाहे जकात तो ऐसे में आपको फर्ज छोड़ने का गुनाह मिलेगा।

इस लिहाज से नमाज में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें फर्ज करार किया गया है; जिनको ना करने से आप की नमाज नहीं मानी जाएगी।

अगर आप फर्ज चीजें गलती से भी भूल जाते हैं; तो आपको वही नमाज छोडकर के फिर से नमाज पढ़नी होगी।

Namaz ke 7 farz (namaz padhne ka sahi tarika)

  • तकबीरे तहरीमा करना।
  • क़याम करना (खडा होना)।
  • कीरअत करना।
  • रूकूअ करना।
  • सजदा करना।
  • क़ादा-ए-आख़ीरा करना।
  • नमाज़ मुकम्मल करना (सलाम फेरना)।

Namaz ke makroohat (namaz ka tarika)

इन चीजों यानी नमाज के मकरूहात को नमाज के दरमियान करने से आप की नमाज मकरू हो जाती है।

मकरूह चीजों का मतलब यह होता है कि ऐसी चीजें जिनको हमारे शरीयत में नापसंद किया गया हो; और हमें मना किया गया हो।

ऐसी चीजें बहुत ज्यादा है, जिनमें से बहुत चीज तो आम है जो हम अनजाने में कर बैठते हैं; और हमें उस चीज मालूमात ही नहीं होती।

इसलिए नमाज के मकरूहात का जाना हमारे लिए जरूरी है ताकि हम कोई ऐसी चीजें ना कर बैठे; जिससे हमारी नमाज़ कबूल ना हो और अल्लाह हमसे नाराज हो।

और हम नमाज तो अल्लाह के रज़ा के लिए ही पढ़ते हैं; तो इसमें गलती करना जानबूझकर हमारे ख्याल से वह गलत है।

Namaz ke makroohat (namaz ka tarika)

दोस्तों नमाज के मकरूहात बहुत ज्यादे हैं जिनका इस एक पोस्ट में बता पाना मुश्किल है; लेकिन हमने नमाज के मकरूहात पर पोस्ट बनाई है आप चाहे तो उसे पढ़ सकते हैं।

लेकिन फिर भी हम कुछ मकरूहात आपके सामने पेश कर देते हैं; जिससे आपको अंदाजा लग जाए कि आखिर मकरूहात क्या है?

  • कोख पर हाथ रखना।
  • कपडों के साथ खेलना।
  • कंकडिया हटाना।
  • तस्वीर वाले कपड़े पर नमाज अदा करना।
  • अंगडाई लेना।
  • फ़ासिक मुअल्लिन के पीछे नमाज़ पढना।

दोस्तों यह तो हो गया नमाज़ के मकरूहात और वह चीजें जो हमें नमाज से पहले जान लेनी चाहिए; अब हम बात कर लेते हैं कितने वक्त की नमाज होती है।

Namaz padhne ka sahi tarika

तो दोस्तों जितनी चीजों की मालूमात हमें नमाज पढ़ने से पहले होनी चाहिए; थी उन सभी की मालूमात अब हो चुकी है।

अब हम नमाज पढ़ने का सही तरीका जान लेते हैं इसमें सबसे पहले आता है; नमाज का वक्त कि आखिर कौन सी नमाज किस वक्त पढ़ी जाती है।

कितने वक्त की नमाज़ पढी जाती है (kitne waqt ki namaz hoti hai)

इस्लाम में पांच वक्त की नमाज पढ़ने का हुक्म दिया गया है, वह पांच वक्त की नमाज़ यह है।

Note – दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं कि हर नमाज पढ़ने का तरीका थोड़ा अलग होता है जैसे कि अलग नियत अलग रकात, और भी कई सारे; इसलिए हमने आपके लिए ऊपर, पाँचों वक्त की नमाज़ का तरीका तफ़सील से बताया है, आपको जिस नमाज़ का तरीका जानना है आप उस पर click करके जान सकते हैं.

दोस्तों यह थी वह पांच वक्त की नमाज जिन्हें पढ़ना फर्ज है हर नमाज में अलग-अलग रकात होती है; और सब की नियत भी अलग-अलग होती है।

आइए एक-एक करके इन सभी नमाज़ों के बारे में जानते हैं; चली सबसे पहले हम नमाज की नियत के बारे में जान लेते हैं।

Namaz ki niyat (namaz padhne ka sahi tarika)

नियत करना बेहद जरूरी है क्योंकि नियत से ही पता चलेगा कि आप किस वक्त की नमाज पढ़ रहे हैं।

आपको बता दे नमाज की नियत का मुंह से बोलना जरूरी नहीं होता है आपके जहन में यह बात होनी चाहिए; कि आप कौन सी वक्त की नमाज पढ़ रहे हैं और वह नमाज कितने रकात की है।

अगर आपके जहन में उस वक्त की नमाज की मालूमात है तो आपकी नियत हो जाएगी; लेकिन फिर भी दोस्तों हर नमाज की नियत अलग-अलग होती है इसलिए आप लोग नमाज़ की नियत जान ले।

दोस्तों नियत करने के बाद आप की नमाज शुरू हो जाती है अब हम आपको बताते हैं; नमाज पढ़ने का तरीका क्या होता है।

Namaz ka tarika in hindi

Namaz ka tarika in hindi, मे हम आपको कुछ ऐसी बातें बतायेंगे कि namaz padhne ka sahi tarika kya hai; और ये हर मुसलामान को जानना चाहिए ताकि आपको नमाज का पूरा सवाब मिल सके.

तो दोस्तों नमाज पढ़ने का सही तरीका हमने नीचे लिखा है; और आपको हर step सही से follow करना है.

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Namaz padhne ka sahi tarika

#1. नमाज़ की सभी शर्तों और फर्जों को अपनाएं और फिर नमाज के लिए खड़े हो जाएं.

Note – दोस्तों नमाज की शर्तों और को अपनाने से पहले आपको वजू करना है; वज़ बनाने का सही तरीका आपको मालूम होना चाहिए ताकि आप खुश हुआ कुजू के साथ वजू कर सकें।

अगर आप अपने किये हुए वजु का सवाब और ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं; तो आप ताहियातुल वज़ु की नमाज अदा कर सकते हैं।

#2. उस नमाज़ की नियत करके सना पढ़ें, और फिर पूरा बिस्मिल्लाह पढें.

#3. अब अलहम शरीफ पढ़ें, और फिर कोई कुरान मजीद की पढ़ी जाने वाली छोटी सूरह या कोई बड़ी सुरह पढ़ें.

#4. फिर अल्लाह-हू-अकबर कह कर रुकू में जायें फिर समी अल्लाहु लिमन हमिदह कह कर खड़े हो जाएं और फिर अल्लाह हू अकबर कहकर सजदा में जाएं. फिर अल्लाह-हू-अकबर कह कर बैठ जाएं और फिर सजदा में जाएं. दो बार सजदा करने केेेेेेेे बाद अल्लाह हू अकबर कह कर खड़े हो जाएं.

#5. और फिर ऊपर लिखा तरीका एक बार और दोहराएं, बिना नियत और सना के, यानी अलहम शरीफ से.

#6. और ये तरीका पूरा करके खड़े ना हों ब्लकि बैठ जायें, और फिर अत्तहियात पढ़ें, फिर दरूद शरीफ पढें, फिर दरूद शरीफ के बाद की दुआ पढ़ें और सलाम फेरें.

Note – अगर चार रकात नमाज़ है तो दूसरी रकात में सिर्फ अत्तहियात पढ़कर उठ जाएं, दरूद शरीफ और बाद की दुआ ना पढ़ें; और अब फिर से वही तरीका अपनाए जो मैंने आपको ऊपर बताया, 4 रकात मे अत्तहियात के बाद दरूद शरीफ और दरूद के बाद की दुआ अब पढ़ना है ना कि वे दूसरे रकात मे.

Note – रूकु में सुभाना-रब्बी-यल-अज़ीम और सज़दा मे सुभाना-रब्बी-यल-अला पढ़ना है।

और तफ़सील से हर नमाज का तरीका जानने के लिए हमारे website के search button par लिखें ‘(नमाज़ का नाम, ईशा, मगरिब आदि) ki namaz ka tarika

Conclusion (नतीजा)

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट इसमें हमने आपको नमाज़ पढ़ने का सही तरीका तफसील से बताया है।

अल्लाह से दुआ है हमें कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए आमीन।

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अल्लाह हाफिज !!!

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