Namaz ke baad ki dua in hindi – Namaz ke baad padhne ki dua

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Namaz ke baad ki dua वो होती हैं, जिसे हर फर्ज नमाज को पढ़ने के बाद पढ़ा जाता है, जो कि हदीसों से साबित है; लेकिन इसके अलावा सुन्नत अब नफील नमाज़ के बाद भी ऐसी कुछ दुआएं होती हैं, जिन्हें पढ़ना होता है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे नहीं पड़ते हैं.

हर फर्ज नमाज के बाद नमाज के बाद की दुआ पढ़ना जरूरी होता है, इसकी फजीलतें काफी ज्यादा है; लेकिन बहुत से लोगों को namaz ke baad padhne ki dua की मालूमात नहीं होती जिस वजह से वह इन दुआओं को नहीं पढ़ते और इन दुआओं की फजीलतों से मेहरूम रह जाते हैं.

आज कि इस पोस्ट में आपको Namaz ke baad ki dua in hindi – Namaz ke baad padhne ki dua; तफ्सील से और आसान लफ्जों में बताएंगे. ताकि आपको यह तमाम दुआएं याद हो जाएं और आप हर नमाज के बाद इन दुआओं को पढ़कर सवाब हासिल कर सकें.

Namaz ke baad ki dua in hindi

Namaz ke baad ki dua बहुत सारी है, लेकिन हदीसों के मुताबिक हर फर्ज नमाज के बाद आयतुल कुर्सी का पढ़ना अफजल माना जाता है, और इसे पढ़ने से जन्नत नसीब होती है.

बता दें namaz ke baad ki dua में नमाज के बाद की तस्बीह पढना भी शामिल है, तस्बीह को पढ़ने से गुनाह माफ हो जाते हैं; नमाज अदा करने के बाद namaz ki dua पढ़ी जाती है, उसके बाद तस्बीह पढ़ी जाती है, उसके बाद दुआ मांगा जाता है, और ऐसा करने से दुआ भी कबूल होती है.

आज कि इस पोस्ट में हम आपको 10 namaz ki dua in hindi में बताएंगे जिसमें से आपको जो दुआ आसान लगे; जो आपसे जल्दी और आसानी से याद हो जाए आप उसे याद कर लें और उसे हर नमाज के बाद पढ़ें.

Namaz ke baad padhne ki dua

  • आयतुल कुर्सी।
  • अस्तगफिरुल्लाह पढें।
  • नमाज़ के बाद की दुआ पढें।
  • पहला कलमा पढें।
  • ला इलाहा इल्लल्लाहु वदहु दुआ पढें।
  • अल्लाहुम्मा अ इन्नी।
  • सुरह काफिरून पढें।
  • कुल हुवल लाहू अहद पढें।
  • सुरह फलक पढें।
  • सुरह नास पढें।
  • सुब्हा-नल मलिकिल कुद्दूस।

नमाज़ के बाद की दुआ आयतुल कुर्सी

हर फर्ज नमाज के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ने की फजीलत हर हदीसों में बताई गई हैं, हदीसों में आया है; कि जो शख्स आयतुल कुर्सी को हर फर्ज नमाज के बाद पड़ता है, तो उसे जन्नत नसीब होती है.

लेकिन इसके अलावा भी आयतल कुर्सी की फजीलतें बेशुमार हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे; आप आयतुल कुर्सी का तर्जुमा भी जरूर पढ़ें.

नमाज़ के बाद की दुआ अस्तगफिरुल्लाह पढें।

अस्तगफिरुल्लाह हमें ऐसे भी हर वक्त पढ़ते रहना चाहिए हर नमाज के बाद इसे पढ़ना सबसे अफजल माना जाता है; क्योंकि हमारे नबी भी हर नमाज के बाद अस्तगफिरुल्लाह पढ़ा करते थे.

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नमाज़ के बाद की दुआ पढें।

हर नमाज के बाद जो अक्सर दुआ पढ़ी जाती है, जो हदीसों से साबित है, namaz ke baad ki dua है; यानी कि इसे तो हमेशा ही पढ़ना चाहिए.

दुआ। - अल्लाहुम्मा अंतस्सलाम व मिनकस्लासम तबारकत या ज़लज़लाली वल इकराम। 
दुआ तर्जुमा। - ए अल्लाह तू सलामती वाला है, और तेरी तरफ ही सलामती है, तू बा-बरकत है, ए बुजुर्गी और इज्जत वाले। 

नमाज़ के बाद की दुआ पहला कलमा पढें।

पहला कलमा की फजीलत से तो हर कोई वाकिफ होगा यह इस्लाम की बुनियादी लफ्ज़ हैं; इनको पढ़ने से इंसान मुसलमान बन जाता है, और पहला कलमा में हम अल्लाह की गवाही देते हैं.

जो शख्स पहला कलमा का विर्द ज्यादा से ज्यादा करता है, तो उसकी मगफिरत हो जाती है; साथ-ही-साथ उसके मां-बाप की मगफिरत हो जाती है, ऐसा कई किताबों में आया है.

पहला कलमा। - "ला इलाहा इल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह"
पहला कलमा तर्जुमा। - "अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सलल्लाहो अलैहि वसल्लम (ﷺ) अल्लाह के रसूल हैं"

नमाज़ के बाद की दुआ ला इलाहा इल्लल्लाहु वदहु दुआ पढें।

यह दुआ बेहद ही बा बरकत है, इस दुआ को हमेशा पढ़ना चाहिए इस दुआ में अल्लाह की तारीफें की गईं हैं; और अल्लाह की बादशाहत बयान की गई है.

दुआ हिंदी में। - ला इलाह इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीक लहु, लहुल मुल्कु वलहुल हम्दु वहुव अला कुल्लि शैइन क़दीर।
दुआ तर्जुमा। - अल्लाह के इलावा कोई सच्चा माबूद नहीं वह अकेला हे, उसका कोई साथी नहीं, उसी के लिए बादशाहत है, और उस के लिये तमाम तारीफ़ें हैं, और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है। 

नमाज़ के बाद की दुआ अल्लाहुम्मा अ इन्नी।

दोस्तों यह दुआ बहुत ही अफजल है, इस दुआ को हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम अपनी हर नमाज के बाद पढा करते थे; ऐसे में हमें भी इस दुआ को हमेशा अपनी नमाज़ों के बाद पढना चाहिए.

दुआ हिंदी में। - अल्लाहुम्म अ-इन्नी अला ज़िकरिक व शुकरिक व हुसनि इबादतीक। 
दुआ तर्जुमा। - ए अल्लाह अपना ज़िक्र करने, शुक्र करने और अच्छे अंदाज़ में तेरी इबादत करने में मेरी मदद फ़रमा। 

नमाज़ के बाद की दुआ सुब्हा-नल मलिकिल कुद्दूस।

यह दुआ बेहद ही ताकतवर है, और इस दुआ को हर नमाज के बाद तीन मर्तबा पढ़ा जाता है; इस दुआ की अहमियत काफी ज्यादा है, इसे पढ़ने के लिए कई किताबों में कहा गया है.

दुआ हिंदी में। - सुबहानल मलिकिल क़ुद्दूस।
दुआ तर्जुमा। - पाक हे, मेरा रब और उसकी बादशाहत निहायत मुक़ददस। 

जुमे का बयान जरूर पढें। –

नमाज़ के बाद की दुआ चारों कुल।

चारों कुल की फजीलत हर मुसलमान जानता है, ये कुरान मजीद की सबसे अफजल, ताकतवर, बा-बरकत और छोटी सुरतेंं हैं; जो शख्स इन चार सुरतों को पढ कर सोता है, तो उसकी हिफाजत फरिश्ते करते हैं.

ऐसे में नमाज के बाद इन चार सूरतों को यानी चारो कुल को पढ़ना सबसे अफजल माना जाता है; आप इनन सुरतों को आसानी से याद भी कर सकते हैं, और लगभग हर किसी को यह सूरतें याद होती हैं.

नमाज़ के बाद की दुआ सुरह काफिरून

सुरह हिन्दी में। - कुल या अय्यूहल काफिरून ला आ- बुटू मा ता' बुदून, वला अंतुम आबिदूना मा आबुद, वला अना आबिदुम मा आ बद्दतुम, वला अंतुम आबिदूना मा आबुद, लकुम दीनुकुम वलिया दीन।
सुरह तर्जुमा। - कह दो, "ऐ काफिरों, मैं उसकी इबादत नहीं करता जिसकी तुम इबादत किया करते हो - ना ही तुम इबादत करते हो उसे जिस्की मैं इबादत करता हूं - और ना मैं इबादत करूंगा उसकी जिसकी तुम इबादत करते हो, और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत कर रहा हूं - तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है, और मेरे लिए मेरा दीन है।

नमाज़ के बाद की दुआ सुरह इखलास

सुरह हिन्दी में। - कुल हुवल लाहू अहद, अल्लाहुस समद, लम यलिद वलम यूलद, वलम यकूल लहू कुफुवन अहद।
तर्जुमा। - कह दीजिए कि वह अल्लाह और एक है, कह दीजिए अल्लाह अबदी मुतअल्लिक और बेनियाज़ है, वह ना ही किसी का बाप है, और ना ही किसी का बेेटा, अल्लाह के बराबर कोई नहीं है।

नमाज़ के बाद की दुआ सुरह फलक

सुरह हिन्दी में। - कुल आ ऊजू बिरब्बिल फलक, मिन शर्री मा खलक़, वा मिन शर्री गासिकिन इजा वकब, वा मिन शर्रीन नाफ्फासाती फिल उकद, वा मिन शर्री हसिदिन इज़ा हसद।
तर्जुमा। - कह दो ऐ बंदों की मैं सुबह को पैदा करने वाले परवरदिगार (रब) की कसम खता हूँ, तमाम किस्म के मखलूखों के शर से, और अंधेरे की बुराई से जब वह सुलझ जाए, और गांठों में धौंकनी की बुराई से, और जलने वाले की बुराई से जब वह जलन करे।

नमाज़ के बाद की दुआ सुरह नास

सुरह हिन्दी में। - कुल आउज़ू बी रब्बिन्नास, मलिकिन- नास, इलाहिन- नास, मिन शर्रिल वास्वसिल खन्नास, अल- लजी युवास्विसू फी सुदुरिन्नास, मीनल जिन्नती वन्नास।
तर्जुमा। - आप कह दीजिए की मैं लोगों के पालनहार की पनाह में आता हूं, लोगों के मालिक की (और), लोगों के माबूद की (पनाह में), वस्वसा डालने वाले और पीछे हट जाने वाले के शर से, जो लोगों के दिलो में वस्वसा डालता है, चाहे वो इंसानों में से हो या जिन्नातों में से।

दोस्तों यह थी चंद namaz ke baad ki dua जिन्हें हमने आपको हिंदी में बताया लेकिन इसके अलावा भी पूरी नमाज में अलग-अलग मौकों पर कुछ दुआएं पढ़ी जाती हैं, आईए उन्हें भी हम देख लें.

Namaz ke baad ki dua in hindi mein

जैसा कि हम सभी को पता है, कि नमाज फर्ज, सुन्नत, नफिल और वाजिब होती है; हर फर्ज नमाज के बाद फर्ज नमाज के बाद की दुआ करना जरूरी होता है.

लेकिन इसके अलावा भी सुन्नत नमाज के बाद भी दुआ पढ़ी जाती है, इसका सवाब बहुत ज्यादा है; लेकिन इसे ज्यादातर लोग नहीं पढते.

Har sunnat namaz ke baad ki dua

Har sunnat namaz ke baad ki dua यह है – अल्लाहुम्म अअिन्ना अला जिकुरि-क वशुकरि-क वहुसनि अिबा दति-क – आप इस दुआ को याद कर लें और हर सुन्नत नमाज के बाद इसे पढ़ें आइए अब हम इसका तर्जुमा भी देख लेते हैं.

दुआ तर्जुमा। - ऐ अल्लाह हम पर जरुरी है, की हम तेरा जिक्र करें और तेरा शुक्र अदा करें और तेरी अच्छे से इबादत करें|

Har namaz ke baad ki dua

Har namaz ke baad ki dua को आप हर फर्ज, सुन्नत, नफील वाजिब नमाज अदा करने के बाद पढ़ सकते हैं; अगर आपको तमाम दुआएं नहीं याद हो पा रही है, तो आप हमारी बताइ हुई इस दुआ को पढ़ लें.

दुआ इन हिंदी। - अल्लाहुम्म बारिक ली फिल मौति वफि मा बअु-दल मौति।
तर्जुमा हिंदी में। - ऐ अल्लाह बरकत दे बिच मेरे मौत के और मौत के बाद भी। 

बता दे इस दुआ को आप हर नमाज के बाद 5 मर्तबा पढ़ें।

आज आपने क्या जाना?

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट इस पोस्ट में हमने आपको namaz ke baad ki dua की जानकारी आसान लफ्जों में और हिंदी में बताने की कोशिश की है; ताकि आप इन तमाम दुआओं को आसानी से याद कर सकें और हर नमाज़ों के बाद इन्हें पढ़कर सवाब हासिल कर सकें.

  • Namaz ke baad ki dua.
  • Namaz ke baad padhne ki dua.
  • Har sunnat namaz ke baad ki dua.
  • Har namaz ke baad ki dua.

हमें उम्मीद है आपको इन तमाम चीजों की जानकारी पर आप के तमाम सवालों का जवाब आपको मिल जाएंगे अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप ही से अपने व्हाट्सएप पर ऊपर शेयर जरूर करें.

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