Masjid me namaz parhne ka tarika

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Masjid me namaz parhne ka tarika हमारा आज का टॉपिक है; जिसमें हम आपको मस्जिद में नमाज कैसे अदा करना है उसकी जानकारी देंगे।

दोस्तों बहुत लोगों का यह सवाल होता है कि मस्जिद में नमाज कैसे पढ़ी जाती है? इसमें ज्यादातर बच्चे होते हैं; जिन्हें नमाज पढ़ने का सही तरीका नहीं मालूम होता है।

लेकिन हमारे बीच में ऐसे भी लोग मौजूद हैं जो बड़े तो हो गए हैं; लेकिन उन्हें आज भी मस्जिद में नमाज पढ़ने का तरीका नहीं मालूम।

इसीलिए आज की इस पोस्ट में हम आपको मस्जिद में नमाज पढ़ने का सही तरीका तफसील से बताएंगे; जिससे आप लोग मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर सकें।

आपको बता दें मस्जिद में नमाज पढ़ने की बहुत फज़ीलत होती है; और जो लोग मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ते हैं वह इस फज़ीलत से मरहूम हो जाते हैं।

Masjid me namaz ki niyat kaise kare

नमाज़ की नियत हर नमाज़ के लिए अलग अलग होती है; और नियत भी दो तरीके की होती है।

एक तो वह जो हम घर में नमाज पढ़ते वक्त नियत करते हैं; और दूसरी वो जो हम मस्जिद में जमात के साथ इमाम के पीछे नमाज पढ़ते हैं।

तो जो हम घर में यानी अपने से जो नमाज पढ़ते हैं उसकी नमाज़ की नियत अलग होती है; जिस पर हमने पहले पोस्ट बनाई है आप उसे पढ़ सकते हैं।

आज की इस पोस्ट में हम आपको मस्जिद में नमाज़ की नियत कैसे करें उस पर बताएंगे; जिससे आप मस्जिद में सही तरीके से नियत कर सके और नमाज का सवाब हासिल कर सकें।

दोस्तों मस्जिद में भी पांच वक्त की नमाज की नियत अलग होगी।आपको बता दें मस्जिद में सिर्फ फर्ज नमाज की ही नियत अलग होगी; बाकी सभी नमाज़ों की नियत जो हम घर में जिस तरह पढ़ते हैं उसी तरह रहेगी।

Masjid me fajr ki namaz ki niyat kaise kare (Masjid me namaz parhne ka tarika)

नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज फजर की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

फजर की नमाज में आपको सिर्फ फर्ज नमाज की ही नियत करनी है; सुन्नत नमाज में आपको नियत वैसे ही करनी है जैसे आप घर में करते हैं।

Masjid me Johar ki namaz ki niyat kaise kare (Masjid me namaz parhne ka tarika)

जोहर की नमाज की नियत आपको सिर्फ फर्ज नमाज की करनी है। आपको बता दें सिर्फ जोहर ही नहीं हम जितने भी नमाज मस्जिद में अदा करते हैं; वह सब फर्ज नमाज ही अदा करते हैं।

जोहर की फर्ज नमाज़ की नियत आप इस तरह करें।

नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज जोहर की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के पिछे इस इमाम के मुंह में काबा शरीफ की तरफ अल्लाहू अकबर।”

दोस्तों हम आपको एक बात बता देते हैं कि जोहर और असर की नमाज में इमाम साहब कीरत नहीं करते हैं; मतलब कुछ बोल बोल कर के नहीं पड़ते हैं।

तो ऐसे में कई लोग यह समझ लेते हैं कि इमाम साहब पढ़ा नहीं रहे हैं, हम खुद से पढ़ लेते हैं; ज्यादातर बच्चे बड़े ऐसा नहीं करते हैं।

तो अगर जो लोग ऐसा करते हैं; उन्हें बता दें की जोहर और असर के वक्त किरत नहीं किया जाता यह नमाज की शर्त है।

Masjid me asar ki namaz ki niyat kaise kare (Masjid me namaz parhne ka tarika)

असर की नमाज भी हम लोगों में से बहुत लोग छोड़ दिया करते हैं; जिससे उनकी नमाज कज़ा हो जाती है और वह उस नमाज की फजीलत नहीं पा पाते हैं।

दोस्तों अगर आप से भी गलती से या किसी परेशानी की वजह से नमाज छूट जाती है; तो आप कज़ा नमाज पढ़ने का तरीका जान लें जिससे आपकी कज़ा नमाज की अदायगी हो जाएगी।

बहरहाल हम बात कर रहे थे असर की नमाज़ की नियत कैसे करें.

नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज असर की वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

Masjid me magrib ki namaz ki niyat kaise kare (Masjid me namaz padhne ka tarika)

मगरिब की नमाज बहुत ही अफजल और फजीलत वाली होती है सिर्फ मगरिब की ही एक ऐसी नमाज है; जो अजान होते ही तुरंत पढ़ी जाती है।

नियत करता हूं मैं 3 रकात नमाज मगरिब की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुह मेरा तरफ़ क़ाबा शरीफ के अल्लाहु अकबर।”

Masjid me isha ki namaz ki niyat kaise kare (Masjid me namaz parhne ka tarika)

ईशा की नमाज तमाम नमाज़ों में यानी की पांच वक्त की नमाजों में सबसे लंबी रकातों वाली नमाज; ईशा की नमाज ही है।

ईशा की नमाज को हम लोग रात की नमाज भी कहते हैं; और इसी नमाज में वितिर की नमाज भी पढ़ी जाती है, जोकि वाजिब नमाज है।

नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज ईशा की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुह मेरा तरफ़ क़ाबा शरीफ के अल्लाहु अकबर।”

तो दोस्तों यह तो हो गई नमाज की नियत और उन नमाज़ों के बारे में कुछ बातें; अब हम आपको बताते हैं मस्जिद में नमाज पढ़ने का तरीका।

Masjid me namaz parhne ka tarika

दोस्तों हम आपको पांचों वक्त की फर्ज नमाज़ का तरीका बताने जा रहे हैं; जो आप मस्जिद में अपनाएंगे।

दोस्तों आपको पहले ही बता दें सभी नमाजों का तरीका एक जैसा ही रहेगा; हम तमाम नमाज़ों के बारे में इसलिए बता रहे हैं।

ताकि आपको सब चीज सटीक तरीके से पता चले और आपको कोई कंफ्यूजन ना रहे।

Masjid me fajr ki namaz padhne ka tarika

फजर की नमाज के लिए सबसे पहले आप वज़ु करें; और वज़ु करने के बाद आप नमाज़ के लिए मस्जिद जाएं।

मस्जिद जाकर आप सबसे पहले 2 रकात सुन्नत अदा करें; और जब इमाम साहब आएं तो खडे हो जाएं।

खडे होकर आप पहली रकात शुरू करेंगे।

पहली रकात (Masjid me namaz kaise padhen)

1. खडे होते ही आप नमाज़ की नियत कर लें।

2. अब इमाम साहब अल्लाहु अकबर कहेंगे और कानों हाथ ले जाकर हाथ बांधेंगे; तो आप भी धीरे से अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने हाथों को कानों तक ले जाईगा और अपना हाथ बांध लिजिएगा।

3. अब आप धीमी आवाज में सना पढ़िएगा।

4. अब इमाम साहब सूरह फातिहा की किरत करेंगे आप यहां पर एकदम खामोश रहकर उसे सुनिएगा।

5. सूरह फातिहा पढ़ने के बाद इमाम साहब कोई एक सुरह पड़ेंगे आपको अब भी खामोश रहना है।

6. सुरह पढ़ने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे और रुकु में जाएंगे आप भी रुकु में चले जाइएगा।

7. रुकु में आप 3 मरतबा सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ें।

8. इमाम सहाब समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खडे होंगे आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाइएगा।

9. खड़े होने के बाद इमाम साहब फिर अल्लाहू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे आप भी सजदे में जाएं।

10. सजदा दो बार होगा दो बार सजदा करें सजदे में आपको सुबहाना रब्बी यल अला पढना है।

11. जब दूसरा सजदा हो जाएगा तब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े हो जाएंगे आप भी खड़े हो जाइएगा।

अब आपकी दूसरी रकात शुरू होगी।

दूसरी रकात (Masjid me namaz kaise padhen)

1. दूसरी रकात में खड़े होते ही आपको कुछ नहीं बोलना है आप चुपचाप खड़े रहिएगा; इमाम साहब एक बार सुरह फातिहा पड़ेंगे और एक मर्तबा कोई एक सुरह पढेंगे।

2. सूरह पढ़ने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए रुकु में जाएंगे आप भी रुकु में चले जाइएगा।

3. रुकु में आप तीन बार सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ें।

4. रुकु के बाद इमाम साहब समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खड़े होंगे; और आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाइएगा।

5. अब इमाम साहब दोबारा अल्लाहू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे आप भी सीधे सजदे में जाइएगा।

6. जब दूसरा सजदा मुकम्मल होगा तब आपको खड़े नहीं होना है आप वही तशहुद में बैठ जाइएगा।

7. तशहुद में आप एकदम धिरी आवाज में एक बार अत्तहियात, दरूदे इब्राहिम और दुआ ए मासुरा पढ़कर चुपचाप बैठे रहिएगा।

8. और इमाम साहब अस्सलाम अलैकुम रहमतुल्लाह कहते हुए सलाम फेरेंगे; आप भी पहले दाएं ओर फिर बाएं ओर सलाम फेरिएगा।

बस आपकी यहां नमाज मुकम्मल होती है।

Note – नमाज़ के दौरान आप एक बात का ध्यान जरूर रखिएगा; की आपको इमाम से पहले ना रुकु में जाना है ना सजदे में जाना है।

जब तक इमाम पूरी तरह सजदे और रूकूअ में ना चला जाये; तब तक आप को पूरी तरह सजदे, रुकु में नहीं जाना है।

Masjid me Johar ki namaz padhne ka tarika

सबसे पहले आप वज़ु करें वज़ु करने के बाद मस्जिद को जाएं; और मस्जिद में जाने के बाद 4 रकात सुन्नत नमाज अदा कर ले।

सुन्नत नमाज अदा करने के बाद आप वहीं इंतजार करें और जब नमाज का वक्त होगा; तब इमाम साहब खड़े होंगे और फर्ज नमाज पढ़ाएंगे।

जब आप खड़े होंगे तो आप की पहली रकात शुरू होगी।

पहली रकात (Masjid me namaz kaise padhen)

1. सबसे पहले आपको नियत करना है, और नियत करने के बाद आप खड़े रहें; और जब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे तब आप हाथ बांध लें।

2. हाथ बांधने के बाद आप सबसे पहले सना पड़ेंगे और सना पढ़ने के बाद चुपचाप खड़े रहेंगे।

3. अब आपको इमाम साहब की आवाज सुनाई नहीं देगी तो आपको वहां अपने से नहीं कुछ पढ़ लेना है; क्योंकि जोहर और असर के वक्त इमाम साहब कीरात नहीं करते हैं।

4. अब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे और रुकु में चले जाएंगे तो आप भी रूकु में चले जाइएगा।

5. रुकु में जाने के बाद आप तस्बीह पढेंगे यानी (सुबहाना रब्बी यल अज़ीम)

6. इमाम साहब अब समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खड़े होंगे; वहीं आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाइएगा।

7. अब इमाम साहब सजदे में जाएंगे आप भी सजदे में जाइएगा; और सजदे में तीन बार सुबहाना रब्बी यल अला पढ़िएगा।

8. जब दोनों सजदा हो जाएगा तब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े हो जाएंगे; आप भी खड़े जाएगा यह आपकी अब दूसरी रकात शुरू होगी।

दूसरी रकात (Masjid me namaz parhne ka tarika in hindi)

1. दूसरी रकात में आपको सना नहीं पढ़ना है बस चुपचाप खड़े रहना है; और फिर इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे और रुकु में जाएंगे तो आप भी रुकु में चले जाइएगा।

2. रुकू में जाने के बाद आप तस्बीह पड़ेंगे; फिर इमाम साहब समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खड़े हो जायेंगे।

आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाइएगा।

3. जब आप अच्छे से खड़े हो जाएंगे; तो उसके बाद इमाम साहब फिर अल्लाहू अकबर कहते हुए सीधे सजदे में जाएंगे आप भी सजदे में चले जाइएगा।

4. दोनों सजदा करने के बाद इमाम साहब तशहुद में बैठेंगे आपको भी तशहुद में बैठना हैं।

5. तशहुद में बैठ कर आपको एक बार अत्तहियात पढ़ना है; और जब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहें तो आपको तीसरी रकात के लिए खड़े होना है।

तिसरी रकात (Masjid me namaz parhne ka tarika in hindi)

1. तीसरी रकात में बस खड़े रहना है और जब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे; और रुकु में जाएंगे तो आप भी रुकु में चले जाइएगा।

2. फिर इमाम साहब खड़े होंगे आप भी खड़े होंगे फिर सजदे में जाएंगे आप भी सजदा अदा करेंगे; और दोनों सजदे करने के बाद अब आप चौथी रकात के लिए खड़े होंगे।

चौथी रकात (Masjid me namaz parhne ka tarika in hindi)

1. चौथी रकात आपको तीसरी रकात की तरह ही सेम टू सेम पढ़नी है।

2. आपको बस चौथी रकात में सजदे मुकम्मल करने के बाद खड़ा नहीं होना है, आपको वहीं तशहुद में बैठना है।

3. तशहुद में बैठकर आपको एक बार अत्ताहियात, दरूदे इब्राहिम और दुआ ए मासुरा पढ़कर इंतजार करना है।

4. जब इमाम साहब सलाम फेरें; तो आप भी सलाम फेर लीजिएगा और आप की नमाज मुकम्मल हो जाएगी।

Masjid me asar ki namaz padhne ka tarika

असर की नमाज भी आपको सेम टू सेम जोहर की नमाज की जैसे ही अदा करनी है; आपको सबसे पहले मस्जिद जाकर 4 रकात सुन्नत नमाज अदा करनी है।

और उसके बाद इमाम साहब का इंतजार करना है जब इमाम साहब आएंगे; तो आपको 4 रकात फर्ज नमाज पढ़ाएंगे।

असर और जोहर की नमाज एक जैसी होती है क्योंकि असर में भी चार रकात नमाज़ पढ़ना है; और जोहर में भी 4 रकात फर्ज नमाज ही पढ़नी होती है।

ऐसे में बस आपको नियत अलग करनी होती है असर की नमाज में; और नियत कैसे करनी है? यह हमने आपको पोस्ट की शुरुआत में ही बता दिया।

Masjid me magrib ki namaz padhne ka tarika

मगरिब की नमाज 3 रकात की होती है मगरिब की नमाज में आपको कुछ तब्दीली देखने को मिलती है; जोहर और असर की नमाज के मुकाबले।

आपको बता दें मगरिब की नमाज अजान होते ही अदा की जाती है; इसमें आपको पहले कोई सुन्नत नहीं पढ़नी होती।

उसमें आप डायरेक्ट अजान के बाद नमाज़ अदा करते हैं, उसके बाद सुन्नत और नफील अदा करते हैं।

सबसे पहले आपको अच्छे से वजू करना है वज़ु करने के बाद मस्जिद में जाना है; कोशिश किया कीजिए की अज़ान से पहले चले जाएं क्योंकि अज़ान होते ही नमाज के लिए जमात खड़ी हो जाएगी।

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पहली रकात (Masjid me namaz ka tarika)

1. खड़े होते ही आप सबसे पहले नियत करेंगे नियत करने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए; हाथों को कानों तक ले जाएंगे और अपना हाथ बांध लेंगे तो आप भी ऐसा ही कीजिएगा।

2. अब इमाम साहब कीरत करेंगे इमाम साहब सबसे पहले सूरह फातिहा पड़ेंगे; और उसके बाद कोई एक सुरह पढेंगे आपको चुपचाप खड़े होकर के बस सुनना है।

3. सुरह पढ़ने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए रुकु मैं जाएंगे; आप भी रुकु में जाइएगा और तीन बार सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढिएगा।

4. अब इमाम साहब समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खड़े होंएंगे; तो आप वहां रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाना।

5. रुकु के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे; आप भी सजदे में जाएंगे और दो बार सजदा करेंगे।

दोनों सजदा मुकम्मल होने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए; खड़े होंगे आप भी खड़े हो जाइएगा।

अब आप की दूसरी रखा शुरू होगी।

दूसरी रकात (Masjid me namaz parhne ka tarika hindi me)

1. दूसरी रकात में आपको सना नहीं पढ़ना है आपको बस चुपचाप खड़े रहना है; और जब इमाम साहब अल्लाहु अकबर कहेंगे तो आप रुकु में चले जाइएगा।

2. रुकु करने के बाद अब इमाम साहब खड़े होंगे तो आप भी खड़े हो जाना; और फिर इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे तो आप भी सजदे में जाइएगा।

3. दो सजदा होगा आप दोनों सजदे मुकम्मल करने के बाद वहीं तशहुद बैठ जाइएगा।

4. तशहुद में आप सिर्फ एक बार अत्तहियात पड़ेंगे और बैठे रहेंगे; फिर जब इमाम साहब अल्लाहु अकबर कहेंगे तो आप खड़े हो जाएंगे तीसरी रकात के लिए।

तिसरी रकात (Masjid me namaz parhne ka tarika hindi me)

1. तीसरी रकात में इमाम साहब कुछ नहीं कहेंगे तो आप वहां घबराइएगा मत आप सिर्फ चुपचाप खड़े रहिएगा; और जब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे तो आप रुकु में चले जाइएगा।

2. रुकु के बाद इमाम साहब खड़े होंगे फिर सजदे में जाएंगे तो आप भी सजदे में जाइएगा; और दोनों सजदे मुकम्मल करने के बाद तशहुद में बैठे रहिएगा।

3. अब आप तशहुद में एक बार अत्तहियात, दरूदे इब्राहिम दुआ ए मासुरा पढ़कर बैठे रहिएगा; और जब इमाम साहब सलाम फेरेंगे तो आप भी सलाम फेर लीजिएगा।

Note – यहां एक बात का ध्यान रखिएगा कि आपको पहले सलाम नहीं करना है; जब इमाम साहब सलाम कर लेंगे तब आपको सलाम करना है।

कुछ लम्हों का गैप होना चाहिए ऐसा नहीं कि; जैसे ही इमाम साहब सलाम करें तुरंत आप भी अपना मुंह हिला दिए।

Masjid me isha ki namaz padhne ka tarika

ईशा की नमाज आपको जोहर और असर की नमाज की तरह ही अदा करनी है; बस यहां पर इमाम साहब किरत करेंगे हां लेकिन ईशा की तीसरी और चौथी रकात में किरत नहीं करेंगे।

तीसरी और चौथी रकात को छोड़कर बाकी दोनों रकातों में इमाम साहब कीरत करेंगे।

आप जैसे जोहर और असर की नमाज पढ़ते हैं ठीक उसी तरह ईशा की नमाज भी पड़ेंगे; बस आपको नीयत अलग करनी होगी।

यहां आपको पांचों वक्त की नमाज मस्जिद में कैसे पढ़नी है हमने आपको बता दी।

Conclusion (नतीजा)

नमाज पढ़ना बेहद जरूरी है नमाज से हमारी दुनियावी तमाम परेशानी और मुश्किलातें अल्लाह खत्म कर देता है; और हमारा जन्नत तक जाने का रास्ता आसान हो जाता है।

आज कि इस पोस्ट में हमने आपको मस्जिद में नमाज पढ़ने का सही तरीका बताया; और भी कई चीजें बताई जो आपको नमाज पढ़ने से पहले पता होनी चाहिए।

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अल्लाह हाफिज !!!

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