Masjid me dakhil hone ki dua in hindi – Bahar nikalne ki dua – मस्जिद मे जाने की दुआ

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Masjid me dakhil hone ki dua aur masjid se bahar nikalne ki dua; जानना हर मुसलमानों के लिए काफी जरूरी है. हम आपसे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस्लाम में कदम कदम पर सवाब है.

और कदम कदम पर कुछ ऐसी चीजें भी है जो अगर हमें ना पता हो तो हमसे गलती हो जाती है और हम उसका गुनाह भी मिलता है. और इसी तरह है मस्जिद से बाहर निकलना और मस्जिद में दाखिल होना. 

दोस्तों आपको बता दें कि मुसलमान होने के नाते हम सभी का यह फर्ज बनता है; कि हम अच्छे से अच्छे आमाल को अपनाएं और इसाले सवाब ज्यादा से ज्यादा हासिल करें. 

और आपको जानकर खुशी होगी कि masjid me dakhil hone ki dua aur masjid se bahar nikalne ki dua पढ़ने का भी सवाब है. 

तो दोस्तों उम्मीद है कि आपको masjid me dakhil hone ki dua aur masjid se bahar nikalne ki dua का कितना बड़ा औहदा है. तो चलिए शुरू करते हैं अपना यह पोस्ट; लेकिन उससे पहले हम कुछ लोगों की एक बहुत बड़े सवाल का जवाब देना चाहता हूं. और वह सवाल है “क्या मस्जिद से बाहर और दाखिल होते वक्त दुआ ना पढ़ने से गुना मिलता है”

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तो चलिए पहले ये ही जान लेते हैं. 

क्या मस्जिद से बाहर और दाखिल होते वक्त दुआ ना पढ़ने से गुना मिलता है? 

अगर सीधा सीधा बात करें तो, नहीं. जी आपने सही सुना मस्जिद से बाहर निकलते वक्त और अंदर दाखिल होते वक्त दुआ न पड़ने से गुनाह तो नहीं मिलता है. 

लेकिन आपको यह बात पता होनी चाहिए कि मस्जिद में दाखिल होने की और बाहर निकलने की दुआ ना पढ़ने से आपको सवाब नहीं मिलता है. अगर आप बिना दुआ पढ़े अंदर और बाहर जाते हैं तो आपको हरगिज़ सवाब नहीं मिलेगा. 

और कुछ लोगों का यहां भी एक सवाल होता है कि क्या नमाज पढ़ने के सामने मिलेगा. इसका जवाब है जी नहीं आप को नमाज पढ़ने का सवाब तो बेशक मिलेगा. लेकिन आपको masjid me dakhil hone ki dua aur masjid se bahar nikalne ki dua ना पढ़ने का सवाब नहीं मिलेगा. 

और आपको एक बात और बता दें कि; kya masajid se bahar nikalne ki dua aur masjid me dakhil hone ki dua ना पढ़ने से गुनाह मिलता है. तो चले इसे भी जान लेते हैं.

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Kya masjid se bahar nikalne aur masjid me dakhil hone ki dua ना पढ़ने से गुनाह मिलता है? 

मैंने आपको ऊपर ही बता दिया था कि; आपको दुआ ना पढ़ने का सवाब नहीं मिलेगा. और आपको ये भी बता दें कि मस्जिद से बाहर निकलने की दुआ और मस्जिद में दाखिल होने की दुआ ना पढ़कर आप गुनाह का काम तो नहीं कर रहे हैं लेकिन आप सवाब का काम भी नहीं कर रहे हैं. 

तो आपको सीधा-सीधा जवाब बता दें कि; आपको दुआ ना पढ़ने का कोई गुनाह नहीं मिलेगा. बस आपको ध्यान रखना है कि आप जब भी मस्जिद जाएं या मस्जिद से बाहर निकले तो दुआ जरूर पढ़ ले. आपको इसका सवाब भी मिलेगा. 

उम्मीद करते हैं आपको आपका जवाब मिल गया होगा. 

तो चलिए अब बिना देरी के शुरू करते हैं masjid me dakhil hone ki dua se. 

Masjid me dakhil hone ki dua

तो दोस्तों अब हम आपको बताने जा रहे हैं masjid me dakhil hone ki dua. दोस्तों इसका मतलब यह है कि आप जब भी मस्जिद में दाखिल हो तब आपको यह दुआ पढ़नी है. 

Masjid me dakhil hone ki dua in arabic text 

اللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ 

दोस्तों जो ऊपर लिखा हुआ है वहीं मस्जिद में दाखिल होने की दुआ है अरबी में. अगर आपको अरबी नहीं पढ़ने आती तो आप जरूर से सीख लें; नहीं तो नीचे masjid me dakhil hone ki dua in hindi भी है. 

दोस्तों एक बात याद रखियेगा की मस्जिद में दाखिल होने की दुआ सिर्फ एक ही नहीं है. आपको कई सारी दुआएं मिल जाएंगे मस्जिद में दाखिल होने से जुड़ी. लेकिन हम आपको सबसे आसान और छोटी दुआ बता रहे हैं. 

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Masjid me dakhil hone ki dua in hindi 

दोस्तों हममे से बहुत लोग आज भी अरबी पढ़ना नहीं जानते हैं. जो कि हमारी बहुत बड़ी गलती है और इसका गुनाह भी मिलता है. 

आप जरूर से अरबी पढ़ना सीख ले और अगर आपको अभी नहीं आती तो आप नीचे लिखी Masjid me jaane ki dua in hindi में भी पढ़ सकते हैं. 

”अल्लाहुम् मफ तह्ली अब्वाबा रह्मतिका।” 

दोस्तों जो मैंने अभी ऊपर लिखा है वह Masjid me dakhil hone ki dua in hindi hai. जिसे आप पढ़ सकते हैं मजे में दाखिल होते वक्त. 

दोस्तों अब चलिए इसका तर्जुमा भी जान लेते हैं.

Masjid me dakhil hone ki dua ka tarjuma (meaning in hindi) 

”अल्लाहुम् मफ तह्ली अब्वाबा रह्मतिका।” का मतलब यह है:- 

“या अल्लाह मेरे लिए अपनी रहमत का दरवाजा खोल दे” 

तो दोस्तों यहां तक हमने जाना की मस्जिद में दाखिल होने की दुआ क्या है. और हमने साथ-साथ मस्जिद में दाखिल होने की दुआ अरबी और हिंदी मतलब भी जाना. 

चलिए अब हम masjid se bahar nikalne ki dua भी जान लेते हैं.

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Masjid se bahar nikalne ki dua

दोस्तों आप मस्जिद के अंदर जाते वक्त मस्जिद में दाखिल होने की दुआ तो पढ़ लिए होंगे. और सवाब भी हासिल कर लियें. और जब अंदर गए हैं तो बाहर भी आएंगे मस्जिद के. 

तो इसलिए अब आप masjid se bahar nikalne ki dua पढ़नी होगी. और आपको यह दुआ पढ़ने का सवाब अलग से मिलेगा. क्योंकि आपने मस्जिद से बाहर निकलने की दुआ पढ़ा है और साथ ही साथ दाखिल होने की दुआ भी पढ़ा है. 

तो चलिए ज्यादा देरी ना करते masjid se bahar nikalne ki dua भी देख लेते हैं. 

Masjid se bahar nikalne ki dua in arabic text

आप जब मस्जिद से बाहर निकले तब नीचे लिखी हुई दुआ को पढ़ें. 

اللهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ

तो दोस्ती ये थी हमारी Masjid se bahar nikalne ki dua in arabic text 

अब हम जानेंगे masjid se bahar nikalne ki dua in hindi text. 

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Masjid se bahar nikalne ki dua in hindi

अगर आप मस्जिद से बाहर निकलने की दुआ हिंदी में जानना चाहते हैं; तो वह नीचे लिखी हुई है. अगर आपको अरबी नहीं आती तो आप इसे भी देख कर पढ़ सकते हैं.

पर मैं एक बात फिर दोहराना चाहूंगा कि अगर आपको अरबी नहीं आती है; तो आप जरूर से अरबी सीखने क्योंकि अरबी सीखने का भी सवाब मिलता है. और यह भी जान लेकर बिना सीखने का अज़ाब भी मिलता है. 

ऐसा इसलिए क्योंकि यह अल्लाह से बात करने की जुबान है. तो चलिए इन सब को बाजू में रखकर masjid se bahar nikalne ki dua in hindi जान लेते हैं. 

“अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका मिन-फज़लिक”

ऊपर मस्जिद से बाहर निकलने की दुआ है; आप जब मस्जिद से बाहर निकले तो ये दुआ पढ़ लें. 

अब चलिए जान लेते हैं masjid se bahar nikalne ki dua meaning in hindi. 

Masjid se bahar nikalne ki dua meaning in hindi

मैंने आपको बोला कि आप को मुझे से बाहर निकलने की दुआ पढ़नी है. यह बनता है कि आप दुआ का मतलब भी जाने. 

मेरे कहने का मतलब है कि आपको ये भी पता होना चाहिए कि आखिर क्या है Masjid se bahar nikalne ki dua meaning in hindi. 

तो चलिए आपको ये भी बताते हैं. 

इसका मतलब ये है:- 

“हे अल्लाह मैं आपसे, फ़ज़ल और बरकात मांगता हूँ।” 

तो दोस्तों यह है मस्जिद से बाहर निकलने की दुआ का मतलब. उम्मीद करते हैं कि आपको सब अच्छे से समझ में आया होगा. 


अल्लाह-त-आला से दुआ है कि वह हमें पढ़ने, लिखेंगे, सुनने से ज्यादा अमाल करने की तौफीक अता फरमाए. अमीन-सुम्मा-आमीन

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नतीज़ा (conclusion) 

दोस्तों तो आज हमने जाना है कि मस्जिद तो हर मुस्लमान जाता है; और हर कोई नमाज पढ़ने जाता है उसका सवाब लेने; लेकिन एक जगह कई लोग चूक जाते हैं सवाब लेने से. 

और वो जगह है; Masjid me dakhil hone ki dua aur masjid se bahar nikalne ki dua पढ़ने से. यानी कि वो ये दुआएँ नहीं पढ़ते; जिसकी वजह से वो सवाब से मरहूम हो जाते हैं. 

तो इसलिए हमने masjid me dakhil hone ki dua aur masjid se bahar nikalne ki dua को पढ़ना चाहिए; और हमने इसे इस POST मे पूरी तफ़सील (Detail) से बाताया है; और हमने नीचे लिखे सभी चीज़ों को शामिल किया है. 

  • पहला, Masjid se bahar nikalne ki dua in hindi 
  • दूसरा, Masajid me dakhil hone ki dua in hindi 
  • तीसरा, इन सभी को अरबी में और इनके हिन्दी माने (तर्जुमा) भी तफ़सील से बताया है. 

दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी यह POST काफी पसंद आई होगी; और अगर पसंद आई है तो इसे अपने तमाम दोस्तों, रिश्तेदारों, मे SHARE करें; और सभी को इन सब की जानकारी दें. 

और हमारे इस WEBSITE को BOOKMARK कर ले ताकि आपको हर रोज इस्लाम से जुड़ी सही जानकारी मिल सके. 

अल्लाह हाफिज!!!!! 

quransays.in 

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