मंज़िल दुआ।

अस्सलामु अलैकुम !!! 

दोस्तों हम आपका तहे दिल से इस्तक़बाल करते हैं हमारे इस blog quransays.in पर। 

नाज़रिन् आज की इस पोस्ट में हम आपको manzil dua in hindi के बारे में बताएंगे, और इसे कब पढ़ा जाता है, इसके फायदे और बहुत कुछ। 

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तो दोस्तों अगर आप चाहते हैं, की हर मुसलमान शख्स को इस्लाम और इस्लाम के बारे में पूरी मलूमात हो तो इस पोस्ट को आप अपने तमाम मुसलमान भाइयों और अपने परिवार के साथ share करें। 

तो चलिए शुरू करते हैं, आज की पोस्ट manzil dua in hindi। 

Manzil dua in hindi kya hai (मंज़िल दुआ क्या है?)

Manzil dua क़ुरान मजिद की 33 आयतों को मिलाकर पढ़ी जाती है, इस दुआ को पढ़ने की बहुत सी फ़ज़ीलतें हैं, जिन्हें हम आगे जानेंगे। 

मंज़िल दुआ के बारे में पूरी जानकारी आपको जाननी है, तो आप हमारे साथ बने रहे और पढ़ते रहें। 

Manzil dua in Arabic.

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Manzil dua in hindi

अऊज़ो बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम, बिस्मिल्ला हिर्रहमान निर्रहीम

1. अल्हम्दु लिल्लाहे रब्बिल आलमीन,

अर्रहमान निर्रहीम,मालिके यौमिद्दीन,

इय्याका नअबुदु वइय्याका नस्तईन,

इहदिनस सिरातल मुस्तक़ीम,

सिरातल लज़ीना अनअम्ता अलैहिम गै़रिल मग़दूबे अलैहिम वलद दॉल्लीन 

2. अलीफ लाम मीम

जालिकल किताबु ला रैबा फी हुदल लील मुत्तकीन। 

अल्लजिन यु मीनूना बिल गैबी व युकिमुनस सलाता व मिम्मा रज़क नाहुम युनफीकुन। 

वल लजीना यु मीनूना बीमा उन्जिला इलैका वमा उन्जिला मीन कब्लिक व बिल अखिरति हम युकीनून। 

उला इका आला हुदम्मीरराबबिहिम, व उलाइका हुमूल मुफ़लिहून।

3. व इला हुकुम इलाहुव वाहीद ला इलाहा इल्ला हुवर रहमान नूर रहीम। अल्लाहु ला इलाहा इलल्लाहू अल हैयूल कयुम लता खुजुहू सिनातउ वलावला नौम् लहू मा फीस समा वाती वमा फिल अर्ज़ मन जल लज़ी यश फउउ इंदहु इला बीइज़्निहि या लमु मा बयना अयदि हिम वमा खल फहुम वला यूहितून बिषय ईम मिन इलल्मिही इला बीमा शा आ वसीआ कुर्सियु हुस् ,

4. समवाती वल अर्ज़ वला यऊ दुहु हिफज्युहुमा वाहुवल् अलियुल अज़ीम। ला इकरहा फिद दिनी कत तबैयनर रुशदू मिनल गय्यि फमय यकफुर बीत तागुती व युअ मिल बिल लाही फ कदिस तम्सका बिल उर्वतिल वूसका लन फीसामा लहा वल लाहु समीउन अलीम। अल्लाहु वलीयुल लज़ीना आमनु युख रीजुहूम मिनज़ ज़ूलूमाती इलन नूरनूर, वल लज़ीना

5, कफरू औलिया उहुमुत् लागूतु युख रिजऊनुहुम मिनन नूरी इलज़ ज़ुलुमात् उलाइका अस हाबुन् नारी हम फीहा खलीदून। लील लाही मा फीस समवाती वमा फिल अर्ज़ी, व इन तुब्दु माफ़ी अन्फूसिकुम् अव तुखफूहू युहसिबकुम् बिहिल लाह फ्यगफिरू लिमय यशाऊ व यूअज्जीबु मय यशाअ वल लाहु अला कुल्ली शय इन कदीर। आमनर रसुलु बीमा उन्ज़िला

6, इलैही मीर रब्बीही वल यूअ मीनून कुल्लून आमना बिल लाही व मला इकातीही व कुतुबीही व रूसुलीही ला नुफ़रिकु बैना अहदीम मीर रूसुलीह व कालू समी आ’ ना व अतआ’ न गुफरानका रब्बना व इलैकल मसीर | ला यूकल्लीफूल लहू नफसन ईल्ला वुसअहा लहा मा कसबत व अलैहा मक तसबत, रब्बना ला तूआखीजना ईन नसीना अव अख्तअ’ ना रब्बना वला तहमिल

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7. अलैना इसरन कमा हमलतहू अलल लज़ीना मिन ने कबलीना, रब्बना वला तूहुम्मिलना माला ताकता लना बिह, व अफु अन्ना वगफीर लना वरहमना, अंता मौलाना, फंसूरना अलल कौमिल काफिरिन। शहीदल लाहू अन्नहू ला इलाहा इल्ला हुवा वल मलाइकतू व उलूल इल्मी क्राइमम बिल क़िस्त, ला इलाहा इल्ला हुवल अज़ीज़ुल हकीम।  कुलील ला हुम्मा मालिकल

8. मुल्की तुअ तिल मुलका मन तशाउ व तुजिल्लु मन तशाउ बियदिकल खैर इन्नका अला कुल्ली शैइन क़दीर। तुलीजुल लैला फिन नहारी व तुलिजुना नहारा फ़िल लैला, तुखरिजुना हय्या मिनल मय्यिति व तुखरिजुल मय्यिता मिनल ह्यय, व तरजुकु मन तशाउ बीगैरी हिसाब। 

9. इन्ना रब्बुकुमुल लाहुल लज़ी ख़ताकास समावाती वल अर्ज़ फ़ी सित्तती अय्यामिन सुम्मस तवा अलल अर्श, युगशील लैलन नहार, यल्लुबूहुल हसिसव वश शमसा वल कमर वन नुज़ूमा मुसख खरातिम बिअम रीह अला लहुल खलकु वल अमरु तबारकल लाहू रब्बुल आलमीन उदउ रब्बकुम तदर रुअव व खुफयह, इन्नल लाहा ला युहीब्बुल मुअ’ दिन

10. वला तुफसिदु फिर अर्ज़ी बीअ’दा इस्लाहीहा वदउहु ख़ौफ़व व तमअ इन्ना रहमतल लाही क़रीबूम मीनल मुहसिनीन।  कुलीदहूल लाहा अविदउर रहमान , अय्याम मा तदऊ फलहुल असमा उल हुसना , वला तजहर बिसलातिका वला तुखहाफित बिहा वब्बतगी बैना जालिका सबीला ।वकुलील हम्दु लील लाहील लजी लम यत तखिज वलदव

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11. वलम यकूल लहू शरिक़ून फ़िल मुल्कि वलम याकुल लहू वलिययुम मिनज जुल्ली वकबबिरहु तक्बीरा। अफ़ा  हुसिब्तुम अन्नमा खलवनकुम अबसाव व अन्नकुम इलैना ला तुरजउन, फतआलल लाहुल मलिकुल हक्कू ला इलाहा इल्ला हुवा रब्बुल अर्शिल करीम, वमै यदउ मअल लाही इलाहन आखरा ला बुरहाना लहू बिह, फ इन्नमा हिसाबुहु इन्दा रब्बीही,

12. इन्नहू ला यूफ्लिहुल काफ़िरून, व कुररब्बिग फिर वरहम  अंता खैरूर रहीमीन। वस साफ़्फ़ाति सफ़्फ़ा, फ़ज़ जाज़िराती ज़ज़रा, फत तालियाति ज़िकरा, इन्ना इलाहुकुम लवाहिद, रब्बूस समावाती वल अर्ज़ी वमा बैनहुम व रब्बुल मशारिक इन्ना जययन नस समाअद दुनिया बिजिन्नातिनिल कवाकिब, व हिफ्ज़म

13. मिन कुल्ली शैतानीम मरीद, ला यस सम मऊना इलल म लइल अअ’ ला व यूकजफूना मिन कुल्ली जानिब, दुहरौ व लहुम अज़ाबुव वासिब, इल्ला मन खतिफल खतफता फअत बअहु शिहाबुन साक़िब, फ़सतफ तिहीम अहुम अशदु खलकन अम्मन खलकनआ इन्ना खलवनहुम मिन तिनिल लाज़िब। या मअ’शरल जिन्नि वल इंसी इनिस त तअ’तुम अन

14. तन्फुज़ू मिन अक तारिस समावाती वल अर्ज़ी फंफुजू ला तनफुजूना इल्ला बिसूल तान। फ़बी अययी आलाई रब्बिकुमा तुकज जिबान।  यूरसलु अलैकुमा शुवाजुम मिन नारीव व नुहासून फला तन तसिरान। फ़बी अययी आलाई रब्बिकुमा तुकज जिबान। फ़इजन शक़ कतिस समाउ फकानत वर दतन कद दिहान। फ़बी अययी आलाई रब्बिकुमा तुकज जिबान।  

15. फयौम इज़ील ला युसअलु अन ज़म्बिही इनसुव वला जान। फ़बी अययी आलाई रब्बिकुमा तुकज जिबान।  लौ अनज़लना हाज़ल क़ुरआना अला जबलील लरएतहु ख़शिअम मुतसद दिअम मिन खश यतील लाह, व तिलकल अमसालू नदरिबुहा लीन नासि ल अल्ल्हूम य तफक करुन। हुवल लाहुल लज़ी ला इलाहा इल्ला हू, आलिमुल गैबी वश शहादती हूवर रहमानुर रहीम। 

16. हुवल लाहुल लज़ी ला इलाहा इल्ला हु, अल मलिकुल कुद्दुसूस सलामुल मुअ’मीनुल मुहैमिनुल अज़ीज़ुल ज़ब्बारुल मुतकब्बिर, सुब्हानल लाही अम्मा युशरिक़ून। हुवल लाहुल खलीकुल बारिउल मुसव्विरु लहुल असमाउल हुस्ना युसब्बिहु लहू माफिस समवाती वल अर्ज़ वहुवल अज़ीज़ुल हकीम। 

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17. कुल ऊहिया इलैहा अन नहुस तमआ नफरूम मिनल जिन्नि फकालु इन्ना समि’अना कुर आनन अजबा। यहदि इलर रुश्दी फ़ आमन्ना बिह, वलन नुशरिका बिरब बिना अहदा। व अन्नहू तआला जद्दु रब्बिना मत तखज़ा साहिबतौ वला वल्दा। व अन्नहू काना यकूलू सफ़िहुना अलल लाही शताता। 

18. कुल या अय्युहल काफ़िरून

ला अअ्बुदु मा तअ्बुदून

व ला अन्तुम् आ़बिदू-न मा अअ्बुद

व ला अ-न आ़बिदुम् मा अ़बत्तुम्

व ला अन्तुम् आ़बिदू-न मा अअ्बुद 

लकुम् दीनुकुम् व लि-य दीन 

19. कुल् हुवल्लाहु अ-हद 

अल्लाहुस् समद् 

लम् यलिद् व लम् यूलद् 

व लम् यकुल्-लहू कुफुवन् अ-हद

20, 

20. कुल आ ऊजू बिरब्बिल फलक

मिन शर्री मा खलक़

वा मिन शर्री गासिकिन इजा वकब

वा मिन शर्रीन नाफ्फासाती फिल उकद

वा मिन शर्री हसिदिन इज़ा हसद

21. कुल आउज़ू बी रब्बिन्नास

मलिकिन- नास

इलाहिन- नास

मिन शर्रिल वास्वसिल खन्नास

अल- लजी युवास्विसू फी सुदुरिन्नास

मीनल जिन्नती वन्नास

Manzil dua kyun padhi jati hai (मंज़िल दुआ क्यों पढ़ी जाती है?)

Manzil dua (मंज़िल दुआ।) को हीफाजत के लिए पढ़ा जाता है, manzil dua (मंज़िल दुआ।) को बुरी नज़र, काला ज़दू, जीन्नातों और दूसरे खतरों से हीफाजत के लिए पढ़ा जाता हैं। अगर कोई शख्स बीमार हो या उसके ज़ेहन में बुरे खयालात आते हों तो इस दुआ को पढ़ा जा सकता है।

मंज़िल दुआ पढ़ने के फायदे।(manzil dua padhne ke fayde)

मंज़िल दुआ पढ़ने के बहुत सी फ़ज़िलतें हैं, आईये तो अब हम मंज़िल दुआ की फ़ज़िलतें देख लेते हैं।

मंज़िल दुआ को आप कभी भी पढ़ सकते हैं, क्यूंकि यह क़ुरान मजीद की आयत है, तो इसे आप रोज़ सुबह या शाम को पढ़ लिया करें इससे आपको बहुत फायदा होगा इंशाअल्लाह।

इस दुआ को पढ़ने से आप दिनभर सभी बुरी नज़रों से महफूज़ रहेंगे।

1. manzil dua for protection (हिफाज़त के लिए मंज़िल दुआ।)

इस दुआ की फ़ज़ीलत से, जब आप घर से निकलने से पहले इस दुआ को पढ़ लेंगे, तो इंशाअल्लाह आप पुरे दिन हर तरह के खतरों महफूज़ रहेंगे।

इस दुआ को पढ़ने से आप हर तरह के मुसीबतों से महफूज़ रहेंगे चाहे वो कितनी ही बड़ी मुश्किल हो, अगर आप इस दुआ को सच्चे मन से और अल्लाह पर सच्चा ईमान रखकर पढ़ेंगे तो तमाम मुश्किलातों से बाहर निकल जायेंगे और महफूज़ रहेंगे।

मंज़िल दुआ को पढ़ने से आप हर तरह की बीमारी, बुरी आदतों, बुरे खयालातों से और हर तरह के जादू टोने से महफूज़ रहेंगे।

2. manzil dua for protection from evil eye (मंज़िल दुआ बुरी नज़र से बचाने के लिए।)

बुरी नज़र किसी को कब लग जाये आज के ज़माने में बताना मुश्किल नहीं, क्यूंकि आज कल के समय में इंसान इतना अँधा हो गया है, की किसी की तरक्की से उसे जलन होती है और उसे बुरी नज़र से देखता है, चाहे वह पैसों के लिए, या गाड़ी के लिए, या घर को देख कर दूसरों से जलता है।

आप लोगों ने यह महसूस किया होगा या आपको याद होगा की जब हम छोटे थे तो हमारे अम्मी और दादी हमें काला टिका लगाती थी या ताबीज़ पहनाती थी वो सब बुरी नज़रों से हमे बचाने के लिए किया करती थी।

और हाँ हो सकता है की, जो ताबीज़ हम पहना करते थे या हैं भी उसमें मंज़िल दुआ लिखी हो, क्यूंकि मंज़िल दुआ को पढ़ने से हम बुरी नज़रों से हर तरह से महफूज़ रहते हैं।

क्यूंकि मंज़िल दुआ में हम 4 qul भी पढ़ते हैं, और हम सब जानते हैं की 4 qul को पढ़ने से हम बुरी नज़रों, काला जादू, शिर्क, बुरी आदतों से महफूज़ रहते हैं, और अगर आप चारों कुल के बारे में पूरी जानकारी पाना चाहते हैं तोह इस पर click करें।

3. manzil dua for marriage problems (शादी की परेशानियों से बाहर निकलने के लिए दुआ।)

हर दूसरे शख्स के घर में शादी से जुडी परेशानियां होती ही हैं चाहे वो किसी भी तरह की हो, जैसे घर में झगड़ा होना, मिया बीवी का साथ न होना या शादी ही न होना, शादी के लिए लड़का या लड़की पसंद न होना या पैसों की दिक्कत, शादी लग लग कर टूट जाना या कुछ और परेशानियां।

ऊपर लिखी गयी परेशानियों के होने का मतलब यह भी हो सकता है की इन सब की वजह काला जादू हो या किसी ने काला जादू शादी पर किया हो।

अगर ऐसा है तो आप इस दुआ (manzil dua) को हर रोज़ सच्चे मन से दुआ पढ़ें और अल्लाह तबारक व तआला से अपनी परेशानी को दूर करने के लिए दुआ मांगे इंशाअल्लाह आपकी पदेशानियाँ जल्दी दूर हो जाएँगी, अल्लाह ने चाहा तो।

manzil dua kab padhein? (मंज़िल दुआ कब पढ़ें।)

इस दुआ को आप जब चाहे तब पढ़ सकते हैं, क्यूंकि यह क़ुरान की 33 आयत में से है, और क़ुरान शरीफ को पढ़ने का कोई एक समय नहीं होता आप जब चाहे तब पढ़ सकते हैं, हाँ अगर आपको सही वक़्त या यूँ कहे कब पढ़ें, तोआप इस दुआ को सुबह या शाम या दोनों ही वक़्त पढ़ सकते हैं।

तो चलिए अब इस दुआ को पढ़ने का तरीका भी जान लेते हैं।

Manzil dua english transliteration

Aouzo billahi minash shaitanir razim, Bismillah Hirrahman Nirrahim

1. Alhamdu Lillahe Rabbeel Alameen,
Arrahman Nirrahim, owner Yaumiddin,
Iyyaka naabudu vaiyyaka nastain,
Ihdinas Siratal Mustaqeem,
Siratal Lazina Anamta Alaihim Garil Magdube Alaihim Wald Dollin

2. alif lam meem
Jalikal Kitabu La Raiba Fe Hudl Lil Muttkin.
Allajin Yu Minuna Bill Gabi and Yukimunas Salata and Mimma Razak Nahum Yunfikun.
Val Lajina Yu Meenuna Bima Unjila Ilaika Vama Unjila Meen Kablik and Bill Akhirati Hum Yukinoon.
Ula Ika Aala Hudmmirrabbihim, and Ulaika Humul Muflihun.

3. Wa ilaahukum illaahunw waahid, laaa ilaaha illaa Huwar Rahmaanur Raheem, Allahu laaa ilaaha illaa Huwal Haiyul Qaiyoom; laa taakhuzuhoo sinatunw wa laa nawm, lahoo maa fissamaawaati wa maa fil ard; man zal lazee yashfa’u indahooo illaa bi-iznih, ya’lamu maa baina aydeehim wa maa khalfahum wa laa yuheetoona bishai’im min ‘ilmihee illaa bimaa shaaa, wasi’a Kursiyyuhus,

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4. samaawaati wal arda wa laa ya’ooduho hifzuhumaa; wa Huwal Aliyyul ‘Azeem, Laaa ikraaha fid deeni qat tabiyanar rushdu minal ghayyi, famai yakfur bit Taaghooti wa yu’mim billaahi faqadis tamsaka bil’urwatil wusqaa lan fisaama lahaa, famai yakfur bit Taaghooti wa yu’mim billaahi faqadis tamsaka bil’urwatil wusqaa lan fisaama lahaa, wallaahu Samee’un ‘Aleem Allaahu waliyyul lazeena aamanoo yukhrijuhum minaz zulumaati ilan noori wallazeena,

5. kafarooo awliyaaa’uhumut Taaghootu yukhrijoonahum minan noori ilaz zulumaat, ulaaa’ika Ashaabun Naari hum feehaa khaalidoon, Lillaahi maa fissamaawaati wa maa fil ard, wa in tubdoo maa feee anfusikum aw tukhfoohu yuhaasibkum bihil laa, fayaghfiru li mai yashaaa’u wa yu’azzibu mai yashaaa u;wallaahu ‘alaa kulli shai in qadeer, Aamanar-Rasoolu bimaaa unzila,

6. ilaihi mir-Rabbihee walmu’minoon, kullun aamana billaahi wa Malaaa’ikathihee wa Kutubhihee wa Rusulih, laa nufarriqu baina ahadim-mir-Rusulihee wa qaaloo sami’naa wa ata’naa ghufraanaka Rabbanaa wa ilaikal-maseer, Laa yukalliful-laahu nafsan illaa wus’ahaa; lahaa maa kasabat wa ‘alaihaa maktasabat,   Rabbanaa la tu’aakhiznaa in naseenaaa aw akhtaanaa, Rabbanaa wa laa tahmil,

7. alainaaa isran kamaa hamaltahoo ‘alal-lazeena min qablinaa, Rabbanaa wa laa tuhammilnaa maa laa taaqata lanaa bih, wa’fu ‘annaa waghfir lanaa warhamnaa, Anta mawlaanaa fansurnaa ‘alal qawmil kaafireen, Shahidal laahu annahoo laa ilaaha illaa Huwa walmalaaa’ikatu wa ulul ‘ilmi qaaa’imam bilqist, laaa ilaaha illaa Huwal ‘Azeezul Hakeem. Qulil laahumma Maalikal 

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8. Mulki tu’til mulka man tashaaa’u, wa tanzi’ulmulka mimman tashhaaa’u wa tu’izzu man tashaaa’u, wa tuzillu man tashaaa’u biyadikal khairu innaka ‘alaa kulli shai’in Qadeer. Toolijul laila fin nahaari wa toolijun nahaara fil  laili, wa tukhrijul haiya minalmaiyiti wa tukhrijulo, maiyita minal haiyi wa tarzuqu man tashaaa’u bighari hisab.

9. Inna Rabbakkumul laahul lazee khalaqas sammaawaati wal arda, fee sittati ayyaamin summmas tawaa ‘alal ‘arshi, yughshil lailan nahaara yatlu buhoo haseesanw washshamsa, walqamara wannujooma musakhkharaatim bi amrih,   alaa lahul khalqu wal-amr; tabaarakal laahu Rabbul ‘aalameen, Ud’oo Rabbakum tadarru’anw wa khufyah; innahoo laa yuhibbul mu’tadeen.

10. Wa laa tufsidoo fil ardi ba’da islaahihaa wad’oohu khawfanw wa tama’aa, inna rahmatal laahi qareebum minal muhsineen, Qulid’ul laaha awid’ur Rahmaana ayyam maa tad’oo falahul asmaaa’ul Husnaa, wa laa tajhar bi Salaatika wa laa tukhaafit bihaa wabtaghi baina zaalika sabeela, Wa qulil hamdu lillaahil lazee lam yattakhiz waladanw.

11. wa lam yakul lahoo shareekun fil mulki wa lam yakul lahoo, waliyyum minaz zulli wa kabbirhu takbeeraa, Afahsibtum annamaa khalaqnaakum ‘abasanw wa annakum ilainaa laa turja’oon, Fata’aalal laahul Malikul Haqq; laaa ilaaha illaa Huwa Rabbul ‘Arshil Kareem, Wa mai yad’u ma’allaahi ilaahan aakhara laa burhaana lahoo bihee fa innnamaa hisaabuhoo ‘inda Rabbih,

12. innahoo laa yuflihul kaafiroon, Wa qur Rabbigh fir warham wa Anta khairur raahimeen, Wassaaaffaati saffaa, Fazzaajiraati zajraa, Fattaaliyaati Zikra, Inna Illaahakum la Waahid, Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa wa Rabbul mashaariq, Innaa zaiyannas samaaa ‘ad dunyaa bizeenatinil kawaakib, Wa hifzam,

13. min kulli Shaitaanim maarid, Laa yassamma ‘oona ilal mala il a’alaa wa yuqzafoona min kulli jaanib, Duhooranw wa lahum ‘azaabunw waasib, Illaa man khatifal khatfata fa atba’ahoo shihaabun saaqib, Fastaftihim ahum ashaddu khalqan am man khalaqnaa; innaa khalaqnaahum min teenil laazib, Yaa ma’sharal jinni wal insi inis tata’tum an,

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14. tanfuzoo min aqtaaris samaawaati wal ardi fanfuzoo, laa tanfuzoona illaa bisultaan, Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan, Yursalu ‘alaikumaa shuwaazum min naarifiw-wa nuhaasun falaa tantasiraan, Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan, Fa-izan shaqqatis samaaa’u fakaanat wardatan kaddihaan, Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
     

15. Fa-yawma’izil laa yus’alu ‘an zambiheee insunw wa laa jaann, Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan, Law anzalnaa haazal quraana ‘alaa jabilil lara aytahoo khaashi’am muta saddi’am min khashiyatil laah, wa tilkal amsaalu nadribuhaa linnaasi la’allahum yatafakkaroon, Huwal-laahul-lazee laaa Ilaaha illaa Huwa ‘Aalimul Ghaibi wash-shahaada; Huwar Rahmaanur-Raheem.

16. Huwal-laahul-lazee laaa Ilaaha illaa Huwal-Malikul, Quddoosus-Salaamul Muminul Muhaiminul-‘aAzeezul Jabbaarul-Mutakabbir, Subhaanal laahi ‘Ammaa yushrikoon, Huwal Laahul Khaaliqul Baari ‘ul Musawwir; lahul Asmaaa’ul Husnaa, yusabbihu lahoo maa fis samaawaati wal ardi wa Huwal ‘Azeezul Hakeem.
 

17. Qul oohiya ilaiya annna hustama’a nafarum minal jinnni faqaalooo innaa sami’naa quraanan ‘ajabaa, Yahdeee ilar rushdi fa aamannaa bihee wa lan nushrika bi rabbinaaa ahadaa, Wa annahoo Ta’aalaa jaddu Rabbinaa mat takhaza saahibatanw wa la waladaa, Wa annahoo kaana yaqoolu safeehunaa ‘alal laahi shatataa.

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

18. qul ya ayyuhal kafirun

la’a budu mata budun

wala antum abidna ma’a bud

wala ana abidum ma’ abattum

wala antum abidna ma’a bud

lakum dinakum wali yadeen

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

19. kul hoval lahu ahad

allah hus samad

lam yallid walam yulad

walam yakul lahu

kufuvan ahad

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

20. qul auju bi rabbil falaq

min sharril maa khalak

wa min sharrill gaasikeen iza wakab

wa min sharri naffashati fil ukad

wa min sharri hasideen iza hasad

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

21. qul auzu bi rabbin nas

maalikin nas

ilaaheen nas

min sharrill waswasill khannass

all lazi uwaswisoo fi sudurinnass

minal zinnati wannass

manzil dua mein kitni ayat hain (मंज़िल दुआ में कितनी आयत हैं?)

इस दुआ (मंज़िल दुआ) क़ुरान पाक की 33 आयतों से मिलकर एक दुआ बनी है, इस दुआ की बहुत फ़ज़िलतें हैं, जो की हमने ऊपर पढ़ ली हैं या जान ली हैं।

मंज़िल दुआ में क़ुरान ए पाक की यह आयतें शामिल है, जिन्हें हमने निचे लिख दिया है।

  • सूरह फातिहा आयत 1 से 7 तक।
  • सूरह बक़रह आयत 1, 5, 163, 255, 257, 284 और 286 तक।
  • सूरह इमरान आयत 18, 26, 27 तक।
  • सूरह आराफ़ आयत 54 से 56 तक।
  • सूरह अल इसराइल आयत 110 से 111 तक।
  • सूरह मुमिनून आयत 115 से 118 तक।
  • सूरह सफ्फात आयत 1 से 11 तक।
  • सूरह रहमान आयत 33 से 40 तक।
  • सूरह हस्र आयत 21 से 24 तक।
  • सूरह जिन आयत 1 से 4 तक।
  • सूरह काफ़िरून आयत 1 से 6 तक।
  • सूरह इखलास आयत 1 से 4 तक।
  • सूरह फलक आयत 1 से 5 तक।
  • सूरह नास आयत 1 से 6 तक।

FAQs

मंज़िल दुआ में कितनी आयत हैं ?

मंज़िल दुआ में 33 आयत हैं।

मंज़िल दुआ में कितनी सूरह की आयतें हैं ?

मंज़िल दुआ में 14 सूरह की आयतें शामिल हैं. हमने सभी सूरह के नाम और उनकी आयतें ऊपर लिखी हैं।

मंज़िल दुआ कब पढ़ सकते हैं ?

मंज़िल दुआ को आप सुबह शाम या दोनों ही वक़्त पढ़ सकते हैं, इसकी बहुत फ़ज़ीलत है।

मंज़िल दुआ पढ़ने के फायदे ?

मंज़िल दुआ को पढ़ने के बहुत से फायदे हैं, हमने ऊपर पोस्ट में अच्छे से बताया है।

मंज़िल दुआ इमेज (image).

मंज़िल दुआ बड़ी दुआ है, और हर किसी को इसे याद करने में दिक्कत होती है, इसलिए हमने manzil dua की इमेज भी इस पोस्ट में डाली हैं, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।

तो दोस्तों ये थी हमारी आज की पोस्ट, इस पोस्ट में हमने मंज़िल दुआ के बारे में जाना और समझा, हमने मंज़िल दुआ की फ़ज़िलतें देखि, manzil dua in hindi देखा और बहुत कुछ।

दोस्तों मंजिल दुआ को आप रोज़ सुबह को या शाम को पढ़ सकते हैं, इस दुआ को पढ़ने से आप हर तरह के काला जादू, बुरी नज़रों, शैतान से बचे रहते हैं। इस पोस्ट में हमने image भी डाली है, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं, क्यूंकि manzil dua बड़ी दुआ है और इसे याद करना बहुतों के लिए कठिन है, अगर आपके पास इस दुआ की इमेज होगी तो इसे पढ़ना आपके लिए आसान होगा, नहीं तो आप इसे याद भी कर सकते हैं।

अल्लाह ताआला हमें कहने, सुनने या पढ़ने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए। इंशाअल्लाह !!!

अल्लाह हाफिज !!!
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