Magrib ki namaz ka tarika

Magrib ki namaz ka tarika एक ऐसा टॉपिक है जो अधिकतर लोगों को कंफ्यूज कर देता है।

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इन पर लोगों को कन्फ्यूजन रहती है क्योंकि दोस्तों माधुरी की ही पांच वक्त नमाज ओं में से एक ऐसी नमाज है जहां पर आदान होते ही नमाज पढ़ने का हुक्म दिया गया है।

हम आपको आज की इस पोस्ट में तमाम जानकारी मगरिब की नमाज का तरीका से रिलेटेड दे देंगे।

और आपको बता दें मगरिब की नमाज की फजीलत भी बहुत होती है; यूं तो हर नमाज की फजीलत बहुत ज्यादा है।

लेकिन मगरिब की नमाज को हम लोगों को बचपन से ही बताया गया है, कि बहुत ही अफजल नमाज है।

आप लोगों को याद होगा जब हम बच्चे थे और हम जब सो जाते थे; तो मगरीब से पहले हमारी मम्मी हमें उठा दिया करती थी बोलती थी कि मगरिब के वक्त नहीं सोना चाहिए।

दोस्तों इस से हमें यह पता चलता है कि मगरिब की नमाज कितनी अफजल नमाज होती है; आइए हम जानते हैं magrib ki namaz ki rakat.

Magrib ki namaz ki rakat (magrib ki namaz ki rakat kitni hoti hai)

दोस्तों आपको बता दें मगरिब की नमाज में 7 रकात नमाज होती है; जिसमें 3 फर्ज, दो सुन्नत और दो नफिल शामिल है।

तीनों नमाज़ों का तरीका अलग अलग होता है। नफिल और सुन्नत नमाज का तरीका तो लगभग एक जैसा ही होता है; लेकिन मगरिब की नमाज में फर्ज नमाज का तरीका अलग होता है।

बताते चलें जितनी भी नमाजें पढ़ने की हमें हुक्म दिया गया है, उनमें से सिर्फ दो ही ऐसी नमाजे हैं ;जिनमें 3 रकात नमाज पढ़ी जाती है।

एक मगरीब की फर्ज नमाज़ है जिसके बारे में आपको आगे बताएंगे कैसे पढ़नी है; और दूसरी वितिर की 3 रकात नमाज होती है।

Magrib ki namaz ka waqt kya hai

मगरिब की नमाज का वक्त शाम का होता है जब सूरज पूरी तरह से डूबने जाता है; तब हम लोग मगरिब की नमाज अदा करते हैं।

गर्मी में मगरिब की नमाज का टाइम थोड़ा लेट होता है मतलब सात 7:15 बजे के आसपास. और सर्दियों में 6:00 बजे के आसपास हो जाता है; मौजूदा वक्त की बात करें तो 6:15 पर नमाज का वक्त है।

दोस्तों यह तो हो गया magrib ki namaz ka waqt kya hai. लेकिन दोस्तों कई लोगों के अंदर एक सवाल होता; है कि Magrib ki namaz ka waqt kab tak rahta hai तो आइए उसे भी जान लेते हैं।

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Magrib ki namaz ka waqt kab tak rahta hai

आपको बता दें मगरिब की अजान होते ही नमाज पढ़नी चाहिए क्योंकि मगरीब की नमाज का वक्त बहुत जल्दी खत्म होता है।

आप लोगों को पता होगा कि जब मगरिब की अजान होती है तब पूरा अंधेरा नहीं होता है। हल्की रोशनी होती है, तो जब तक वह रोशनी है तब तक ही पढ़ लिया जाए तो अच्छा है।

नहीं तो आप की नमाज कज़ा हो जाएगी जब वह रौशनी गायब हो जाती है; तब ईशा का वक्त शुरू होता है और मगरिब का वक्त खत्म हो जाता है।

अगर आप इस रोशनी के रहते रहते नमाज नहीं अदा करेंगे तो आपकी वह नमाज कजा हो जाएगी।

Magrib ki namaz ki niyat (magrib ki namaz ka tarika)

नियत का तरीका बाकी नमाज़ों की तरह ही होता है। जैसे हम फजीर की जोहर की या असर की नमाज़ की नियत करते हैं; ठीक उसी तरह हमें मगरिब की नमाज़ की नियत करनी होती है।

इसमें कोई अंतर नहीं होता है, बस हराकात का और वक्त का अंतर होता है; जिस की मालूमात होनी चाहिए।

किसी भी नमाज में नियत पढ़ना जरूरी है बिना नियत के आप की नमाज शुरू नहीं होगी; और उसका गुनाह भी होता है। तो आप लोगों से गुजारिश है की आप तमाम नमाज़ों की नियत की जानकारी हासिल कर लें।

दोस्तों आपको यह भी बता देते हैं कि सिर्फ नियत नहीं करने से नमाज शुरू नहीं होती है।

ऐसी बहुत सी चीजें हैं अगर हम उन्हें छोड़ देते हैं तो हमारी नमाज शुरू ही नहीं होती; कबूल हो ना तो दूर की बात है जिन्हें हम नमाज की शर्तें कहते हैं।

Magrib ki farz namaz ki niyat (magrib ki namaz ka tarika)

“नियत करता हूं मैं 3 रकात नमाज मगरिब की वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहू अकबर।”

Note – दोस्तों हमने जो आपको ऊपर नियत बताई है. इसे आप तब पढिएगा जब आप नमाज घर में अदा कर रहे हों। अगर आप मस्जिद में नमाज अदा कर रहे हैं तो आप नीचे दी हुई नियत को पढ़ें।

“नियत करता हूं मैं 3 रकात नमाज मगरिब की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इमाम के रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहू अकबर।”

यह हो गई magrib ki 3 rakat farz namaz ki niyat.

Magrib ki sunnat namaz ki niyat (Magrib ki namaz ka tarika)

सुन्नत और नफील की नमाज में आपको पीछे इस इमाम के नहीं बोलना है; क्योंकि इन नमाज़ों को हम खुद पढ़ते हैं ना कि किसी इमाम के द्वारा।

इमाम साहब हमें सिर्फ फर्ज नमाज़ ही पढाते हैं।

” नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज मगरिब की सुन्नत वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

Magrib ki nafil namaz ki niyat (magrib ki namaz ka tarika)

” नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज मगरिब की नफिल वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

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Magrib ki namaz ka tarika

दोस्तों नमाज चाहे कोई भी हो उन सब का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है; सबसे पहले आपको वजू करना होता है।

वजू बनाने का सही तरीका आपको मालूम होना चाहिए क्योंकि बिना वज़ु के नमाज नहीं अदा होती है।

कोई भी नमाज अदा करने से पहले आप नमाज के मकरूहात जान ले क्योंकि नमाज के मसीहा सुबह होते हैं जिनको करने से हमें नमाज के दौरान मना किया गया है।

आपको हम एक और बात बता देते हैं, कि अगर आप चाहते हैं; कि आपको वजू का ज्यादा सवाब मिले तो आप ताहियातुल वज़ु की नमाज अदा कर सकते हैं।

Magrib ki 3 rakat farz namaz ka tarika (magrib ki namaz ka tarika)

फर्ज नमाज अदा करने के लिए आप वजू करके नियत करें नियत कैसे करनी है; हमने आपको बता दिया है।

पहली रकात (magrib ki namaz ka tarika)

नियत करने के बाद आपको सना पढ़ना है सना आपको मन में बनना है; आपको सना पढ़ने में जबान से आवाज नहीं निकालनी है।

जब आप सना पढ़ लेंगे तब आपको सूरह फातिहा एक मर्तबा पढ़ना है सूरह फातिहा का मतलब अल्हम्दुलिल्लाह ही रब्बिलआलमीन।

अलहम शरीफ के बाद आपको एक मर्तबा नमाज में पढ़ने वाली छोटी सुरह या कोई बड़ी सूरह पढ़नी है।

सूरह पढ़ने के बाद आप रुकूं में चले जाएंगे रूप में आप 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ें।

फिर समीअल्लाह होलेमन हमीदह और साध में रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जायें। आप अच्छे से खड़े हो जाएं, खड़े होते ही अल्लाहू अकबर कहते हुए सीधे सजदे में जाएं।

सविता आपको दो मर्तबा करना है और दोनों ही मर्तबा आपको तीन बार सुबहाना रब्बी यल अला पढ़ना है।

जब आप दूसरा सजदा कर लेंगे तब आप अल्लाहू अकबर कहते हुए वापस खड़े हो जाएंगे; अब आपकी यह दूसरी रकात शुरू होगी।

दूसरी रकात (magrib ki namaz ka tarika)

दूसरी रकात में आपको सना नहीं पढ़ना है; आप डायरेक्ट एक मर्तबा सुरह फातिहा पढ़ ले और एक मर्तबा कोई एक सुरह पढ़ लें।

सूर्य पढ़ने के बाद अब रुकूं में जाएंगे रूप में जाने के बाद आप खड़े होंगे और खड़े होकर के मीठे सजदा करेंगे।

सजदा करने के बाद आपको खड़ा नहीं होना है आपको अल्लाहू अकबर कहते हुए तशहुद में बैठ जाना है।

यहां तस्वीर में आप सिर्फ एक मर्तबा अत्तहियात पड़ेंगे और अत्तहीयात पढ़ने के बाद; आप अल्लाह हू अकबर कहते हुए तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएंगे।

तीसरी रकात (magrib ki namaz ka tarika)

तीसरी रकात में आपको ना सुरह पढ़ना है, और ना ही सना। आपको तीसरी रकात में बस एक मर्तबा सुरह फातिहा पढ़ना है; और अल्लाहू अकबर कहते हुए रुकु में चले जाना है।

रूकूअ करने के बाद आप खड़े होंगे और फिर सजदे के लिए जाएंगे और दोनों सजदे करेंगे।

और जब दूसरा सजदा मुकम्मल होगा आपको वहीं तशहुद में बैठना है।

तशहुद में आपको एक मर्तबा अत्तहियात पढ़ना है एक मर्तबा दरूदे इब्राहिम पढ़ना है; और फिर दुआ ए माशूरा पढ़कर सलाम फेर देना है।

यहां आपकी मगर ईद की 3 रकात फर्ज नमाज़ कंप्लीट होती है; अब आप अल्लाह से दुआ मांग ले और फिर 2 रकात मगरिब की सुन्नत नमाज के लिए खड़े हो जाएं।

Magrib ki 2 rakat sunnat namaz ka tarika (magrib ki namaz ka tarika)

मगरिब की सुन्नत नमाज बाकी नमाज़ों की सुन्नत नमाज की तरह ही पढ़ी जाती है; आपको बस नियत में समय का और नमाज का अंतर देखने को मिलता है।

पहली रकात (magrib ki namaz ka tarika)

सुन्नत नमाज़ की नियत करें, नियत करने के बाद आप एक मर्तबा सना पढ़ें; सना के बाद सुरह फातिहा और फिर कोई एक सुरह पढ़ ले।

सूरह पढ़ने के बाद आप रुकू में जाएंगे रुकू करने के बाद आप खड़े होंगे; खड़े होकर के आप सीधे अल्लाहू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे और दो सजदा करेंगे।

दूसरा सजदा मुकम्मल करने के बाद आप फिर अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े होंगे; जब आप अच्छे से खड़े हो जाए तब आपकी दूसरी रकात शुरू होगी।

दूसरी रकात (magrib ki namaz ka tarika)

दूसरी रकात में आपको सना नहीं पढ़ना है; आप एक बार सुरह फातिहा और एक बार कोई एक सुरह पढ लें।

अब आप रूकु में जाएं और रूकूअ सुजुद करने के बाद आप खड़े हो जाएं; खड़े होकर के आप कुछ नहीं पढेंगे आप सीधे सजदे में जाएंगे।

जब आप दोनों सजदा मुकम्मल तौर पर कर लेंगे तब आप वहीं तशहुद में बैठ जाएं।

यहां तशहुद में आप एक बारी अत्तहियात, दरूदे इब्राहिम और दुआ ए मासुरा पढ़कर सलाम फिर लेंगे।

आपकी यहां मगरिब की 2 रकात सुन्नत नमाज़ मुकम्मल हो जाती है; अब आप नफिल नमाज अदा करने के लिए खड़े हो जाएं।

Magrib ki nafil namaz ka tarika (magrib ki namaz ka tarika)

नफिल नमाज का तरीका भी सुन्नत नमाज के तरीके की जैसा ही है; आपको बस नियत में नफील नमाज़ का नाम लेना है और आपके नमाज शुरु हो जाएगी।

नफील नमाज़ में आपको सुन्नत नमाज़ की तरह ही सारे स्टेप्स को फॉलो करना है।

आपको सबसे पहले सना पढ़ना है एक मर्तबा सूरह फातिहा पढ़ना है और कोई एक सुरह पढ़नी है।

सूर्य पढ़ने के बाद रुकूं में जाएंगे रूपों करने के बाद आप खड़े होंगे फ्री सजदे में जाएंगे।

सजदा करने के बाद आप अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े होंगे और इस बार आप सुना नहीं पड़ेंगे; आप एक बार सुरह फातिहा और एक बार कोई एक सुरह पड़ेंगे।

फिर आप रुकु में जाएंगे फिर सजदे में जाएंगे सजदा करने के बाद आप तशहुद में बैठ जाएं।

तशहुद में आप अत्तहियात पड़ेंगे फिर दरूद शरीफ पढें; और फिर दुआ ए मासुरा पढ़कर सलाम फेर लें।

अब आपकी नफील नमाज़ भी मुकम्मल हो गई अब आप दुआ मांगे; यहां आपका मगरिब की नमाज का तरीका पूरा होता है।

Magrib ki namaz ki fazilat

  • दुआ क़बूल होती है – अगर आप मगरिब की नमाज पढ़कर सूरह मुजम्मिल की तिलावत करेंगे तो आपकी दुआ कबूल होगी; और अगर आपकी कोई हाजत है तो वह भी अल्लाह सुभानवताला कबूल फरमाएगा।
  • गुनाह माफ़ हो जाएंगे – मगरिब की नमाज पढने से आपकी असर से मगरीब के दरमियान किए गए गुनाह माफ़ हो जाएंगे।
  • कामयाबी हासिल होगी – नमाज़ पढने से आपकी दीन और दुनिया में तरक्की होगी।

Conclusion (नतीजा)

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट; इसमें हमने मगरीब की नमाज से रिलेटेड काफी चीजों को जाना हमने इन चीजों को जाना।

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अल्लाह हाफिज !!!

Quransays.in

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