Kya salam ka sawab milta hai? – क्या सलाम का सवाब मिलता है?

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Kya salam ka sawab milta hai? यह सवाल भी काफी लोगों के मन में आता होगा और बहुत से लोगों को ये लगता है कि आखिर बेमतलब का किसी को भी सलाम करने से क्या मिलेगा (न-अऊज़ुबिल्ला). अगर आपका भी ये सवाल है तो आप गलत सोचते हैं. 

लेकिन मैं आपको इसकी पूरी जानकारी आज की इस पोस्ट “Kya salam ka sawab milta hai?” में देने वाला हूं. अगर आप इसका सही में मतलब जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें.

Kya salam ka sawab milta hai?

Kya salam ka sawab milta hai? का सीधा सा यही जवाब है कि हां सलाम करने से बहुत सवाब मिलता है और सलाम का जवाब देने से भी बहुत सारा सवाब मिलता है. सलाम करना एक उम्मते मोहम्मदी की निशानी है और सलाम करने वाला बहुत बड़ा होता है क्यूंकि इससे उसका ईमान पता चलता है.

Salam ki hadis:- अल्लाह-त-आला और प्यारे नबी सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को का बंदा बहुत ही पसंद होता है जो किसी को सलाम करता है. वही जो बंदा किसी के सलाम का जवाब नहीं देता है तो उसे बहुत ही ज्यादा गुना मिलता है और इससे उसके कच्चे ईमान का पता चलता है. अल्लाह और प्यारे नबी को ऐसे बंदे बहुत ही ना-गवारा है.

अगर आपने किसी को सलाम किया और उस सामने वाले ने आपकी सलाम का जवाब नहीं दिया तो आपको बहुत ही सारा सा मिलेगा और साथ ही साथ आपको अल्लाह के फरिश्तों के जरिए सलाम का जवाब मिलेगा. तो सोचिए कि सलाम करने का कितना सवाब है अगर सामने वाला जवाब दे तो भी जवाब पढ़ना दे तो और भी ज्यादा सवाब मिलता है. 

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तो इससे यह पता चलता है कि सलाम करना अल्लाह की तरफ से भेजा गया एक इंसानों के लिए एक इनाम है जो हमें लाखों सवाब का मालिक बनाता है. आपको बता दें कि फरिश्ते भी आपस में एक दूसरे को सलाम करते हैं और अगर इंसान फरिश्तों को सलाम करें तो वह भी इंसानों को जवाब देते हैं. और यह भी जान लीजिए कि नदी भी एक दूसरे को सलाम किया करते थे और आम इंसानों को भी सलाम किया करते थे. 

इन सभी कारणों को आपस में मिला दिया जाए तो हम यह नतीजा निकाल सकते हैं कि हम सभी को हर मुसलमानों को सलाम करना चाहिए और उनके लिए दुआ करनी चाहिए.

Salam karne ka sawab kaise badhaye?

अगर आपको अपने सलाम करने का ज्यादा से ज्यादा साथ चाहिए तो हर किसी को सलाम करें चाहे वह आपके मां-बाप, दादा-दादी, चाचा-चाची, नाना-नानी या फिर दोस्त यार हो क्यूँ ना हो. और यहां तक कि दुश्मनों को भी सलाम करने का हुक्म दिया गया है, आप दुश्मनों को भी सलाम करें और उनसे हर बार जवाब की उम्मीद रखें. कोशिश करें कि आपकी उनसे दोस्ती हो जाए. 

अगर आपको और भी ज्यादा साथ चाहिए तो दरगाहों और कब्रिस्तानों पर भी सलाम कीजिए, सहाबियों और मुर्दों को भी सलाम करने का सवाब का है; और फरिश्ते, सहाबि और जिन्नती इंसान आम इंसानों से बेहतर हैं. इसलिए जब भी दरगाह पर जाए या कहीं से भी सहाबियों और मुर्दों को सलाम कर दें. 

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प्यारे नबी सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पर भी सलाम भेज सकते हैं या दुरुद भेज सकते हैं, इससे भी आपके सलाम में इजाफ़ा होता है. और अल्लाह के बाद सबसे बड़ा नाम प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम का ही है तो सोचिए कि उन्हें सलाम और दुरूद भेजने का कितना सवाब मिलेगा.

और सबसे अच्छा तरीका सलाम के स्वाद को बढ़ाने का यह है कि आप कभी भी “Salam alikum” न कहें; ब्लकि “As salam alaikum warahmatullahi wa barakatuhu” कहें. यानी की चंद शब्दों को और बढ़ाने से सवाब और ज्यादा बढ़ गया. इसलिए आप हमेशा लोगों को पूरा सलाम करें इससे आपको काफी ज्यादा सवाब मिलता है. आपको बता दूँ कि सिर्फ “Salam alikum” कहने से 10 सवाब मिलते हैं जबकि पूरा सलाम यानी “As salam alaikum warahmatullahi wa barakatuhu” करने से पूरे 30 सवाब मिलते हैं. सोचिए 3 गुना ज्यादा सवाब.

उम्मीद करते हैं कि आप हमारी आज की यह जानकारी से बाहरी पोस्ट “Kya salam ka sawab milta hai?” और कुछ नया सीखने को मिला होगा. अगर हां तो हमारे इस पोस्ट को अपने दोस्तों और घरवालों का जरूर शेयर. और साथ ही साथ व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी शेयर करें ताकि ज्यादा से आकर लोगों को यह जानकारी मिल सके. 

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