Jumme ki namaz ka tarika

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Jumme ki namaz ka tarika हर बालिक मर्द / लड़के को तो मालूम होना ही चाहिए; क्यूंकि jumme ki namaz पढ़ना फर्ज है.

Jumme ki namaz हर हफ्ते होती है, अंग्रेजी दिन की बात करें; तो हर Friday के दिन jumme ki namaz पढ़ी जाती है.

Jumme ki namaz बड़ी अजमत और रहमत वाली होती है; और बिना किसी सख्त वजह के इसे छोड़ना गुनाह का काम है.

Link – इस नमाज़ को पढ़ लो सारी परेशानी जिंदगी की दूर हो जाएगी…

जुमे के दिन जुमे की नमाज जोहर की नमाज के वक्त पढ़ी जाती है; मतलब जुमे के दिन हम जोहर की नमाज अदा नहीं करते, ब्लकि उसकी जगह पर हम jume ki farz namaz अदा करते हैं.

दोस्तों जुमे की नमाज पढ़ना हर मुस्लमान को आनी चाहिए लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं; जो jumme ki namaz ka tarika नहीं जानते जिस वजह से वह jume ki namaz नहीं पढ़ पाते; या गलत नमाज़ पढ़ लेते हैं जिससे उन्हें जुमे की नमाज का सवाब नहीं मिलता.

और जुमे की नमाज नहीं पढ़ने की वज़ह से वह जाने अनजाने में गुनाह बटोर लेते हैं; और गुनाहगार बन जाते हैं, लेकिन हम ऐसा आपके साथ होने नहीं देंगे.

इसलिए आज हम आपके दरमियान में jumme ki namaz ka tarika लेकर आयें हैं; जिसमें हम आपको jumme ki namaz ka tarika और भी कई छोटी बड़ी चीज़ें जुमे की नमाज़ से जुड़ी आसान लफ़्ज़ों में बताएंगे.

तो चलिए शुरू करते हैं…

Jumme ki namaz

जुमे की नमाज़ बेहद फज़ीलत वाली नमाज़ है, क्यूंकि इसी दिन हजरत आदम अलैही सलाम की पैदाइश (जुमे के दिन) हुई थी; और इसी दिन वह जन्नत में गए, इसी दिन वह जन्नत से बाहर तशरीफ लाए और तो और दोस्तों क़यामत भी इसी दिन होगी.

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि जुमे की नमाज़ पढ़ना कितना जरूरी है; और jume / juma ki namaz ka tarika जानना बच्चे – बच्चे को कितना जरूरी है.

दोस्तों jume ki namaz ka tarika जानने से पहले आपको यह जानना बेहद जरूरी है; कि अखिर jume ki namaz ki rakat, jume ki namaz ki niyat और jume ki namaz ka time क्या है.

क्यूंकि हर नमाज़ की नियत, रकात और वक्त अलग – अलग मुकर्रर किया गया है; और इसी तरीके से नमाज़ को अदा करना चाहिए तभी हमारी नमाज़ मानी जाएगी.

Jumme ki namaz ka time

दोस्तों जैसा कि हमने आपको पोस्ट की शुरुआत में ही बता दिया; कि जुमे की नमाज़ जोहर की नमाज़ के बदले पढ़ी जाती है.

और जोहर की नमाज दोपहर को हमारे देश के standard time के मुताबिक 1 बजे अज़ान होती है; और 1 : 15 से लेकर 1 : 30 तक जमात खड़ी होती है, और नमाज़ अदा की जाती है.

लेकिन दोस्तों jume ki namaz ka time जोहर की नमाज के वक्त से थोड़ा अलग होता है.

jume ki namaz ka time हर मस्जिद में अलग – अलग होता है; लेकिन लगभग 15 मिनट से 30 मिनट के दरमियान में ही फर्क़ होता है.

Jume ki azan 12 : 30 बजे होती है, और अज़ान के बाद हदीसों से तकरीर होती है; और उसके 15 मिनट के बाद खुतबा होता है, और खुतबा होने के तुरंत बाद नमाज़ शुरू हो जाती है.

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Jume ki namaz ki rakat

दोस्तों किसी भी नमाज को पढ़ने के लिए उस नमाज की रकात और नियत की मालूमात नमाज पढ़ने वाले को होनी चाहिए; क्योंकि जब तक हमें यही नहीं पता रहेगा कि हमें कितनी रकात नमाज़ पढ़नी है, तो हम हमारी नमाज कैसे मुकम्मल करेंग.

ऐसे में हर नमाज की रकात वक्त के हिसाब से अलग-अलग होती है, जैसे फज़र की नमाज़ सिर्फ 4 रकात की होती है; लेकिन वही ईशा की नमाज 17 रकात की होती है.

तो इससे पता चलता है, कि हर नमाज में रकातें अलग-अलग होती हैं; ठीक उसी तरह jumme ki namaz ki rakat भी अलग होती है, आइए जानते हैं, jumme ki namaz me kitni rakat hoti hai.

Jumme ki namaz ki rakat (jume / jumma ki namaz ka tarika)

जुमे की नमाज 17 रकात की होती है, लेकिन जुमे की फर्ज नमाज़ सिर्फ दो रकात की होती है.

फर्ज नमाज़ 2 रकात फर्ज नमाज़।
सुन्नत नमाज़ 10 रकात सुन्नत नमाज़।
नफिल नमाज़ 2 नफिल नमाज़।
Jumme ki namaz ki rakat

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Jumme ki namaz ki niyat in hindi

नमाज़ की नियत हर नमाज़ चाहे वह सुन्नत, फर्ज या नफिल हो सबकी नियत अलग होती है; ठीक उसी तरह jumme ki namaz ki niyat भी अलग है.

Jumme ki namaz ki niyat करना जरूरी है, आप अगर मुँह से नियत बोल दें तो बेहतर है; अगर नहीं बोलते हैं, तो कोई बात नहीं लेकिन आपके जेहन में उस नमाज़ की रकात, वक्त के बारे होना चाहिए.

नियत – ” नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज जुमे की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुह मेरा तरफ़ क़ाबा शरीफ के अल्लाहु अकबर

Note – जुमे की नमाज़ पढ़ने से पहले सुरह जुमा जरूर पढ़ें इसकी बहुत ज्यादा फज़ीलतें हैं.

Jumme ki namaz ka tarika (juma ki namaz ka tarika)

Jumme ki namaz ka tarika बेहद ही आसान है, अपको बस इस नमाज़ की रकात के हिसाब से नमाज़ पढ़ते जाना हैं; और आपकी नमाज़ मुकम्मल हो जाएगी.

जुमे की नमाज़ के लिए आपको सबसे पहले वज़ु करना है, वज़ु करना बहुत जरूरी है; क्योंकि बिना वज़ु नमाज़ नहीं मानी जाएगी.

ध्यान रहे आपको वजू इत्मीनान से और अच्छे तरीके से करना है; और वज़ु में गलती ना हो इसलिए आप वज़ु बनाने का सही तरीका जरूर से जान लें.

Note – कोशिश किया कीजिए कि आप अपने घर से ही वज़ु बनाकर जायें, इसका आपको सवाब मिलेगा.

अब वज़ु बनाने के बाद आप मस्जिद के लिए जाएंगे मस्जिद में दाखिल होने से पहले आप; मस्जिद में दाखिल होने की दुआ पढेंगे उसके बाद मस्जिद के अंदर जाएंगे.

अब मस्जिद में जाकर आप चुपचाप बैठे रहेंगे और इमाम साहब कुछ हदीस की रोशनी में दीन की बातें बताएंगे; तो आप उन बातों को ध्यान से सुनिए गा और अमल कीजिएगा.

जब इमाम साहब दीन की बातें बता देंगे तो वह कहेंगे बाकी हजरात सुन्नत पढ़ ले; तब आपको वहां 4 रकात जुम्मे की सुन्नत पढ़नी है.

जब आप जुमे की चार रकात सुन्नत पढ़ लेंगे तो उसके बाद खुतबा होगा आपको खुतबा ध्यान से सुनना है. खुतबा मुकम्मल होने के तुरंत बाद इमाम साहब जुमे की फर्ज नमाज़ पढ़ाएंगे; तो आप फर्ज नमाज़ पढ़ने के लिए खड़े हो जाएं.

Jume ki farz namaz ka tarika

जुमे की फर्ज नमाज़ 2 रकात की होती है इसमें आप एक सलाम के साथ 2 रकात नमाज मुकम्मल पढ़ते हैं.

आपको बता दें जुमे की नमाज आप अकेले या खुद से नहीं पढ़ सकते इस नमाज को सिर्फ और सिर्फ इमाम साहब ही पढ़ा सकते हैं; और यह नमाज जमात के साथ ही अदा की जाती है.

जब जमात खड़ी हो जाए तो आपको खड़े हो जाना है, और नियत बांध लेनी है; नियत कैसे करनी है? यह हमने आपको पोस्ट की शुरुआत में ही बता दिया.

नियत बांधते ही आपकी पहली रकात शुरू हो जाएगी.

पहली रकात (jumme ki namaz ka tarika in hindi)

पहली रकात में आपको नियत बांधने के बाद सिर्फ और सिर्फ सना पढ़ना है, और कुछ नहीं मुंह से बोलना है; सना आप आहिस्ता आवाज में पढें, सना यानी सुबहाना कल्लाहुम्मा.

सना पढ़ने के बाद इमाम साहब कीरत करेंगे, कीरत मे वह सबसे पहले अल्हम्दु शरीफ पढेंगे; फिर कुरान मजीद की छोटी या बड़ी सुरह पढ़ेंगे.

Link – नमाज़ में पढ़ी जाने वाली 10 सबसे छोटी सुरह…

सुरह पढने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहेंगे और रुकु में जाएंगे; तो आपको भी रुकु में चले जाना है.

रुकु में जाते ही आप तीन मर्तबा सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ें और फिर इमाम समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खड़े होंगे तो वहीं आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाइएगा.

खड़े होने बाद इमाम साहब अल्लाहू कहते हुए सजदे में जाएंगे तो आप भी सजदे में चले जाइएगा.

सजदे दो बार होंगे और आपको दोनो ही सजदों में तीन – तीन बार सुबहाना रब्बी यल अला पढना है.

जब दोनों सजदे मुकम्मल हो जाएंगे तब इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएंगे; तो आप भी खड़े हो जाइएगा.

अब यहां आपकी दूसरी रकात शुरू होगी…

दूसरी रकात (jumme ki namaz ka tarika in hindi)

दूसरी रकात में आपको सना नहीं पढ़ना है आपको बस चुपचाप खड़े रहना है; और इमाम साहब अल्हम्दु शरीफ पढेंगे और फिर कोई एक सुरह पढेंगे.

इमाम साहब सुरह पढने के बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकु में जाएंगे; और आप भी बिना कुछ बोले रुकु में चले जाइएगा.

रुकु में जाकर आपको तीन बार सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढना है; और फिर इमाम साहब समीअल्लाह होलेमन हमीदह कहते हुए खड़े हो जाएंगे, और आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाइएगा.

खड़े होने के बाद तुरंत इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे तो आप भी सजदे में चले जाइएगा.

सजदे दो बार किए जाएंगे; और दोनो बार आपको सजदों के दरमियान तिन – तिन बार सुबहाना रब्बी यल अला पढना है.

दूसरा सजदा मुकम्मल होने के बाद इमाम साहब अल्लाहू अकबर कहते हुए तशहुद में बैठ जाएंगे; और आप भी बैठ जाइएगा.

तशहुद में यह पढें (juma ki namaz ka tarika)

तशहुद में आपको एक – एक मर्तबा अत्तहियात, दरूदे इब्राहिम और फिर दुआ ए मासुरा पढ़कर चुपचाप बैठे रहना है; और जब इमाम साहब सलाम फेरें तो आपको भी सलाम फेर लेना है.

अत्तहियात – अत्तहिय्यतो लिल्लाहि वस्सलवातो , वत्तैय्याबातो, अस्सलामो अलैका अइय्योहन्नबियो, वरहमतुल्लाहि व बराकातहु.

अस्सलामो अलैना व आला ईबादिस्सालेहींन, अश्हदु अल्ला इलाह इल्ललाहु व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुह व रसूलुहु.

Note – जब आप अश्हदु अल्ला इलाह इल्लल्लाहु पढें तो साथ में शहादत की उंगली को ऊपर सीधा सामने की तरफ इशारा करते हुए उठायें; यह जरूरी है.

दरूद शरीफ – अल्ला हुम्मा सल्ले, आला मुहम्मदिव व आला आले मुहम्मदिन कमा सल्लैता अला इब्राहिम व आला आले इब्राहिम इन्नका हमीदुम्मजीद.

अल्ला हुम्मा बारीक, अला मुहम्मदीव व अल्ला आले मुहम्मदिन कमा बारकता अला इब्राहिम व आला आले इब्राहिम इन्नका हमीदुम्मजीद.

दुआ ए मासुरा – अल्लाहुम्मा इन्नी जलमतो नफ्सी जुलमन कसिरौं; वला यगफिरुज़्ज़ुनूब इल्ला अंता फगफिरली मग्फ़िरतम्मिन इंदिका वरहमनी इन्नका अंतल ग़फ़ूरुर्रहीम.

जरूरी बात (jume ki sunnat, nafil namaz)

लेकिन दोस्तों यहां आपकी सिर्फ जुमे की फर्ज नमाज़ हुई अभी सुन्नत और नफील नमाज़ बची है; तो आइए देखते हैं उन्हें कब और कैसे पढ़ना है?

आपको सबसे पहले तो 4 रकात सुन्नत पढ़नी है, फिर आप 2 रकात जुमे की फर्ज पढ़ें उसके बाद फिर 4 रकात सुन्नत, फिर 2 रकात सुन्नत और अखिर में 2 रकात नफिल नमाज पढ़ लें.

इतनी रकातों को सही तरीके से खुसू और कुजू के साथ पढने के बाद आपकी नमाज़ मुकम्मल हो जाएगी.

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Jume ki namaz ki fazilat

जुमे की नमाज़ बड़ी फज़ीलत वाली होती है, अब ये हम सभी जानते हैं; और ऐसी ही कुछ फज़ीलतें हम आपको बताने जा रहे हैं, ताकि आपको इसकी अहमियत का अंदाजा हो जाए.

  • जुमे की नमाज़ फर्ज नमाज़ है, और हम सब यह बात जानते हैं कि फर्ज नमाज़ कितनी आला नमाज़ होती है; और जुमे की फर्ज नमाज़ पढ़ने से आपको अखरत में इसका सवाब मिलेगा.
  • हदीसों में आया है, कि अल्लाह सुभानवतआला फरमाते हैं कि जब जुमा की अज़ान हो जाए; तो तुम अपने तमाम दुनियावी कामों को छोड़ दो और अल्लाह की बंदगी में लग जाओ और नमाज़ के लिए तैयार हो जाओ.
  • हुजूर ए पाक सल्ललाहो अलैही वसल्लम ने फरमाया की जो शख्स बिना किसी दलील और वजह के जुमे की नमाज़ छोड़ेगा; तो उसके सीने पर अल्लाह मुहर लगा देगा.

इसलिए जुमे की नमाज़ न छोडें, जितना इस नमाज़ को पढ़ने का सवाब है; उतना ही इस नमाज़ को छोड़ने का अज़ाब.

  • जुमे के दिन जुमे की नमाज़ पढ़ने के बाद दुआ मांगने से दुआ कबूल होती है; आपको बता दें कि जुमे के दिन एक ऐसा वक्त होता जिस वक्त मांगी गई दुआ जरूर क़बूल होती है.

और वह वक्त है असर का इसलिए जुमे के दिन आप असर के वक्त खूब तिलावत किया करें और अल्लाह से दुआ मांगा करें.

Conclusion (नतीजा)

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट इस पोस्ट में हमने आपको; जुमे की नमाज का तरीका आसान लफ्ज़ों में और मुकम्मल तौर पर बताया है.

हमने आपको इस पोस्ट में जुमे की नमाज के बारे में हदीस की रोशनी में कई सारी बातें बताई हैं; और इस नमाज की फजीलत भी बताई है.

उम्मीद करते हैं, आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो; तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर जरूर करें.

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आज के लिए बस इतना ही रखते हैं, मिलते हैं, आपसे अपनी नई पोस्ट में तब तक के लिए अल्लाह हाफिज !!!

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