Jumme ke din ki fazilat / juma ki fazilat

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Jumme ke din ki fazilat आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे; जिससे आपको जुमे के दिन की अहमियत का अंदाजा हो जाए.

दोस्तों हममे से ज्यादातर लोगों को जुमे के दिन के बारे में सिर्फ इतना ही पता होता है; कि इस दिन तमाम मुसलामान jume ki namaz पढ़ते हैं.

Jume ki namaz ka tarika हर मुस्लमान को पता होना चाहिए; क्यूंकि Jumme ke din ki fazilat में सबसे बड़ी फज़ीलत जुमे की नमाज़ अदा करना है.

जुमे का दिन बड़ा रहमत, अज़मत और बरकत वाला होता है, इस दिन को मुस्लमान दूसरी ईद भी मानते हैं; लेकिन दोस्तों jume ke din ki fazilat बस इतनी ही नहीं है, ब्लकि इतनी ज़्यादी है कि हम उसे बयान नहीं कर सकते.

इसी चीज को मद्देनजर रखते हुए, आज हम आपके दरमियान juma ki fazilat लेकर आयें हैं; जिससे आप इस मुबारक दिन का सवाब और फज़ीलत हासिल कर पाएं.

तो चलिए शुरू करते हैं…

Jumme ke din ki fazilat / juma ki fazilat

मेरे अजीज दोस्तों और मेरे दीनी भाई और बहनो आपको बता दूँ कि Jumme ke din ki fazilat; हम पूरी नहीं बता सकते क्यूंकि इस दिन की फज़ीलतें बहुत ज़्यादा है.

लेकिन हम आपको जुमे के दिन की मोटी – मोटी फज़ीलतें बता देते हैं; जिससे आपको इस दिन क्या करना चाहिए और उससे क्या फायदा होता है, पता चल सके.

1 – इसकी सबसे बड़ी फज़ीलत यह है, कि यह दिन पूरे हफ्ते में सबसे बेहतर और अच्छा दिन है; हुजूर ए पाक सल्ललाहो अलैही वसल्लम ने फरमाया की तमाम दिनों में सबसे दिन जुमा का है.

इसी दिन आदम अलैही सलाम की पैदाइश हुई, इसी दिन उन्हें जन्नत से जमीन पर भेजा गया; उनकी तौबा भी जुमे के दिन हुई और उनका विसाल भी इसी दिन को हुआ.

2 – क़यामत भी जुमे के ही दिन होगी और यही दिन जन्नत में अल्लाह पाक के दीदार का दिन है.

3 – इस दिन दुआ क़बूल होती है, और गुनाहों की माफी भी होती है, और एक हदीस से मालूम होता है; कि इस दिन की नमाज़ को पढ़ने से आने वाले जुमे के दिन तक आप तमाम बुराइयों से महफ़ूज़ रहते हैं.

4 – jumme ke din ki fazilat में से सबसे बड़ी फज़ीलतों में से यह भी है, कि इस दिन एक खास वक्त आता है; जिस वक्त मांगी गई दुआ और तिलावत क़बूल होती है.

आपको बता दें दुआ के काबलियत का वक्त और घड़ी असर के समय से लेकर मगरिब के वक्त तक होती है; जिस वक्त आपकी दुआ क़बूल होगी, इसलिए आप जुमे के दिन असर के बाद काम काच छोड़कर तिलावत करें.

Jume ki hadees (juma ki fazilat)

1 – अल्लाह तबारक वतआला ने फरमाया जब जुमे की अज़ान हो जाए; तो तुम दुनियावी काम धाम और तिजारतें छोड़ दो और जुमे की नमाज़ के लिए जाओ.

Note – कोशिश किया करें कि वज़ु आप घर से कर के जाएं क्यूंकि मस्जिद में वज़ु करने का जो इन्तेजाम होता है; वह मुसाफिरों के लिए होता, तो आप इस बात का ध्यान रखें और इसका आपको सवाब भी मिलता है.

किसी भी नमाज़ को अदा करने से पहले वज़ु करना जरूरी है; बिना वज़ु नमाज़ नहीं होती इसलिए आप वज़ु बनाने का सही तरीका जरूर जानें.

2 – एक हदीस के मुताबिक हुजूर ए पाक सल्ललाहो अलैही वसल्लम ने फरमाया कीी; जो शख्स बिना किसी जायज़़ वजह के जुमे नमाज़ छोोड़ेगा अल्लाह सीने में मुहर लगा देेगा.

इसलिए आप बिना वजह सिर्फ यह सोचकर जुमे की नमाज़ नहीं पढ़ते की क्या हो गया? जोहर की नमाज पढ़ लेंगे; तो आपको बता दें अगर कोई ऐसा करता है, तो वह बड़ा गुनाहगार है.

3 – एक और बात हदीसों से मालूम होती है; कि अगर कोई शख्स लगातार तीन जुमा बिना किसी जायज वजह के छोड़ देता है, तो वह बड़ा गुनाहगार है.

4 – नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम की फरमाया की, जो शख्स जुमे केे दिन अच्छी तरह से गुुस्ल करे; और नमाज़ केे लिए पैदल मस्जिद जाए और इमाम के नजदीक बैठ कर पूरे दिल से खुतबा सुने.

तो उसके हर एक कदम पर हर साल के रोज़े का और उसकी रातों के कय्याम का सवाब हासिल होगा.

Jumme ke din ke ahkam (jumme ke din kya karna chahiye)

दोस्तों जुमे के दिन क्या करना चाहिए? यह हर मुस्लमान को पता होना चाहिए, जिससे कि हमें jume ke din ki fazilat; और बढ़ जाए और हमारे जिम्मे ढेर सारी नेकी और सवाब हो ताकि अआखरत में हम जन्नत के हकदार हों.

जहां बात हमे jumme ke din kya karna chahiye तो हम आपको बता दें इस दिन वही करनी चाहिए; जो हमारे नबी की सुन्नत है, मतलब जो हमारे नबी किया करते थे.

सच कहूँ तो ऐसी कई चीज़े है, जिन्हें हमे जुमे के दिन करना चाहिए; लेकिन हम लोग नहीं करते कुछ लोग वक्त के तकाजे में लोग तमाम सुन्नत चीजें नहीं करते.

कुछ लोगों को तो मालूम भी नहीं होता है, कि उन्हें jumme ke din kya karna chahiye.

jumme ke din kya karna chahiye (juma ki fazilat)

1 – गुस्ल करना – तो सबसे पहला जुम्मे के दिन करने वाला काम है, (गुसल करना यानी नहाना) एक हदीस में आयाा है; की जुम्मे के दिन गुसल करने से वह गुसल सुन्नत हो जाती है, वैसे गुसल वाजिब है.

गुसल करने से बदन में ताजगी आ जाती है, और हम फ्रेश महसूस करने लगते हैं; जिससे नमाज पढ़ने में खुसू और कुजू भी पैदा होती है.

2 – अच्छे पाक साफ कपड़े पहनें – यह तो हर किसी को पता है, कि किसी भी बड़े दिन या त्योहार को नया कपड़ा पहनना चाहिए; और जुम्मा भी किसी त्योहार से कम नहीं यह हम मुसलमानों के लिए छोटी ईद है.

अगर आपके पास नए कपड़े नहीं है, तो इसमें कोई बड़ी या बुरी बात नहीं है; आप अपने पुराने कपड़े को पहनकर भी नमाज पढ़ सकते हैं, हां लेकिन पुराने कपड़े पाक साफ होने चाहिए.

3 – खुशबू लगाना – जुम्मे के दिन नहा धुलाकर पाक साफ कपड़े पहन कर कपड़ों पर इत्र लगाएं; और खुद को खुशबूदार कर दें और आपको बता देंं, खुशबू लगाना हमारे नबी की सुन्नत में शाामिल है.

आप बालों में तेल भी लगाया करें अगर रोज नहीं, तो कम से कम जुमे के दिन ही.

4 – घरों को साफ करें – यह बात हम सभी जानते हैं, कि इस्लाम बाकी भी का और अदब का मजहब है; इसलिए जुम्मे के दिन आप अपने घरों को साफ किया करें, और अपने घरों में भी खुशबू करें.

5 – अच्छा खाना पायें – जुम्मे के दिन आप अपने हैसियत के मुताबिक अच्छा खाना बनवाएं और उसे खाएं; और अगर अल्लाह ने हर चीज से नवाज़ा है, तो आप गरीबों को भी खिलायें.

Jumme ke din kya padhe

जुमे के दिन इन चीजों को पढ़ने से जुमे की बरकत और फजीलत और कई गुना बढ़ जाती है; और इन चीजों को पढने से आपकी दुआ भी कबूल होगी.

चीजों से मुराद है, कुरान शरीफ की आयतें, सुरतें और दुआएं.

1 – पहला तो कुरान मजीद की तिलावत करना – यूँ तो हमें रोजाना कुरान शरीफ पढनी चाहिए लेकिन अगर आप रोज नहीं पढ़ते तो कम से कम जुमे के दिन जरूर पढ़ें.

आप जुमे की नमाज़ के बाद या असर की नमाज़ के बाद कुरान की तिलावत करें, यह वक्त कबूलियत का है.

2 – दरुद ए इब्राहिम पढना – दोस्तों अपने नबी पर दरुद शरीफ पढने का सवाब और फज़ीलत से आप सभी वाकिफ होंगे; इसलिए हम आपको यह नहींं बताएंगे कि दरुद शरीफ पढने की फजीलत क्याा है?

इसलिए दोस्तों आप जुम्मे के दिन जितना ज्यादा हो सके उतना दरूदे इब्राहिम पढ़ा करें; इसको पढ़ने से आपके तमाम गुनाह माफ हो जाएंगे और आपकी दुआएं भी कबूल होगी.

3 – सुरह मुज़्ज़म्मील पढना – सूरह मुजम्मिल की फजीलत तो हम सभी बखूबी जानते हैं; कि इस सूर्य को पढ़ने से हम ख्वाब में अपने नदी का दीदार पा सकते हैं.

तो ऐसे मेंं जुम्मे इस सुरह को जुमे के दिन पढना बड़ा अच्छाा है, आप इस सुरह को मगरिब की नमाज के बाद पढ़़ सकते.

सूरह मुजम्मिल के तमाम फायदे जाने के लिए आप सूरह मुजम्मिल की फजीलत पोस्ट को जरुर पढ़ें…

Jumme ke din ise padhe (jumme ke din ki fazilat)

1 – सुरह जुमा जरूर पढ़ें – आपको बता दें जुमे की नमाज पढ़ने का हुक्म और नसीहत; हमें सूरह जुमा को पढ़ने से ही मिलती है.

क्योंकि सूरह जुमा में ही हमें जुमे की नमाज के बारेे में पता चलता हैै; तो ऐसे मैं हमें भी जुम्मे केे दिन सूरह जुमा पढ़नाा चाहिए.

आपको बता दें हमारे नबी सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम भी जुम्मे के दिन सूरह जुमा पढ़ा करते थे; इसलिए आप सूरह जुमा की फजीलत जरूर देखें.

2 – सुरह यासीन पढना – सूरह यासीन एक ऐसी जो बड़ी अजमत और फजीलत वाली है; इसे कुरान पाक का दिल भी कहा जाता है.

इस सुरह को पढ़ने से बड़ी से बड़ी मुसीबत भी दूर हो जाती है, इस लिहाज से हमें तो रोज सूरह यासीन पढ़नी चाहिए; लेकिन अगर आप उस सुरह को रोज़ नहीं पढ़ पाते, तो आप जुम्मे केेे दिन फज्र की नमाज के बाद सुरह यासीन को जरूर पढ़ें.

3 – सुरह कहफ़ पढें – सुरह कहफ़ को जुमे के दिन पढ़ना चाहिए इसकी बड़ी फजीलत है; सुरह कहफ के बारे में एक हदीस से यह साबित होता है, कि…

एक बार हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि जो शख्स जुम्मे के दिन सुरह कहफ़ पढेगा; तो अल्लाह उस जुमा से लेकर अगले जुमा के बीच उसके लिए एक नूर को रोशन कर देगा.

Conclusion (नतीजा)

तो दोस्तों यदि हमारी आज की पोस्ट इस पोस्ट में हमने आपको jumme ke din ki fazilat; jumme ke din kya karna chahiye aur jumme ke din kya padhe.

इन सभी चीजों को हमने आपको इस पोस्ट में आसान लफ्ज़ों में और तफ्सील से बताया है; उम्मीद है, आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी.

दोस्तों आपके हम शुक्रगुजार हैं, कि आपने इस पोस्ट को आखिर तक पढा क्योंकि; जुम्मे का दिन बड़ा अजमत वाला दिन है, और इस दिन की जानकारी तमाम मुसलमानों को पता होनी चाहिए.

इसलिए आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर जरूर करें; जिससे कि तमाम मुसलमानों को इस दिन की अहमियत का पता चल सके.

आज के लिए बस इतना ही रखते हैं, मिलते हैं, आपसे हम अपनी अगली पोस्ट में तब तक के लिए अल्लाह हाफिज !!!

Quransays.in

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