Itikaf me kya karna chahiye aur kya nahi karna chahiye – इतीकाफ मे क्या करना चाहिए

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अगर आप पहले बार इतीकाफ में बैठ रहे हैं या पहले बैठ चुके हैं और आपको यह जानना है कि itikaf me kya karna chahiye तो ये पोस्ट आपके लिए सबसे अच्छी साबित होगी; बहुत से लोगों को इस बात का पता तो होता है की इतिकाफ में बैठने वाले शख्स को सांस लेने से लेकर सोने तक का सवाब मिलता है. 

लेकिन वही लोग इसे गलत तरीके से ले लिए हैं, यह बात सच है कि इतिकाफ में बैठने वाले शख्स को हर एक चीज का सवाब मिलता है; लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह दिन भर खाली सोता रहे और आराम करता रहे. 

उस शख्स के लिए और भी काम हैं जो इतीकाफ मे बैठे हुए करने होते हैं जिससे सवाब कई गुना ज्यादा मिलता है, और आज हम आपको वही बताने वाले हैं; तो चलिए शुरू करते हैं कुछ शर्त से जो आपको माननी ही होंगी और अमल करना होगा. फिर इसके बाद हम जानेंगे itikaf me kya karna chahiye?

Itikaf ke shart kya hain? 

वैसे तो इतीकाफ के कई सारी शर्तें हैं जिनके एहकाम को मानना जरूरी है, वर्ना इतीकाफ टूट जाएगा; लेकिन यहां हम आपको कुछ अहम और बड़ी शर्तें बता देते हैं…. 

  • इतीकाफ मे बैठने वाला शख्स मर्द और औरत दोनों ही हो सकते हैं, मर्दों का इतीकाफ मस्जिद मे ही मनाएगा और औरतों का घरों मे ही. 
  • कोई शख्स बिला वजह मस्जिद (लड़कों के लिए) और नमाज की जगह (लड़कियों के लिए) छोड़कर नहीं जा सकता; पखाना-पेशाब के लिए बाहर जा सकता है लेकिन मस्जिद के बाहर बने बाथरुम मे ही. और लड़कियां घर के ही बाथरूम मे जायें. 
  • इतीकाफ की नीयत करना बहुत जरूरी है इतीकाफ मे बैठने से पहले इसलिए आपका जब भी मन करे बैठने का इतीकाफ मे, आप नियत कर लें. 
  • और नीयत करने के बाद अब आप जब भी इतीकाफ मे बैठेंगे तब itikaf ki dua आपको जरूर पढ़नी है मस्जिद मे दाखिल से पहले. 
  • मस्जिद मे फिजूल की बातें करना बिल्कुल गलत है, इससे आपको गुनाह मिलेगा; क्योंकि इतिकाफ अल्लाह के करीब होने का सबसे आसान तरीकों मे से एक है. 
  • इतिकाफ के दरमियान मस्जिद मे या नमाज़ की जगह पर बैठ कर timepass नहीं करना, आपको itikaf me kya karna chahiye aur kya nahi karna chahiye हम आपको आगे बताने वाले हैं.
  • इतिकाफ की हालत मे आपको रोज़ा जरूर से रखना है, बिना रोज़ा के इतिकाफ किसी काम का नहीं और ना ही इसका कोई मतलब है.
  • इतिकाफ की जगह पर बैठकर किसी भी दुनियावी चीजों का ख्याल मन में मत आने दीजिए और ना ही कीजिए; इतिकाफ यानी हर चीज से नाता तोड़ कर सिर्फ अल्लाह की ओर झुक जाना है.
  • अगर आपको खैनी, सिगरेट आदि जीसी चीज़ों की लत है, तो उसे बिल्कुल अभी छोड़ दें; वर्ना आपके इतिकाफ में बैठने का कोई फायदा नहीं होगा उल्टा गुनाह अलग से मिलेगा. क्यूंकि आप मस्जिद मे हैं ये अल्लाह का घर है आप इसे सिगरेट या खैनी से नापाक नहीं कर सकते. अगर नहीं छोड़ सकते तो इतिकाफ मे बैठिए ही मत. वैसे भी ये सब हराम हैं इस्लाम मे. 
  • किसी भी कीमत मे नापाक ना रहें, ना ही रोज़े की हालत मे और ना ही रोज़े के बाद से लेकर सेहरी तक. आप जानते हैं किन चीजों से नापाक हो सकते हैं आप.

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तो दोस्तों यह थीं कुछ ऐसी शर्तें जिन्हें आपका मानना बहुत ही जरूरी है, इसके बिना आपका इतिकाफ कबूला नहीं जाएगा; और कुछ से तो गुनाह भी मिलता है इसलिए इन शर्तों का पालन जरूर करें.

अब चलिए जानते हैं itikaf me kya karna chahiye aur kya nahi karna chahiye?, शुरू करते हैं, itikaf me kya karna chahiye से. 

Itikaf me kya karna chahiye

नीचे लिखे कुछ ऐसे काम मैंने बताए हैं, जो आपको मानने हैं, और करने हैं; इन्हें करने से आपको ज्यादा से ज्यादा सवाब मिलेगा और आपके खाते मे अच्छे और नेक आमाल बढ़ेंगे…… 

इतिकाफ का मतलब ही ये है, कि आप अल्लाह के ज्यादा से ज्यादा नजदीक जा सकें जो कि उसकी इबादत करने से ही मिलेगी; और हम आपको उन्हीं कुछ इबादतों और कामों के बारे मे बताने जा रहे हैं, ताकि आपको कोई परेशानी ना हो अच्छा आमाल इकट्ठा करने में. 

  • नमाज के पाबंद हो जाएं और नमाज कभी भी ना छोड़े, ईशा बाद की तरावीह की नमाज भी पढ़ें. 
  • कुरआन को ज्यादा से ज्यादा पढ़े और 10 दिनों में एक कुरान मुकम्मल करने की पूरी कोशिश करें. 
  • 4 qul का लगतार विर्द करें इसके साथ-साथ durood e paak और आयत-अल-कुर्सी  का भी कसरत से विर्द करें. 
  • हदीसों को पढ़ें-जाने और अपने ईमान को पक्का करें हदीसों की बातों पर चल कर. 
  • लोगों से इस्लाम की बातें करें और उन्हें इस्लाम की बातें सिखाइए और उनसे सीखिए. 
  • सबके साथ में इफ्तार कीजिए, किसी से दूर हट कर ना करें. साथ में इफ्तार करने का बहुत ज्यादा सवाब है. 
  • सेहरी के वक़्त अगर कोई उठा ना हो तो उसे उठाए और अगर उसके घर से सेहरी ना आ पाई हो तो अपनी सेहरी भी उनके सतह बाटें. 
  • हाफिज साहब जो उस मस्जिद के हों उनसे कुछ अच्छी बातें सीखें, और आपके मन मे जो भी सवाल हो इस्लाम, कुरान, नमाज, जकात, रमजान, इतीकाफ, ईद से related तो उसे हाफिज साहब से पूछकर जान लें.
  • सूरह यासीन और सूरह बकरा जैसी अफजल सूरहों का भी विर्द ज्यादा से ज्यादा करिए. 
  • अपनी गुनाहों की माफ़ी, और बाकी हर चीज़ के लिए अल्लाह के दरबार में उससे दुआ मांगिये जो आप पाना चाहते हैं; नोट:- अपने घरवालों और पूरी मुसलमान कौम के लिए भी दुआ जरूर से मांगे. 
  • रोज़ा पूरा रखें बिल्कुल ना छोड़ें, क्यूंकि बिना रोज़े के इतीकाफ नहीं मनाएगा. इतीकाफ के लिए रोज़ा बहुत जरूरी है.
  • तहज्जुद के पाबंद हो जायें, अल्लाह को तहज्जुद पढ़ने वाला बंदा बेहद हो पसंद है. ऐसे बन्दे अल्लाह के सबसे करीब होते हैं. 
  • तसबीह भी पढ़ते रहें किसी भी कलाम का, जैसे अल्लाहू अकबर, सुभानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, या असतगफार का इनमे बहुत ही ताकत है ये बताने की जरूरत नहीं. 
  • मस्जिद की सफाई भी कर दिया करें, इससे आपको बहुत ही सवाब मिलेगा क्यूंकि आप अल्लाह के घर को साफ़ कर रहे हैं.
  • हर वक्त अल्लाह को याद करते रहें और उससे मगफिरत की दुआ करते रहें. 

बस इतना ही करना होगा आपको अपने खाते में लाखों-करोड़ों सवाब दर्ज करवाने के लिए और अल्लाह का नेक और सच्चा बंदा बनने के लिए जिसपर हर वक्त अल्लाह की रहमत और बरकत बनी रहती है; अगर इनके अलावा और भी कुछ नेकियान हों करने के लिए तो आप उन्हें भी जरूर करें और नीचे हमें comment मे भी जरूरी बताएँ. 

तो दोस्तों चलिए अब जान लेते हैं कि itikaf me kya nahi karna chahiye?

Itikaf me kya nahi karna chahiye?

हम सभी जानते हैं कि जहां हम कुछ अच्छा करते हैं वहां हमसे कुछ-न-कुछ छोटी या बड़ी गलतियां हो ही जाती है, जिनसे हमें जाने-अनजाने मे गुनाह भी मिल जाते हैं, या कभी-कभी वो चीज़ करने का कोई फायदा नहीं रहता जो हम कर रहे हैं, जैसे रोज़ा का टूट जाना या इतीकाफ का टूट जाना. 

तो चलिए ऐसी ही कुछ चीजें जान लेते हैं, उन हर कामों को जिनसे गुनाह मिलता है, या इतीकाफ टूट जाता है; वो उस काम के आगे लिखा होगा….. 

  • कभी भी रोज़े की हालत मे गली ना दें या मस्जिद मे इतीकाफ मे दरमियान गाली या गंदी बातें ना करें. 
  • मस्जिद मे लड़ाई ना करें, क्यूंकि आप अल्लाह की इबादत करने आए हैं. भले ही आपसे कोई दूसरा आदमी गली गलौज करे लेकिन आपको उससे लड़ाई नहीं करनी है, ब्लकि उसे समझाना है. 
  • मस्जिद मे रहते हुए कोई भी अश्लील बातें ना करें और ना ही मन मे ऐसे खयाल आने दें. 
  • मस्जिद मे रोज़े की हालत मे और इतीकाफ मे बैठे हुए मुश्त जनी ना करें, इससे आपका रोज़ा और इतीकाफ तो टूटेगा ही लेकिन गुनाह भी अलग से मिलेगा. 
  • रोजा बिल्कुल ना छोड़ें, रोज़े के बिना इतीकाफ नहीं माना जाएगा. इसलिए रोज़ा जरूर रखें इतीकाफ की हालत मे. 
  • नापाक बिल्कुल भी ना रहें रोज़े की हालत मे और ना ही इतीकाफ की हालत मे. मगरिब से फजर तक भी नापाक ना रहें. आप जानते हैं मैं किस तरीके की नापाकी की बात कर रहा हूं (जैसे, खड़े होकर पेशाब करना, मुश्त जनी आदि करना).
  • दुनियावी बातों और कामों से परहेज करें, सिर्फ अल्लाह की इबादत मे लगें. दुनिया से कोई नाता ना रखें इन 10 दिनों के लिए.
  • बिला वजह मस्जिद बिल्कुल भी ना छोड़े क्योंकि आपको इतीकाफ की हालत मे इसका हुक्म नहीं है; आप सिर्फ पखाना-पेशाब के लिए ही मस्जिद से बाहर जा सकते हैं वो भी जो मस्जिद के लिए ही बनाया गया है.
  • आप खाने, पीने और सोने के लिए भी मस्जिद नहीं छोड़ सकते इन कामों को आपको मस्जिद मे ही करना है; लेकिन अगर जिस मस्जिद मे आप इतीकाफ कर रहे हैं अगर वहाँ जुमा की नमाज नहीं होती तो इसके लिए आप दूसरी मस्जिद जा सकते हैं. 
  • मस्जिद मे सिगरेट, खैनी ना खायें जैसा मैंने उपर शर्तों मे बताया है. आपको सिर्फ इबादत करनी है जो मैं कितनी देर से कई बार बोल रहा हूं क्यूंकि इतीकाफ का मतलब ही यही है. 
  • और वो कोई भी काम मत कीजिए जो इस्लाम मे हराम क़रार दिया गया है; और वो काम भी मत कीजिए जिससे आपका रोज़ा या इतीकाफ टूट सकता है. यहां देखिए:- Roza kisse toot jata hai 

ये थे कुछ ऐसे काम जिन्हें आपको इतिकाफ में बैठे हुए बिल्कुल भी नहीं करना है, इन कामों से परहेज करते हुए आपको इतिकाफ में बैठे रहना है; अगर आप इतिकाफ में मना किए हुए काम को करते हैं, तो आपका इतिकाफ टूट भी सकता है, और गुनाह भी मिल सकता है जैसा मैंने आपको ऊपर बताया.

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आज आपने क्या सीखा

तो दोस्तों आजकी इस पोस्ट मे हमने itikaf me kya karna chahiye aur kya nahi karna chahiye पर गौर से बातें की और नीचे लिखी सभी टॉपिक्स को आपको आसानी से समझाने की कोशिश की….. 

  • Itikaf me kya karna chahiye aur kya nahi karna chahiye 
  • Itikaf ki sharte
  • Itikaf ki jaruri bate
  • Kya itikaf mein masjid chodd sakte hai? 
  • और भी कई सारी चीजें जानी. 

उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी आज की यह पोस्ट पसंद आई होगी और कुछ नया सीखने को मिला होगा इस्लाम, रमज़ान, और इतिकाफ से related; अगर हाँ, तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों और घरवालों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उन्हें भी इतिकाफ की अहमियत का पता चल सके.

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