Itikaf ka tarika for female/ladies

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Itikaf ka tarika for female भी काफी खवातीन जानना चाहती हैं; और जानना भी चाहिए क्योंकि ऐतेकाफ की फजीलत बेशुमार है, और इससे ऐतकाफ करना सुन्नते मोअक्किदह है.

Itikaf ka tarika for female

Itikaf ka tarika for female काफी खवातीन जानना चाहती थी ताकि वह भी रमजान के मुबारक महीने में ऐतकाफ में बैठकर इसाले सवाब हासिल कर सकें और अपने रब अल्लाह को राजी करके अपनी दिन और दुनिया दोनों ही कामयाब कर ले. 

ऐतकाफ में बैठना फर्ज नहीं है, लेकिन बैठना काफी अफजल माना जाता है, और रमजान में ऐतकाफ की फजीलत बेशुमार है; जोकि कई हदीसों में बयान की गई है

ऐतकाफ मर्द और औरत दोनों ही कर सकते हैं, मर्द को मस्जिद में ही ऐतकाफ में बैठना जरूरी है; और वहीं दूसरी तरफ खवातीन मस्जिद में ऐतकाफ में नहीं बैठ सकती इसलिए उन्हें अपने घर में ही ऐतकाफ करना होता है. 

ऐसे में खवातीनों को itikaf me baithne ka tarika for female नहीं मालूम होता और वह इस इबादत से महरूम रह जाती है.

हमारी दीनी बहने और माएं इस इबादत से मेहरूम ना रहें इसलिए आज हम आपको नीचे बताई हुई चीजों को तफसील से और आसान लफ्जों में बताने की कोशिश करेंगे. 

  • Itikaf kya hota hai? 
  • Itikaf me baithne ka tarika for female. 
  • Itikaf Ka Tarika Aurton Ke Liye. 
  • Itikaf me baithne ki shart. 
  • Itikaf me baithne ki dua. 
  • Itikaf me baithne ki niyat.
  • Itikaf me baithne ka waqt. 

Itikaf kya hota hai? 

ऐतकाफ में बैठने से पहले हमें ऐतकाफ क्या होता है? कि सही और मुकम्मल जानकारी होना जरूरी है; ताकि हम इतिकाफ में बैठकर ऐसी कोई गलती जानबूझकर या अनजाने में ना कर बैठे जिससे हमें ऐतकाफ में बैठने का सवाब कम हासिल हो. 

बता दें ऐतकाफ में बैठना इस्लाम में रमजान के महीने में की जाने वाली इबादतों में शामिल है; ऐतकाफ में बैठना फर्ज तो नहीं लेकिन सुन्नते मोअक्किदह है.

यानी जरूरी तो नहीं लेकिन अगर किसी जगह की मस्जिद में उस मोहल्ले का कोई भी शख्स ऐतकाफ में नहीं बैठेगा; तो पूरा का पूरा मोहल्ला गुनहगार होगा और अगर एक भी बैठ जाएगा तो बाकी तमाम मोहल्ले के लोग गुनाहगार नहीं होंगे.

ये भी पढ़ें। – ईद का बयान।

Itikaf ka tarika for ladies

ऐतकाफ क्या होता है? तो आपको बता दें कि ऐतकाफ का मतलब है, ठहरना यानी रुक जाना ऐतकाफ में बैठने का मतलब होता है; कि आप दुनिया की तमाम बातों को बाहर छोड़कर मस्जिद में दाखिल होते हैं, अपने रब को राजी करने के लिए.

वही औरतें अपने घरों में अपने रब को राजी करने के लिए ऐतकाफ में बैठती है; जिनके लिए आज हम इस पोस्ट में itikaf me baithne ka tarika for female बता रहे हैं.

दोस्तों ऐतकाफ की बात करें तो बहुतों को यह लगता है, कि जब रमजान आता है, तो ऐतकाफ में बैठा जाता है, जोकि सही भी है; लेकिन ऐतकाफ की किस्में कई तरह की है, जिनमें रमजान के अलावा भी ऐतकाफ में बैठा जाता है, आईए उन्हें जान लें.

Itikaf kitne trah ke hote hai – Itikaf ki kismein

इस्लाम में रमजान के महीने में की गई इबादतों का सवाब ज्यादा मिलता है; और इस महीने ऐतकाफ मैं बैठने का सवाब ज्यादा मिलता है. 

किस्मों की बात करें तो इस्लाम में ऐतकाफ में बैठने की 3 किस्में है; जिनमें आप ऐतकाफ की नियत से मस्जिद में या घर में ऐतकाफ में बैठ सकते हैं. 

  • Itikaf sunnat e muakkida
  • Itikaf wajib 
  • Itikaf mustahab

तो यह थी ऐतकाफ की किसमें लेकिन आज हम आपको सिर्फ ऐतकाफ सुन्नत ए मोअक्किदह ही बताएंगे; क्योंकि इसे ही रमजान के महीने में अदा किया जाता है, और इसकी फजीलत सबसे ज्यादा बयान की गई है.

ये भी पढ़ें। शब ए कदर का बयान।

Itikaf me baithne ka tarika for female

Itikaf me baithne ka tarika for female की बात करें तो औरतें ऐतकाफ में बैठ सकती है; लेकिन उन्हें अपने घरों में ही किसी एक कोने में जहां वह नमाज अदा करती हैं, वहां बैठना होता है. और ऐतकाफ की नियत करनी होती है, इसके बाद ऐतकाफ में बैठकर इबादत करती है. 

ऐतकाफ में बैठने से बहुत फजीलत हासिल होती है, और खवातीन अपने घर में किसी भी जगह पर ऐतकाफ की नियत से बैठ सकती हैं.

इस जगह से वह घर के किसी और कोने में नहीं जा सकती हां कुछ शर्ते होती है; जब वह बाहर जा सकती हैं, जिन्हें हम ऐतकाफ की शर्ते में जानेंगे इसलिए हमारे साथ बनी रहें.

ये भी पढ़ें। जुम्मे का बयान।

Itikaf Ka Tarika Aurton Ke Liye. 

Itikaf ka tarika aurton ke liye मर्दों के मुकाबले थोड़ा अलग हो जाता है; जहां मर्दों को मस्जिद में इतिहास में बैठना जरूरी होता है, वही औरतों के लिए मस्जिद जाना मकरुह होता है.

इनके अलावा भी औरतें ऐतकाफ में तब तक नहीं बैठ सकती जब तक कि उनके शौहर उन्हें ऐतकाफ में बैठने की इजाजत ना दे दें; अगर अपने शोहर की इजाजत के बिना वह ऐतकाफ में बैठेंगी तो वह गुनाह के बराबर होगा. 

ऐतकाफ में खवातीन जिस कोने में ऐतकाफ की नियत से बैठी हुई है उस जगह से वह बिना किसी जायज और बड़ी वजह के इधर-उधर नहीं जा सकती.

ऐसा नहीं कि आप जिस कोने में है, वहां बैठकर अल्लाह की इबादत करने के बजाए घर में हर जगह घूम रही हैं, ऐसा करना मना है; और ऐसा करने से गुनाह मिलता है, क्योंकि ऐतकाफ का माना ही है रुक् जाना अल्लाह की इबादत करना. 

मर्दों के लिए भी ऐसा ही है; वह बिना किसी जायज और बड़ी वजह के मस्जिद से बाहर आना जाना नहीं कर सकते और ना ही मस्जिद में दुनियावी बातें कर सकते हैं. 

Itikaf me baithne ki shart. 

Itikaf me baithne ki shart वो है, जिन्हें माने बिना आप ऐतकाफ में नहीं बैठ सकते इन को मानने के बाद ही आपको अंदाजा लगता है, कि आपको ऐतकाफ में कैसे बैठना है? और किन चीजों को नहीं करना है, जिससे आपका ऐतकाफ टूट सकता है. 

  • मुसलमान होनि जरूरी है। 
  • ऐतकाफ की हालत में रोजा रखना जरूरी है, अगर रोजाना रखा गया तो आपका ऐतकाफ मुकम्मल नहीं होगा. 
  • खवातीन अपनी जगह छोड़ कर घर में कहीं भी आ जा नहीं सकती बशर्ते कोई बड़ी वजह ना हो जैसे पखाना, पेशाब तो इस हालत में बाहर जा सकती है, लेकिन किसी और से मिलजुल नहीं सकती और ना ही खूब बातें कर सकती हैं. 

Itikaf me baithne ka waqt 

Itikaf me baithne ka waqt क्या है? या कहें ऐतकाफ में कब बैठा जाता है? तो आपको बता दें मर्द हो या औरत ऐतकाफ में बैठने का सही वक्त मगरिब की अजान से पहले तक है.

लेकिन हमारी आपको यह राय है, कि आप असर की अजान के बाद ऐतकाफ में बैठ जाएं ज्यादातर लोग इसी वक्त बैठते हैं; और यही वक्त सबसे अफजल माना जाता है.

बता दें आप इसी तरह ऐतकाफ में नहीं बैठ सकते कि कोई और बैठ रहा है, तो हम भी जा कर बैठ जाएं आपको ऐतकाफ में बैठने के लिए ऐतकाफ की नियत करना जरूरी है, साथ ही साथ ऐतकाफ की दुआ भी पढ़ना जरूरी है.

मर्दों के लिए तो मस्जिद में जाना जरूरी है, वही औरतें घर में किसी भी कोने में बैठ सकती हैं; ज्यादातर खवातीन जहां नमाज अदा करती हैं, वहीं बैठा करती हैं, जो कि बेहतर है.

लेकिन अगर आपका कोई जगह फिक्स नहीं है, कि आप नमाज के लिए इस जगह बैठेंगी; तो आप घर के किसी भी कोने में ऐतकाफ की नियत से बैठ सकती हैं.

रमज़ान उल मुबारक की बातें। –

Itikaf me baithne ki dua

ऐतकाफ में बैठने के लिए एक खास हुआ होती है, जिसका पढ़ना जरूरी होता है; आप जब ऐतकाफ के लिए घर के किसी कोने में जाएं तो उस कोने में जाने से पहले इस खास दुआ को जरूर पढ़ें.

दुआ अरबी में - "بسم الله دخلت و عليه توكلت و نويت سنت الاعتكاف۔ "

दुआ हिंदी में -  "बिस्मिल्लाहि दखल्तु व अलैहि तवक्कलतु व नवैतु सुन्नतुल एतिकाफ़" 

रोज़े कीन चीजों को करने से टूट जाता है…

Itikaf me baithne ki niyat

इस्लाम में किसी भी काम करने से पहले उस काम की नेक और सही नियत करना जरूरी है; उसके बाद ही आप कोई भी काम कर सकते हैं,और ऐसा करना अफजल है.

यूं तो नियति इरादे का नाम होता है, लेकिन अगर जबान से नियत बोल दी जाए तो वह मुस्तहब है.

नियत - "या अल्लाह नियत मैं करती हूं ऐतकाफ की, वास्ते तेरे और तेरी इबादत करने की"

अलविदा जुमा का बयान। –

Itikaf me baithne ka tarika for female

Itikaf me baithne ka tarika for female हो या male दोनों एक है, मर्दों में बस मस्जिद में ऐतकाफ की नियत और दुआ पढ़कर ऐतकाफ में बैठा जाता है; और औरतों में घर पर ही ऐतकाफ की नियत, दुआ पढ़कर किसी भी कोने में जो पाक साफ हो वहां बैठ सकती हैं.

आज हम आपको Ramzan me itikaf ka tarika for female बताएंगे…

Itikaf ka tarika for female

  • सबसे पहले किसी भी काम को करने से पहले उसकी नियत करना जरूरी है; इसलिए आप नियत कर लें कि आप रमजान के महीने की ऐतकाफ में बैठ रही हैं.
  • इसके बाद आप 20 रमजन का इंतजार करें क्योंकि रमजान में 10 दिन का ऐतकाफ करना जरूरी होता है; और 20 रमजान की शाम मगरिब की नमाज से शुरू हो जाता है.
  • आप असर की नमाज अदा करने के बाद ही उस कोने में चली जाएं जो आपने चूस की है, बैठने के लिए और वहां जाकर बैठ जाएं; अब आप जरूरी कामों को छोड़कर किसी भी काम के लिए उस कोने से कहीं और ना जाएं.
  • और फिर आप उस कोने में बैठ कर अल्लाह की खूब मन से इबादत करें और अल्लाह को राजी करने की कोशिश करें; और अपने परिवार और तमाम उम्मते मोहम्मदिया के लिए दुआ करें.
  • इसके बाद जब ईद का चांद दिखेगा तब आपका ऐतकाफ मुकम्मल होगा ईद का चांद देखने के बाद आप अपना कोना छोड़ दें; और ईद की तैयारियों में लग जाएं.
(1) IFTAR ME DUA KAISE MANGE
(2) SEHRI ME DUA KAISE MANGE
(3) ILM KI DUA IN HINDI

आज आपने क्या जाना?

तो यह कि हमारी आज की पोस्ट इस पोस्ट में हमने आपको नीचे दी हुई तमाम चीजों की जानकारी आसान लफ्जों में तफसील से बताने की कोशिश की ताकि आपको ऐतकाफ की जानकारी हो सके और आप इस इबादत औको मुकम्मल कर सकें.

  • Itikaf kya hota hai? 
  • Itikaf me baithne ka tarika for female. 
  • Itikaf Ka Tarika Aurton Ke Liye. 
  • Itikaf me baithne ki shart. 
  • Itikaf me baithne ki dua. 
  • Itikaf me baithne ki niyat.
  • Itikaf me baithne ka waqt.

हमें उम्मीद है ! आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी और आपको आपके तमाम सवालों के जवाब मिल गए होंगे; अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे अपने व्हाट्सएप फेसबुक पर शेयर जरूर करें.

आज के लिए बस इतना ही हमारी अल्लाह से दुआ है; कि तमाम मुसलमानों को रमजान की अहमियत, कदर और अल्लाह की इबादत करने की तौफीक अता फरमाए आमीन !!!

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