Hajj ki sunnat in hindi – hajj ki sunnat kitni hai? – हज की सुन्नत हिन्दी में।

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Hajj ki sunnat in hindi में हम hajj ki sunnatein kitni hain? बताएंगे ताकि आप इन सुन्नतों को जान कर उनहें अदा कर सकें और हज के सवाब को कंई गुना बढा लें.

यह बात तो हर मुसलमान को पता है, कि इस्लाम में हर चीज मैं कुछ ना कुछ पर सुन्नत, वाजिब और नफिल होते हैं; ठीक इसी तरह हज जो की फर्ज इबादत है, उसमें भी हज के कुछ फर्ज, सुन्नतें, वाजिबात और अरकान होते हैं.

हज के वाजिबात, फर्ज और अरकानों को छोड़ने से हज मुकम्मल नहीं होता और अगर वाजिबात छूट जाए; तब तो दम करके हज मुकम्मल किया जा सकता है, लेकिन हज की सुन्नतें अदा ना हो पाने पर हज मुकमल होता है.

हज की सुन्नतों को अदा करने से हज का सवाब कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है, और हज सही तरीके से मुकम्मल हो जाता है.

Hajj ki sunnat in hindi

Hajj ki sunnat in hindi में यह हैं, की एहराम बांधने वाले दिन से लेकर 10 जिल-हिज्जा तक हज की दुआ पढना, जमजम का पानी पिना, अराफात के मैदान में गुसल करना शामिल है.

लेकिन दोस्तों इनके अलावा भी चंद और खास हमारी नबी की सुन्नतें मौजूद हैंं, जिनको अदा करने से हज का सवाब काफी बढ जाता है; और अल्लाह को नबी की सुन्नत पर चलने वाला शख्स बेहद पसंद आता है.

Hajj ki sunnat kitni hai?

Hajj ki sunnat kitni hai? तो आपको बता दें हज में लगभग 13 सुन्नतें हैं, जिनको अदा करना अफजल है; जिसको अदा करना अफजल माना जाता है.

आपको बता दें सुन्नत अदा करने से हज का सवाब बढ जाता है, लेकीन अगर किसी वजह से आपका सुन्नत छूट जाता है; तो आपका हज कबूल हो जाएगा, लेकिन बिना किसी उज़र के सुन्नतों को छोडा जाए तो इससे गुनाह होगा.

Hajj ki sunnatein in hindi

  • एहराम बांधने से पहले गुसल या वज़ू करना।
  • एहराम में दो नंई चादरों का इस्तेमाल करना।
  • एहराम बांधने के बाद दो रकात नमाज़ पढना।
  • एहराम बांधने के बाद कसरत से तलबिया पढना।
  • तवाफ ए कुदूम करना।
  • कसरत से तवाफ करना।
  • इस्तेबाह करना।
  • तवाफ के दौरान रमल करना।
  • हजरे अस्वद को चूमना।
  • सफा मरवा में दो सब्ज़ मील के बीच दौडना।
  • 10, 11, और 12 को तीन जमरातों को कंकडियां मारना।
  • कुरबानी करना सुन्नत है।
  • वादी ए मुहस्सब पर ठहरना।

तो यह थी वह तेराह सुन्नतें जिनको हज के दौरान करने पर सवाब ज्यादा मिलता है; आइए अब हम उन तमाम सुन्नतों को और अच्छे से समझ लेते हैं, ताकि हज की सुननतों को अदा करने में कोई गलती ना हो.

एहराम बांधने से पहले गुसल या वज़ू करना।

एहराम बांधने से पहले गुसल करना सुन्नत है, अगर किसी परेशानी या बीमारी के डर से गुसल ना किया गया, तो कोई हर्ज नहीं उसके बदले वजू कर लें सुन्नत अदा हो जाएगा.

हज करने से पहले इन चीजों को जान लें। –

एहराम में दो नंई चादरों का इस्तेमाल करना।

जब एहराम बांधा जाता है, तो हमें सिले हुए कपड़ों को हटा कर दो सफेद चादरों को लपेटना होता है; एक चादर कमर पर लूंगी की तरह और दूसरी शॉल की तरह कंधों पर.

एहराम में दो नहीं चादरों का इस्तेमाल करना सुन्नत है; अगर नई चादर ना हो तो पुरानी चादर को ही इस्तेमाल करें बशर्ते कि वह पाक और साफ होनी चाहिए.

एहराम बांधने के बाद दो रकात नमाज़ पढना।

जब आप हज के लिए एहराम बांध लेते हैं, तो उसके बाद आपको 2 रकात नफिल नमाज पढ़ना चाहिए यह हज की सुन्नतों में से एक है; अगर ना पढी जाए तो कोई हर्ज नहीं लेकिन पढ़ लिया जाए तो काफी सवाब हासिल होता है.

एहराम बांधने के बाद कसरत से तलबिया पढना।

एहराम बांधने के बाद से हज मुकम्मल करने तक आप कसरत से तलबिया पढें यह सबसे अहम सुन्नतों में से एक है; आप इसे फर्ज की तरह लें और ज्यादा से ज्यादा तलबिया पढ़ें, यह एक सबसे अच्छा अमल है, हज के दौरान.

तवाफ ए कुदूम करना।

तवाफ ए कुदूम करने का मतलब यह है, कि जब आप अपने मुल्क से पहली बार मस्के की जमीन पर कदम रखते हैं; और काबा शरीफ की जियारत को जाते हैं, तो उस वक्त हाजरी के लिए तवाफ करना सुन्नत है.

हज से पहले नमाज़ पढने का सही तरीका जरूर जानें। –

कसरत से तवाफ करना।

जब हम हज को जाते हैं, तो हज तो 4 से 5 दिनों में ही मुकम्मल हो जाता है, लेकिन हम एक महीने पहले से ही मक्का में जाकर अल्लाह का जिक्र ओ अज़कार करते हैं.

तो जब मक्का में होते हैं, तो उस वक्त हमें कसरत से तलबिया पढ़नी चाहिए और नफील तवाफ करना चाहिए यह हमारे नबी की सुन्नत है.

इस्तेबाह करना।

इस्तेबाह करना यानी तवाफ के वक्त सही तरीके से एहराम का बांधना यानी दो चादरों को सही तरीके से बांधना जो एहराम हम अपने घर या एयरपोर्ट से बांधकर जाते हैं, वह नॉर्मल तरीके से सिर्फ ओढा जाता है, लेकिन जब हज के लिए तवाफ करते हैं, तो उस वक्त एक खास तरीके से एहराम बांधा जाता है, जिसे इस्तेबाह कहते हैं.

इस्तेबाह कुछ इस तरह करना है, आपको की आप एक चादर लें और अपने दाएं हाथ के बगल से निकाल कर बाएं पर चढा लें।

तवाफ के दौरान रमल करना।

तवाफ के दौरान रमल करना सुन्नत है, मतलब तवाफ के दौरान आपको पहलवानों की तरह चलना होता है; थोडा अकड के और यह सिर्फ पहले तीन चक्करों में में करना सुन्नत है.

रमल आपको सिर्फ पहले तीन चक्करों में करना है, उसके बाद आप जैसे नॉर्मल चलतें हैं, उस तरह बाकी के चार चक्कर मुकम्मल करें.

जुमा का बयान जरूर पढें। –

हजरे अस्वद को चूमना।

हजरे अस्वद यानी काला पत्थर जो बैतुल्लाह पर लगा होता है, उसे सफा और मरवा में दौड़ने के दरमियान जब एक चक्कर मुकम्मल हो जाता है, तब सुमना सुन्नत है.

अगर भीड़ ज्यादा है, चूमना नहीं हो रहा तो हाथों को हजरे अस्वद पर रखें फिर अपने हाथों को चुम ले और अगर ऐसा भी नहीं कर सकते तो दूर से ही इशारों में चूम लें, सुन्नत अदा हो जाएगा.

सफा मरवा में दो सब्ज़ मील के बीच दौडना।

सफा और मरवा के बीच में दो सब्ज़ मील मौजूद है, यानी हरे रंग के दो निशान है, या पट्टी कह सकते हैं, उनके बीच में दौड़ना सुन्नत है; दौड़ने से मुराद यह है, कि आम चाल के मुकाबले थोडा तेज चलना.

इन चीजों की मालूमात होना हर मुसलमान को होना चाहिए। –

10, 11, और 12 जिल-हिज्जा को तीन जमरातों को कंकडियां मारना।

10, 11, और 12 जिल-हिज्जा को तीन जमरातों को कंकडियां मारना सुन्नत है पहले जब रात को 7 कंकड़ी और दूसरे तीसरे जमरात को 21-21 कंकरिया मारना सुन्नत है.

कंकरिया मीना से मारना सुन्नत है, लेकिन अगर मक्के से भी मार दी जाए तो कंकरिया तो कबूल होंगी लेकिन सुन्नत छूट जाएगा और सुन्नत का सवाब नहीं मिलेगा.

कुरबानी करना सुन्नत है।

अगर कोई शख्स सिर्फ हज के लिए गया है, और उमराह नहीं किया है, तो उस पर कुर्बानी करना सुन्नत होगा; अगर ना करें तो कोई हर्ज नहीं है, लेकिन इससे सवाब कब मिलेगा और कर दिया जाए तो बेहतर है.

लेकिन ज्यादातर लोग हज उमराह एक साथ करते हैं, जो कि अफजल माना जाता है, और ऐसा ही करना चाहिए.

वादी ए मुहस्सब पर ठहरना।

मीना से वापसी के वक्त रास्ते में एक वादी पडती है, जहां पर ठहरना सुन्नत है; भले ही चंद लम्हों के लिए ही सही लेकिन अगर कोई ना ठहर सका तो कोई बात नहीं.

चंद मसनून दुआएं जो आपको पता होनी चाहिए। –

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट hajj ki sunnat in hindi जिसमें हमने आपको hajj ki sunnat kitni hai? कि मुकम्मल मालुमा देने की कोशिश की उम्मीद है, आपको यह पोस्ट अच्छी लगी होगी और आप आपके सवालों के जवाब मिल गए होंगे.

आप इन तमाम सुन्नतों पर अमल करें और अपने हज के सवाब को कई गुना बढ़ा लें मिलते हैं, अगली पोस्ट में अल्लाह हाफिज !!!

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