Eid ke din kabristan jana kaisa hai? – Kya eid ke din kabristan jana chahiye

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अगर आपके घर मे किसी का inteqal हो गया हो तो आपके मन मे भी ये सवाल उठता होगा कि अखिर eid ke din kabristan jana kaisa hai? और इससे जुड़े काफी सारे खयाल और सवाल आपके मन मे आते होंगे इसलिए आज हम आपके लिए ये पोस्ट लाए हैं. 

आइये बिना समय बर्बाद किए इसे जानते हैं….. 

Eid ke din kabristan jana kaisa hai? या kisi bhi din kabristan jana kaisa hai?

हमने आपको इस पोस्ट (Shab e barat me qabristan jana kaisa hai?) मे आपको बताया था कि अगर कोई शख्स shab e barat की रात या किसी भी दिन चाहे eid या alvida jumma ही क्युं ना हो; अगर वो कब्रिस्तान जाता है तो उसे उसका सवाब मिलता है. 

यहां एक बात का ध्यान जरूर रखें कि आप किसी भी दिन कब्रिस्तान जा सकते हैं लेकिन अच्छी नियत के साथ; यहां अच्छी नियत का मतलब है…. 

  • अपने माँ-बाप या घर वालों की मगफिरत की दुआ करने के लिए, या उनकी याद आई तो उनके पास जाने का मन किया. 
  • या अपनी मौत को याद करने के लिए और उस खुशी मे मौत को शामिल करने के लिए; ताकि आपको पता चले कि खुशियां 2 पल के लिए हैं और मौत आनी ही है. 
  • या सभी मुर्दों की कब्र पर फातिहा पढ़ने के लिए.
  • या और कोई नियत से जाने पर आपको सवाब मिलते हैं .

इन सभी बातों से हमें पता चला चलता है कि आपका जब मन आप कब्रिस्तान जा सकते हैं; वहां फातिहा पढ़ सकते हैं अपने घरवाले जो गुजर चुके हैं उन्हें याद करने के लिए या अपनी मौत को याद करने के लिए कब्रिस्तान जाने पर सवाब मिलता है. 

अब रही बातें eid ke din kabristan jana kaisa hai? की तो आइये इसका जवाब भी आपको देते हैं….

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Eid ke din kabristan jana kaisa hai? – kya eid ke din kabristan ja sakte hai?

जैसा मैंने आपको ऊपर बताया कि आप किसी भी दिन कब्रिस्तान जा सकते हैं और जो मन वहां कर सकते हैं (अच्छे आमाल, जैसे फातिहा, सूरह यासिन या और कुछ का पढ़ना); उसी तरह इस सवाल eid ke din kabristan jana kaisa hai? का भी सीधा ज़वाब है कि……. 

जी हां, आप ईद के दिन भी कब्रिस्तान जा सकते हैं और आपको इसका सवाब भी ढेर सारा मिलेगा; पहला तो इस बात का कि आपने सभी मुर्दों और अपने मुर्दे घर वालों को ईद के पाक और मुबारक दिन मे याद किया और उन्हें अकेला नहीं छोड़ा.

दूसरा सवाब ये होगा कि आपने अपनी मौत को ना भूलते हुए उसे अपनी खुशियों (ईद की खुशी) मे शामिल किया और कब्रिस्तान गए; हो सकता है कि आपको ये बातें छोटी सी लग रही होंगी लेकिन ये सब सच और बहुत बड़ी बातें हैं. आपको कब्रिस्तान जाने का बहुत ज्यादा सवाब मिलता है क्यूंकि जिंदगी और खुशी सिर्फ 2 पल की है और आपके साथ इस दुनिया से उसे भी जाना है. खुशियां कुछ पल की मेहमान होती हैं और आपकी मौत को टाल नहीं सती. 

इसलिए आपने देखा होगा कि eid ke din kabristan jane का रिवाज सा बन गया है जो कि बहुत अच्छी बात है कि लोग सच्चाइ से रुबरु हैं; की मौत और खुशियां हमेशा के लिए नहीं इसलिए इन दोनों को एक साथ ही रहना चाहिए. 

आइए आपको इससे जुड़ी एक हदीस बताता हूं… 

Eid ke din kabristan jane ki hadis

एक बार प्यारे आका सल्लल्लाहु-अलैहि-वसल्लम एक जगह से गुजर रहे थे तो वहीं कुछ लोग खुशियां बांट रहे थे और हंसी मजाक का माहौल बना हुआ था; तब ही प्यारे आका वहाँ जाते हैं और उनसे बातें करते हैं कि….. 

बहुत खुश लग रहे हो और खुश रहो भी, लेकिन अपनी मौत को मत भूलना क्यूंकि मौत तो आनी ही है और खुशी आज नहीं तो कल जानी ही है. 

तो दोस्तों इससे हमें इस सवाल का आसान सा जवाब मिल जाता है कि Eid ke din kabristan jana achcha hai और Eid ke din kabristan jana chahiye; तो दोस्तों हमने आपको काफी अच्छे और गहराई मे समझाने की कोशिश की है कि Eid ke din kabristan jana achcha hai. उम्मीद करते हैं कि आपको समझ मे आया होगा.

चलिए अब आपको बताते है कि eid ke din kabristan jane ki dua kya hai? 

Eid ke din kabristan jane ki dua – Eid ke din kabristan me dakhil hone ki dua 

Eid eid ke din kabristan jane ki dua kya hai? इसका कोई अलग जवाब नहीं है आप जब भी कब्रिस्तान जायें आपको नीचे लिखी हुई दुआ कब्रिस्तान मे दाखिल होते वक्त पढ़नी है; तो वहीं कुछ लोग इस दुआ को दाख़िल होते वक्त और बाहर निकलते वक्त दोनों ही दफा पढ़ते हैं. 

Eid ke din kabristan jane ki dua in hindi text:- “अस्सलामो अलैकुम या अहलल क़ुबूर यग़फिरुल्लाहो लना वलाकुम वअन्तुम सलाफोना वनाहनो बिल अस्र.

उपर लिखी दुआ को आप कब्रिस्तान में दाखिल होते वक्त पढ़ सकते हैं, अब आइए आपको बताते है कि Eid ke din kabristan se bahar nikalne ki dua kya hai

Eid ke din kabristan se bahar nikalne ki dua kya hai

वैसे तो बाहर निकलने की कोई दुआ नहीं है लेकिन फिर भी ज्यादातर लोग “kabristan me dakhil hone ki dua” को ही बाहर निकलते वक्त भी पढ़ लेते हैं; और अगर आप भी चाहें तो इसे ही पढ़ सकते हैं और इसके साथ-साथ…. 

आपको durood sharif पढ़नी है और ayatul kursi पढ़कर, सलाम करते हुए बाहर निकल जाना है.

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आज आपने क्या सीखा

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने यह जाना कि eid ke din kabristan jana kaisa hai? और इससे जुड़े कई सारे सवालों के भी ज़वाब जाने, जैसे….

  • Kya eid ke din kabristan ja sakte hai? 
  • Eid ke din kabristan jane ki hadees kya hai? 
  • Eid ke din kabristan jane ki dua / eid ke din kabristan me dakhil hone ki dua?
  • Eid ke din kabristan se bahar nikalne ki dua?
  • और भी कई सारी चीजों को जाना….. 

उम्मीद करते हैं कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी और कुछ नया सीखने को मिला होगा; अगर हां, तो इसे अपने दोस्तों और घरवालों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उन्हें भी पता चल सके कि ईद के दिन कब्रिस्तान जाना कैसा है. 

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