Asar ki namaz ka tarika

Asar ki namaz ka tarika आप इस पोस्ट में जानेंगे साथ ही साथ आप और भी चीजें असर की नमाज का तरीका से रिलेटेड जानेंगे।

असर की नमाज पांच वक्त की नमाज में से तीसरी नमाज है जो जोहर के बाद होती है।

असर और मगरिब तक का जो समय होता है वह बेहद अफजल और खूबसूरत होता है।

असर और मगरीब के दरमियान के समय की बहुत फजीलत है जिसके बारे में हदीसों में हमें जानने को मिला।

आज की यह पोस्ट आपको बेहद पसंद आएगी हम आपको इस पोस्ट में असर की नमाज की फजीलत भी बताएंगे।

तो दोस्तों असर की नमाज का तरीका और इस की फजीलत जानने के लिए आप हमारे साथ बने रहे हैं।

सबसे पहले हम जान लेते हैं Asar ki Namaz ka Waqt kya hai.

Asar ki namaz ka waqt

असर का वक्त शाम का वक्त होता है, जो कि बड़ा सुहाना और खूबसूरत होता है. इस वक्त सूरज डूबने को जाता है और मगरिब के वक्त पूरा डूब जाता है।

आप लोगों को यह बात पता होगी या आप लोग नोटीस भी किए होंगे; कि असर और गरीब के बीच में समय बहुत कम होता है।

मतलब की चंद घंटों में लगभग डेढ़ से दो घंटे के अंदर मगरिब की अजान हो जाती है.

ऐसे में कई लोगों का यह सवाल होता है की असर की नमाज का वक्त कब तक रहता है।

लेकिन उससे पहले हम आपको बता दें की असर की नमाज का वक्त शाम को होता है।

गर्मियों में 5:00 बजे और सर्दियों में करीब 4:00 बजे के आसपास और जो मौजूदा मौसम चल रहा है; इसमें 4:00 से 4:15 के दरमियान अजान हो जाती है।

चलिए अब जानते हैं असर की नमाज का वक्त कब तक रहता हैं।

Tahiyatul wazu ki namaz ka tarika

Asar ki namaz ka waqt kab tak rahta hai

आपको बता दें असर की नमाज का वक्त सूरज डूबने से पहले पहले होता है; तो ऐसे में आप लोग सूरज डूबने से पहले पहले नमाज अदा कर ले तो अच्छा है।

लेकिन फिर भी दोस्तों आप कोशिश किया कीजिए की अजान होते ही नमाज अदा कर ले।

और अगर मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं; तो आजान से 5 मिनट पहले ही चले जाए मस्जिद जिससे आपको जमात मिल जाए।

Asar ki namaz ki rakat (asar ki namaz kitni rakat ki hoti hai)

असर की नमाज में 8 रकात होती है जिसमें 4 रकात सुन्नत और 4 रकात फर्ज शामिल है।

4 रकात सुन्नत पहले अदा की जाती है और 4 रकात फर्ज बाद में अदा की जाती है।

अगर आप मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए जाते हैं तो आप अजान होते ही 4 रकात सुन्नत पहले पढ़ ले।

सुन्नत पढ़ने के बाद आप दुआ मांगे और जब समय होगा तब इमाम साहब आएंगे और 4 रकात फर्ज नमाज पढ़ाएंगे।

और अगर घर में नमाज अदा कर रहे हैं; तो आप इस पोस्ट को पढ़ते रहें आपको asar ki namaz ka tarika पता चल जाएगा।

तो चलिए दोस्तों अब हम asar ki namaz ki niyat जान लेते हैं।

Asar ki namaz ki niyat in hindi

दोस्तों असर की नमाज़ की नियत की बाकी 4 वक्त की नमाज़ की नियत के जैसे ही है; इसमें कुछ ज्यादा अंतर नहीं होता है बस वक्त का और रकात का अंतर है।

हर मुसलमान को नमाज की नियत की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

आपको हम एक बात पहले ही बता दें हमने आपको अपनी पुरानी पोस्टों में बताया है; कि नमाज को शुरू करने के लिए नमाज़ की नियत करना जरूरी है।

बिना नियत किए आप की नमाज शुरू नहीं होगी।

Asar ki namaz ki 4 rakat sunnat ki niyat (Asar ki namaz ka tarika)

नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज असर की सुन्नत वास्ते अल्लाह ताला के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।

Asar ki namaz ki 4 rakat farz ki niyat (Asar ki namaz ka tarika)

नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज असर की फर्ज वास्ते अल्लाह ताला के मुंह मेरा तरफ क़ाबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।

Asar ki namaz ka tarika

असर की नमाज का तरीका बाकी 4 रकात नमाजों की तरह ही है आप पहले सुन्नत नमाज अदा करेंगे फिर फर्ज नमाज अदा करेंगे हम आपको पहले सुन्नत नमाज़ का तरीका बताएंगे और उसके बाद फर्ज नमाज के तरीके की और हम आगे बढ़ेंगे।

आपको एक बात बता दे असर की नमाज में कीरत नहीं की जाती है. मतलब आप असर की नमाज में कोई भी सुरह और सुबह फातिहा को आवाज से नहीं पढेंगे; आप उसे मन में पड़ेंगे और होठों हिलाएंगे।

असर की नमाज में कीरत नहीं करनी चाहिए यह नमाज की शर्तों में से आता है; हालाांक नमाज की कई सारी शर्ते हैं आप चाहें तो उन्हें भी जान सकते हैं।

नमाज़ की शर्तों की मालूमात होना जरूरी है क्योंकि इसे माने बिना आप की नमाज़ कबूल नहीं होगी।

Asar ki 4 rakat sunnat namaz ka tarika (asar ki namaz ka tarika)

सबसे पहले आप वजू करें वजू करना जरूरी है बिना वज़ु के आपकी नमाज नहीं कबूल होगी. इसलिए आप खुशु व कुजु के साथ वज़ु करें।

एक बात का ध्यान रखें वजू करने से पहले बिस्मिल्लाह जरूर पढ़ें. अगर आप बिस्मिल्लाह नहीं पढेंगे तो आपका वजु शुरू नहीं होगा और कबूल भी नहीं किया जाएगा।

Wazu banane ka sahi tarika

नियत करने के बाद यह आपकी पहली रकात शुरू होगी।

पहली रकात (asar ki namaz ka tarika)

पहली रकात में आप नियत के बाद सना पढ़ें सना आप अपने मन में पढेंगे. सना को आपको बोल बोल कर के आवाज में नहीं पड़ना।

सना पढ़ने के बाद आप एक मर्तबा सूरह फातिहा पढ़ें. और साथ ही में एक मर्तबा कुरान मजीद की कोई सूरत पढ़ें।

आप चाहे तो नमाज में पढ़ने वाली छोटी सूरह भी पढ़ सकते हैं; और चाहे तो बड़ी सुरह भी पढ़ सकते हैं

अब सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहू अकबर कहते हुए रूकु में जाएं. रूकूअ में जा कर के आप तीन या ज्यादा से ज्यादा 7 मर्तबा सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ें।

सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ने के बाद आप समीअल्लाहु लेमन हमीदह; और रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाएं।

खड़े होने के बाद आप सीधे सजदे में जाएं सजदा आपको दो मर्तबा करना है; और सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी यल अला पढ़ना है।

दोनों सजदे करने के बाद आप अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं. अब आपकी यहां दूसरी रकात शुरू होती है।

दूसरी रकात (asar ki namaz ka tarika)

दूसरी रकात में आपको सना नहीं पढ़ना है आप सीधे सूरह फातिहा पढ़े और फिर कोई एक सुरह पढ़ें।

सुरह पढ़ने के बाद आप रुकु मैं जाएं फिर खड़े हों, फिर सजदे में जाएं; और दोनों सजदे मुकम्मल करने के बाद तशहुद में बैठे जाएं।

तशहुद में आपको सिर्फ अत्तहियात पढ़ना है. अत्तहियात पढ़ने के बाद आप वापस अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं।

जब आप खड़े हो जाएंगे तब आपकी तीसरे रकात शुरू होगी।

तीसरी रकात (asar ki namaz ka tarika)

तीसरी रकात में आप खड़े होते ही सिर्फ सूरह फातिहा पढ़ें. ध्यान रहे यहां पर आपको कोई भी सूरह नहीं पढ़नी है।

सुरह फातिहा पढ़ने के बाद आप अब रुकू में जाएं रूकू में जाने के बाद आप खड़े हो. फिर सजदे में जाएं दो बार सजदा करें और दोबारा से अल्लाहू अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं।

यह आप की तीसरी रकात हो गई कंप्लीट अब आप चौथी रकात के लिए खड़े हैं।

12 rabi awwal ka roza aur iski fazilat

चौथी रकात (asar ki namaz ka tarika)

चौथी रकात में भी आप सिर्फ सूरह फातिहा पढ़े और सूरह फातिहा पढ़ने के बाद रूकु में चले जाएं।

रुको मैं आप 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी यल अज़ीम पढ़ें और खड़े हो जाएं. खड़े होने के बाद आप सीधे सजदे में जाएं।

सजदे में आप 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी यल अला पढें।

दोनों सजदे मुकम्मल करने के बाद आप तशहुद में बैठ जाएं; और तशहुद में नीचे बताई हुई चीजों को अच्छे से पढ़ें।

तशहुद में यह पढें (asar ki namaz ka tarika)

तशहुद में आप जब बैठेंगे तो आपको सबसे पहले अत्तहियात पढ़ना होगा. अत्तहियात पढ़ने के बाद आप दरूद शरीफ को पढ़ें और आखिर में दुआएं मासूरा को पढ़कर के सलाम फेर लें।

ऊपर बताई हुई सभी चीजों को सही से पढ़ने के बाद आप की नमाज मुकम्मल हो जाएगी।

अब हम asar ki 4 rakat farz namaz ka tarika जान लेते हैं।

Asar ki 4 rakat farz namaz ka tarika

4 रकात फर्ज नमाज का तरीका भी चार रकात सुन्नत की नमाज की तरह ही है. आपको बस इसमें नियत अलग करनी है।

Asar ki 4 rakat farz namaz ki niyat हमने आपको पहले ही बता दिया है।

आपको सबसे पहले नियत करनी है नियत करने के बाद आप सना पढें।

सना पढ़ने के बाद आप पहले रकात में होंगे. अब आप सूरह फातिहा एक मर्तबा और एक मर्तबा कोई एक सुरह पढ़ लें।

सूरह फातिहा पढ़ने के बाद आप रुकु में जाएंगे फिर खड़े होंगे और फिर सजदा करेंगे; जब आपका दोनों सजदा मुकम्माल हो जाएगा तब आप दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएंगे।

दूसरी रकात (asar ki namaz padhne ka sahi tarika)

  • जब आप दूसरे रकात में खड़े होंगे तब आपको सूरह फातिहा और कुरान मजीद की कोई एक सुरह पढ़नी है। इन्हें पढ़कर आप रुकु में चले जाएं और फिर रुकू कर के सजदे में चले जाएं।
  • जब आप दोनों सजदा कर लेंगे तब आपको खड़े नहीं होना है अब आपको तशहुद में बैठना है।
  • यहां तशहुद में आपको सिर्फ अत्तहियात पढ़ना है और अत्तहियात पढ़कर; आपको अल्लाहू अकबर कहते हुए तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है।

तीसरी रकात (asar ki namaz padhne ka tarika)

  • तीसरी रकात में आप सिर्फ एक मर्तबा सुरह फातिहा पढ़े और रुकु में चले जाएं; फिर खड़े हों और सजदे में चले जाएं।
  • दोनों सजदा करने के बाद अब आप चौथे रकात में आ गए हैं।

Eid milad un nabi ki namaz ka tarika

चौथी रकात (asar ki namaz ka tarika in hindi)

  • चौथी रकात में भी आपको सिर्फ एक मर्तबा सुरह फातिहा ही पढ़ना है, और कोई सुरह नहीं पढ़नी है; आप सिर्फ सूरह फातिहा पढ़कर रुकूअ में चले जाएं; रुकू करने के बाद आप खड़े हों और खड़े होने के बाद सजदे में जाएं।
  • दोनों सजदा करना है, सजदे में एक बात का आप ध्यान जरूर रखें कि आपको सजदा तेजी में नहीं करना है. आप आराम से सजदा करें कोई जल्दबाजी ना करें।
  • सजदा करने के बाद आप तशहुद में बैठें।
  • तशहुद में मैं आप सबसे पहले अत्तहियात पढ़ें फिर दरूद ए इब्राहिम पढ़ें; और फिर दुआ ए मासुरा पढ़कर सलाम फेर लें।

यहां आपकी असर की नमाज पूरी तरह से मुकम्मल हो गई अब आप अगर मस्जिद में है; तो इमाम साहब दुआ कराएंगे और आप आमीन बोलेंगे।

अगर आप घर में नमाज अदा कर रहे हैं; तो आप अल्लाह की बारगाह में हाथ फैलाकर तमाम मोमिन और मोमिनात के लिए दुआ मांगे।

Asar ki namaz ki fazilat

  • आपका माइंड फ्रेश होता है, क्योंकि हमारे देश में बहुत से लोग असर के वक्त अपने काम से फारिग हो जाते हैं;। और फिर नमाज पढ़ते हैं तो ऐसे में जो नमाज पढ़ते हैं; तो उनकी दिन भर की सारी टेंशन दूर हो जाती है।
  • अगर आप स्टूडेंट हैं तो आपके लिए यह वक्त पढ़ाई के लिए बहुत अच्छा होता है; ऐसे में आप इस वक्त नमाज पढ़कर मैथ जैसे कठिन सब्जेक्ट को प्रैक्टिस कर सकते हैं।
  • एक हदीस शरीफ में आया है कि जुमे के दिन असर से मगरिब के बीच में मांगी गई दुआ कबूल होती है। तो इस लिहाज से आप असर से मगरीब के दरमियान तिलावत किया करें; और उसके बाद दुआएं मांगा करें आपकी दुआएं इंशा अल्लाह कबूल होगी।

Ye bhi padhe

Conclusion (नतीज़ा)

हमने आपको आज असर की नमाज के बारे में बहुत चीजें बताई उम्मीद है; आप लोगों को यह समझ में आई होगी।

हमने आपको आज इस पोस्ट में asar ki namaz ka tarika, asar ki namaz ki niyat. asar ki namaz ki rakat.

और भी कई चीजें बताई आपको। अल्लाह से दुआ है, हमें कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए आमीन।

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो आप इसे तमाम मुसलमान भाइयों और बहनों तक पहुंचाएं।

इस्लाम और इस्लाम से जुड़ी सभी तरह की सही जानकारी पाने के लिए आप हमें बुकमार्क कर लें; और इस पोस्ट को अपने व्हाट्सएप, फेसबुक पर शेयर जरूर करें।

अल्लाह हाफिज !!!

Quransays.in

Leave a Comment