10 Muharram Ke Roze Ki Fazilat In Hindi – 10 मुहर्रम के रोज़े की फजीलत।

10 muharram ke roze ki fazilat मुहर्रम उल हराम के महीने में सबसे ज्यादा अफजल और फजीलत रखता है; और इस दिन रोज़ा रखना तमाम दिनों से ज्यादा अफजल और बेहतर है.

मोहर्रम के महीने की फजीलत साल के आम दिनों के मुकाबले कहीं ज्यादा है, और यह इस्लाम के 4 हुरमत वाले महीनों में से भी एक है, इस दिन रोजा रखने से काफी सवाब हासिल होता है.

यूं तो आप मुहर्रम के पुरे महीने में रोज़े रखने का सवाब और फजीलत काफी ज्यादा है, लेकिन खासतौर से 10 muharram (ashura) ke roze ki fazilat सबसे ज्यादा है.

आइए मुहर्रम की दस तारीख को रोज़ा रखने क फाफायदे को जानते हैं. –

Muharram ke roze ki fazilat in hindi

Muharram ke roze ki fazilat का आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस महीने हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम रमजान के बाद सबसे ज्यादा रोज़े रखा करते हैं.

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10 muharram ke roze ki fazilat in hindi

10 muharram ke roze ki fazilat in hindi में काफी ज्यादा है, लेकिन आज हम आपको चंद फजीलतें बता रहे हैं, जो हदीसों से साबित है.

  • मुहर्रम के रोजे की फजीलत आम महीनों से ज्यादा है।
  • मुहर्रम का रोज़ा रखना सुन्नत ए रसूल है।
  • आशुरा का रोज़ा रखना पिछले साल के गुनाहों का कफ्फारा है।

मुहर्रम के रोजे की फजीलत आम महीनों से ज्यादा है।

मुहर्रम के रोजे की फजीलत आम महीनों के मुकाबले कहीं ज्यादा है, इस महीने की फजीलत बताते हुए हजरत अबू हुरैरा रज़ी अल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि –

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया –

सब रोज़ों मे अफजल रमज़ान का रोजा और उसके बाद मुहर्रम का रोजा है, जो अल्लाह का महीना है और बाद नमाज़ ए तहज्जुद की नमाज़ है।

मुहर्रम का रोज़ा रखना सुन्नत ए रसूल है।

मोहरम का रोजा रखना हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की सुन्नत है, हमारे नबी कभी भी 10 मुहर्रम का रोज़ा नहीं छोडते थे.

हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने यहुदीयों की मुखालफत और मूसा अलैहिस्सलाम के एहतराम में रखा करते थे.

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आशुरा का रोज़ा पिछले साल के गुनाहों का कफ्फारा है।

आशुरा का रोज़ा रखने से पिछले साल के गुनाहों का कफ्फारा बनता है, इस फजिलत के ताअलुक एक हदीस में आता है, जिसके रावी हजरत अबू कतादा रज़ी अल्लाहु अन्हा हैं, जो फरमाते हैं –

नबी करीम सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम से आशुरा के दिन के रोज़े के बारे में पूछा तो आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि ये गुजरे हुए साल के गुनाहों का कफ्फारा है।

दोस्तों यह थे चंद फजीलतें मोहर्रम के महीने में और खास करके 10 मोहर्रम यानी आशूरा के दिन रोजे रखने से हासिल होते हैं, जो कि हदीसों से साबित है.

लेकिन इसके अलावा भी कई और ऐसे फायदे हैं, जिनको मोहर्रम के महीने में रोजा रखने से हासिल होता है; आइए उन्हें भी जान लेते हैं.

10 muharram ke roze rakhne ke fayde

  • नबी की सुन्नत अदा करने का सवाब मिलता है।
  • पिछले साल के गुनाहों का कफ्फारा बनता है।
  • तमाम सगीरा गुनाह माफ हो जाते हैं।
  • अल्लाह की रहमत और बरकत हासिल होती है।
  • आम नफिल रोज़ो से ज्यादा सवाब मिलता है।
  • प्यारे नबी के सुन्नत का अमल होता है।
  • मूसा अलैहिस्सलाम का एहतराम होता है।

आज आपने क्या जाना?

दोस्तों हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम को मोहर्रम के महीने में रोजा रखना काफी पसंद था; हमारे नबी मोहर्रम के महीने में खासतौर से आशूरा के रोजे को कभी भी नहीं छोड़ा करते.

हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम – मूसा अलैहिस्सलाम के ऐहतराम में रखा करते थे इसलिए यह रोजा हम मुसलमानों के लिए सुन्नत है.

आज हमने आपको हदीसों की रोशनी में 10 muharram ke roze ki fazilat बताई ताकि जो लोग इस पोस्ट को पढ़ें उन्हें इस अज़ीम ओ शान महीने में रोजे रखने की अहमियत का पता चल सके.

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