10 muharram ka roza rakhne ka tarika

10 muharram ka roza rakhne ka tarika काफ़ी लोग जानना चाह रहे थे क्योंकि 10 muharram ka roza रखना मोहर्रम के महीने की सबसे बड़ी और अफजल इबादत है.

10 मोहर्रम का रोजा रखना हमारे लिए सुन्नत है और यह रोजा नफिल रोजा होता है. हमारे नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने मोहर्रम के महीने में सबसे ज्यादा रोज़े रखें लेकिन पूरे महीने का रोजा सिर्फ रमज़ान का ही रखा.

आज हम आपको muharram ka roza ka tarika, niyat, dua सब बताएंगे इसलिए आप इस पोस्ट को आखिर तक जरूर पढ़ें.

10 muharram ka roza

10 muharram ka roza मुहर्रम उल हराम का सबसे अफजल रोजा होता है, यूं तो इस महीने ज्यादा से ज्यादा रोजा रखने को कहा गया है, लेकिन 10 मोहर्रम का रोजा रखना ज्यादा अहम है.

हदीसों में आया है, नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम और सहाबा ए किराम 10 मोहर्रम का रोजा कभी भी नहीं छोड़ा करते थे इसलिए हमें भी मोहर्रम का रोजा रखना चाहिए.

📢 जानें आयतुल कुर्सी पढने की बेमिसाल फजीलतें।

10 muharram ka roza kab hai?

इस्लामिक कैलेंडर और चांद के पोजीशन को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है, कि 2022 में हिंदुस्तान में 8 या 9 अगस्त को 10 मोहर्रम का रोजा होगा.

1 - सुरह यासीन पढने की फजीलत।
2 - सुरह मुल्क पढने की फजीलत।
3 - चारों कुल पढने की फजीलत।

Muharram ka roza kyu rakhte hain

Muharram ka roza kyu rakhte hain तो इसका जवाब हदीसों में आता है, कि इस दिन मूसा अलैहिस्सलाम ने फिरौन को हराकर इजराइली मुसलमानों को बचाया था.

तो हजरत मूसा अलैहिस्सलाम के एहतराम में हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रोजा रखा था इसलिए हम भी 10 मोहर्रम का रोजा रखते हैं.

Muharram ka bayan 2022 –

10 muharram ka roza hadees

बहुत से लोगों को लगता है, कि 10 मोहर्रम का रोजा इमाम हुसैन की शहादत की याद में रखा जाता है; लेकिन यह सच नहीं है.

आपको बता दें कि 10 मुहर्रम यानी अशुरा के दिन मूसा अलेही सलाम ने इसराइलीयों की जान बचाई थी; और प्यारे नबी ने मूसा अलेही सलाम के एहतराम में अशुरा का रोजा रखा था. ये है 10 मुहर्रम के रोज़े की सही हदीस.

10 muharram ka roza rakhne ki niyat

10 muharram ka roza rakhne ki niyat यह कि आपके ज़ेहन में 10 मोहर्रम का रोजा रखना होना चाहिए अगर आपके ज़हन में यह है, कि आपको कल मोहर्रम का रोजा रखना है, तो आपकी नियत हो जाएगी.

बाकी अगर आप जबान से कहना चाहें तो कुछ इस तरह नियत।

नियत – नियत करता हूं मैं माहे 10 मुहर्रम उल हराम का रोजा वास्ते अल्लाह तआला के

रोज़ाना पढने वाली मसनून दुआएं। –

10 muharram ka roza kaise rakhe?

10 muharram ka roza kaise rakhe? तो आपको बता दें रोजा चाहे फर्ज हो, सुन्नत हो या फिर नफिल उसे रखने का तरीका एक ही रहता है, इस्लाम में रोजा रखने के तरीके में कोई तब्दीली नहीं आती.

जिस तरह हम रमजान उल मुबारक का रोजा रखते हैं, ठीक उसी तरह से मुहर्रम उल हराम का भी रोजा रखा जाएगा इसमें कोई तब्दीली नहीं होगी हां लेकिन रमजान उल मुबारक का रोजा ज्यादा फजीलत वाला होता है.

10 muharram ka roza rakhne ka tarika

  • सबसे पहले 10 मोहर्रम को सेहरी करें
  • सेहरी करने के बाद मुहर्रम के रोज़े की नियत करें।
  • नियत करने के बाद फज़र की नमाज मस्जिद में अदा करें।
  • आपका रोज़ा शुरु हो जाएगा।
  • अब आप दिन भर अल्लाह की इबादत करें और शाम को इफ्तार कर के रोज़ा खोलें।

इतना सब कुछ करने के बाद आप का रोजा शुरू हो जाएगा अब आप 10 मोहर्रम की इबादत को करें और इस रोजे की फजीलत को हासिल करें.

Muharram ka roza kholne ki dua

Muharram ka roza kholne ki dua “अल्लाहुम्मा इन्नि लका सुम्तु वा आला रिज़्क़-इका-आफ़तरतु” है.

दोस्तों आप चाहे कोई भी रोजा रखें हमारा मतलब रमजान, शबे बरात, शबे मेराज या फिर मुहर्रम, किसी का भी रोजा रखेंगे तो रोजा रखने की और खोलने की दुआ हमेशा एक ही रहेगी.

सुन्नत तरीका और दुआ। –

आज आपने क्या जाना?

तो दोस्तों यह थी हमारी आज की पोस्ट आज हमने आपको 10 muharram ka roza rakhne ka tarika आसान लफ्जों में बताया उम्मीद है ! आपको इस रोजे से जुड़ी तमाम जरूरी बातें मालूम हो गई होगी.

अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे अपने व्हाट्सएप, फेसबुक पर शेयर जरूर करें अल्लाह हाफिज !!!

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